
पटना/वैशाली, 28 जुलाई 2025 — ऐतिहासिक वैशाली की भूमि पर निर्मित ‘बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय सह स्मृति स्तूप’ का उद्घाटन कल (29 जुलाई) मुख्यमंत्री नीतीश कुमार करेंगे। यह भव्य स्मारक वैश्विक बौद्ध समुदाय के लिए श्रद्धा, आकर्षण और बौद्ध पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है।
15 देशों से पहुंचे बौद्ध भिक्षु
इस ऐतिहासिक अवसर पर चीन, जापान, श्रीलंका, थाईलैंड, नेपाल, तिब्बत, म्यांमार, मलेशिया, भूटान, वियतनाम, कंबोडिया, मंगोलिया, लाओस, बांग्लादेश और इंडोनेशिया सहित 15 देशों से बौद्ध भिक्षु वैशाली पहुंच चुके हैं।
550.48 करोड़ की लागत, 72 एकड़ भूमि में विकसित
इस स्तूप को 550 करोड़ 48 लाख रुपये की लागत से 72 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया गया है। इसका निर्माण पूरी तरह पत्थरों से किया गया है — बिना ईंट, सीमेंट या कंक्रीट के, जो आधुनिक भारत में अपनी तरह की पहली संरचना है।
बुद्ध की अस्थियां और स्थापत्य की भव्यता
स्तूप के पहले तल पर भगवान बुद्ध का अस्थि कलश स्थापित है, जो 1958-62 की खुदाई में प्राप्त हुआ था। स्तूप की ऊंचाई 33.10 मीटर, आंतरिक व्यास 37.80 मीटर और बाहरी व्यास 49.80 मीटर है। इसकी ऊंचाई प्रसिद्ध सांची स्तूप से करीब दोगुनी है।
आधुनिकता और आध्यात्मिकता का संगम
- राजस्थान के वंशी पहाड़पुर से लाए गए 42,373 बलुआ पत्थर जोड़ने के लिए टंग ऐंड ग्रूव तकनीक का इस्तेमाल हुआ है।
- चारों ओर लिली पोंड, ध्यान केंद्र, संग्रहालय ब्लॉक, एम्फीथिएटर, कैफेटेरिया, और 500 KW सौर संयंत्र जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं।
- प्रवेश द्वार पर सांची शैली का तोरण द्वार, जबकि मुख्य आकर्षण ओडिशा के कलाकारों द्वारा निर्मित भगवान बुद्ध की भव्य प्रतिमा होगी।


