भ्रष्टाचारियों के लिए ‘काल’ बना साल 2026! 2 महीने में ही टूटे रिकॉर्ड, 2024 के मुकाबले 28 गुना ज्यादा ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):

  • बड़ी कामयाबी: जनवरी-फरवरी 2026 में भ्रष्टाचार के 28 मामले दर्ज, निगरानी ब्यूरो का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन।
  • तुलना: साल 2024 के मुकाबले 28 गुना और 2025 के मुकाबले 4 गुना ज्यादा कार्रवाई।
  • एक्शन: ₹7.99 लाख की रिश्वत राशि जब्त, 200 केस का होगा ‘स्पीडी ट्रायल’।
  • संकल्प: निगरानी डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार बोले— “अब भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाना हमारी प्राथमिकता।”

पटना: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग अब अपने निर्णायक दौर में पहुँच गई है। नीतीश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का असर धरातल पर दिखने लगा है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) ने साल 2026 के शुरुआती दो महीनों में ही भ्रष्टाचार के सिंडिकेट को हिला कर रख दिया है। ब्यूरो के महानिदेशक जिेंद्र सिंह गंगवार ने सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए ऐसे आंकड़े पेश किए, जो रिश्वतखोरों की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं।

आंकड़ों की जुबानी: 2024 बनाम 2026 का ‘कड़ा प्रहार’

​निगरानी विभाग ने इस साल जनवरी और फरवरी में कुल 28 मामले दर्ज किए हैं। अगर पिछले तीन सालों के शुरुआती दो महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो इस साल की तेजी हैरान करने वाली है:

वर्ष (जनवरी-फरवरी)

दर्ज किए गए केस

तुलनात्मक वृद्धि (2026 से)

2023

10 मामले

लगभग 3 गुना कम

2024

01 मामला

28 गुना कम

2025

07 मामले

4 गुना कम

2026

28 मामले

रिकॉर्ड तोड़

टैप और DA केस: ₹7.99 लाख की जब्ती

​डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने बताया कि इन 28 मामलों में लोकसेवकों को रंगे हाथ रिश्वत लेते (Trapping) पकड़ा गया है, साथ ही आय से अधिक संपत्ति (DA) के बड़े मामलों का भी भंडाफोड़ हुआ है। केवल दो महीनों में ही भ्रष्ट अधिकारियों के पास से 7 लाख 99 हजार रुपये की रिश्वत राशि बरामद की गई है। उन्होंने बताया कि औसतन हर महीने 14 भ्रष्टाचारियों पर गाज गिर रही है, जबकि 25 सालों का औसत केवल 6 केस प्रति माह रहा है।

200 केस का ‘स्पीडी ट्रायल’: अब फाइलों में नहीं दबेगा अपराध

​निगरानी ब्यूरो का फोकस अब केवल गिरफ्तारी पर नहीं, बल्कि सजा (Conviction) दिलाने पर भी है।

  • सजा का रिकॉर्ड: साल 2025 में 30 मामलों में सजा सुनाई गई थी। इस साल केवल दो महीने में 4 भ्रष्टाचारियों को सजा मिल चुकी है।
  • लक्ष्य: ब्यूरो ने 200 ऐसे मामलों को चिन्हित किया है जिनका ‘स्पीडी ट्रायल’ कराया जाएगा।
  • 24/7 अलर्ट: ब्यूरो कार्यालय अब चौबीसों घंटे काम कर रहा है और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को पहले से कहीं ज्यादा सुगम बना दिया गया है।

सुविधाओं का विस्तार: कैंटीन का उद्घाटन

​डीजी गंगवार ने इस अवसर पर ब्यूरो परिसर में नवनिर्मित कैंटीन भवन के जीर्णोद्धार और विस्तारीकरण का भी शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि बेहतर बुनियादी ढांचे से अधिकारियों के कामकाज की क्षमता बढ़ेगी और वे अधिक ऊर्जा के साथ भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी दबिश जारी रखेंगे।

VOB का नजरिया: क्या बिहार से खत्म होगा ‘कमीशनराज’?

​जिस तरह बेतिया में सहायक अभियंता 5 लाख की घूस लेते पकड़े गए और निगरानी ब्यूरो की कार्रवाई में 28 गुना की वृद्धि हुई, यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी तो हैं, लेकिन अब उन पर कुल्हाड़ी भी तेज चल रही है। 200 केसों का स्पीडी ट्रायल एक स्वागत योग्य कदम है, क्योंकि सजा का डर ही सिस्टम में सुधार ला सकता है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ की टीम निगरानी विभाग की इस मुस्तैदी को सलाम करती है।

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