
मिडिल ईस्ट में चल रही जंग आज 23वें दिन पहुंच गई है। अमेरिका और इजरायल ने Mojtaba Khamenei सहित कई प्रमुख ईरानी नेताओं और अधिकारियों को निशाना बनाया, लेकिन इसके बावजूद ईरान मुकाबला जारी रखे हुए है। अमेरिका ने दावा किया है कि उसने ईरान के कई सैन्य ठिकानों को तबाह किया और इसे अपनी जीत मान रहा है।
हालांकि, अमेरिका को होर्मुज स्ट्रेट के मुद्दे पर यू-टर्न लेना पड़ा और उसने ईरानी तेल पर 40 साल से लगे प्रतिबंध हटा दिए। विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका की यह चाल वास्तव में ईरान को युद्ध में विजेता साबित कर रही है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करके अमेरिका को मजबूर कर दिया कि वह तेल प्रतिबंध हटाए।
ईरानी तेल और भारत-चीन व्यापार
2019 तक भारत ईरान से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता था। यह तेल न केवल सस्ता था, बल्कि भारत की रिफाइनरी के लिए भी उपयुक्त था। भारत और ईरान के बीच तेल लेन-देन रुपये में होता था, जिससे डॉलर पर निर्भरता कम होती थी और भारत का Forex Reserve मजबूत रहता था।
2018 में Donald Trump ने ईरान पर प्रतिबंध लगाए, जिससे भारत को ईरान से आयात बंद करना पड़ा। अमेरिका की इस नीति ने ईरान को धीरे-धीरे चीन के करीब धकेल दिया। अब ईरान का करीब 90% तेल चीन जा रहा है और व्यापार यूआन में हो रहा है।
विश्लेषक मानते हैं कि अमेरिका की तेल प्रतिबंध नीति हटाने की चाल अमेरिका के लिए रणनीतिक बुद्धिमानी लग सकती है, लेकिन वास्तविक लाभ ईरान और चीन को ही हुआ है। युद्ध ने न केवल मिडिल ईस्ट की रणनीति बदल दी है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा और व्यापार पर भी गहरा असर डाला है।


