सहरसा : बंधकों को छुड़ाने गई पुलिस पर हमला, महिलाओं ने दारोगा पर बरसाए थप्पड़; वीडियो वायरल

खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):

  • सनसनीखेज: सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर में पुलिस टीम पर ग्रामीणों का हमला।
  • बवाल: बंधक बनाए गए दो युवकों को रेस्क्यू करने पहुँची थी डायल 112 की टीम।
  • शर्मनाक: वायरल वीडियो में पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई और थप्पड़ बरसाती दिखीं महिलाएं।
  • एक्शन: मुख्य आरोपी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, अन्य उपद्रवियों की तलाश तेज।

सहरसा: बिहार के सहरसा जिले से कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक रूह कंपा देने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ वर्दी का खौफ इस कदर खत्म हो चुका है कि उपद्रवियों ने पुलिस टीम पर ही हमला बोल दिया। सिमरी बख्तियारपुर में बंधक बनाए गए दो युवकों को छुड़ाने पहुँची पुलिस टीम के साथ न केवल धक्का-मुक्की की गई, बल्कि महिलाओं ने दारोगा और जवानों पर ताबड़तोड़ थप्पड़ भी बरसाए। इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है।

वीडियो बनाने पर ‘तालिबानी’ सजा: युवकों को बनाया बंधक

​यह पूरा मामला 28 फरवरी की शाम का है, जो सिमरी बख्तियारपुर थाना क्षेत्र के हिंदुपुर वार्ड नंबर-8 में घटा। जानकारी के अनुसार, दो युवक अपने मोबाइल फोन से एक घर का वीडियो बना रहे थे। इसी बात से मोहल्ले के कुछ लोग भड़क गए। उन्होंने दोनों युवकों को पकड़ लिया, उनके साथ मारपीट की और उन्हें एक कमरे में बंधक बना लिया।

रेस्क्यू करने पहुँची पुलिस, भीड़ ने ‘वर्दी’ पर हाथ छोड़ा

​जब मामले की सूचना डायल 112 की पुलिस टीम को मिली, तो टीम तुरंत मौके पर पहुँची। पुलिस का उद्देश्य दोनों युवकों को सुरक्षित बाहर निकालना था, लेकिन जैसे ही पुलिस ने युवकों को छुड़ाने की कोशिश की, भीड़ उग्र हो गई।

  • वायरल वीडियो का सच: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि कैसे ग्रामीण पुलिसकर्मियों को घेर कर उनके साथ बदतमीजी कर रहे हैं।
  • थप्पड़कांड: वीडियो के एक हिस्से में कुछ महिलाएं पुलिस अधिकारी के साथ हाथापाई करती और उन पर हाथ उठाती नजर आ रही हैं। हैरानी की बात यह है कि भीड़ में मौजूद अन्य लोग पुलिस की मदद करने के बजाय तमाशबीन बने रहे और मोबाइल से वीडियो बनाते रहे।

पुलिस का ‘एक्शन’: मुख्य आरोपी सलाखों के पीछे

​तमाम विरोध और हमले के बावजूद, पुलिस टीम ने हिम्मत नहीं हारी और दोनों युवकों को उपद्रवियों के चंगुल से सुरक्षित मुक्त करा लिया।

  1. गिरफ्तारी: सरकारी कार्य में बाधा डालने और पुलिस पर हमला करने के आरोप में पुलिस ने मुख्य आरोपी को धर दबोचा है। उसे कागजी कार्यवाही के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
  2. छापेमारी: वीडियो फुटेज के आधार पर उन महिलाओं और पुरुषों की पहचान की जा रही है जिन्होंने कानून को हाथ में लिया था। पुलिस का कहना है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

VOB का नजरिया: क्या पुलिस सुरक्षित है?

​सहरसा की यह घटना बिहार पुलिस के इकबाल पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। जब पुलिस खुद को बचाने के लिए जद्दोजहद कर रही हो, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या होगा? ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ नागरिकों से अपील करता है कि किसी भी विवाद की स्थिति में कानून को हाथ में न लें। पुलिस पर हमला न केवल अपराध है, बल्कि यह अराजकता को बढ़ावा देता है।

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