
मोतिहारी: बिहार के पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिले में मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत निर्मित सड़क और पुलिया की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परसौनी से बोकाने होते हुए रामपुर मनोरथ तक बनाई गई करीब 1.8 किलोमीटर लंबी सड़क निर्माण के महज 60 दिनों के भीतर ही धंस गई है, जबकि सड़क पर बनी पुलिया पूरी तरह क्षतिग्रस्त होकर बिखर गई है।
सड़क और पुलिया के क्षतिग्रस्त होने के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती गई और घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि मजबूत सरिया और पर्याप्त सीमेंट की जगह निम्न गुणवत्ता की ईंट और बालू का उपयोग कर सिर्फ खानापूर्ति की गई, जिसके कारण सड़क और पुलिया इतनी जल्दी जवाब दे गई।
ग्रामीणों ने इसे सरकारी धन की खुली बर्बादी बताते हुए पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। लोगों का आरोप है कि योजना स्थल पर लगे सरकारी बोर्ड में सड़क की लंबाई और योजना का नाम तो अंकित है, लेकिन निर्माण लागत यानी प्राक्कलित राशि का कॉलम खाली छोड़ दिया गया है। इससे निर्माण कार्य की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
इस मामले में सड़क विभाग ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि संबंधित पुलिया पहले से मनरेगा योजना के तहत बनी हुई थी। विभाग द्वारा केवल उसके ऊपर सड़क निर्माण कराया गया था। अधिकारियों का दावा है कि ओवरलोड वाहनों के लगातार गुजरने के कारण पुलिया क्षतिग्रस्त हुई होगी। हालांकि ग्रामीण इस तर्क को खारिज करते हुए पूछ रहे हैं कि यदि पुलिया पहले से कमजोर थी तो उसकी क्षमता का आकलन किए बिना सड़क निर्माण की स्वीकृति कैसे दी गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों लोग और वाहन गुजरते हैं। सड़क और पुलिया की वर्तमान स्थिति को देखते हुए कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और ग्रामीण कार्य विभाग के मुख्य अभियंता से शिकायत कर दोषी ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना का उद्देश्य गांवों को बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराना है, लेकिन परसौनी-बोकाने मार्ग पर हुई कथित लापरवाही और भ्रष्टाचार ने इस महत्वाकांक्षी योजना की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मानसून से पहले सड़क और पुलिया की मरम्मत नहीं होने की स्थिति में पूरे इलाके का संपर्क प्रभावित हो सकता है। ऐसे में अब लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है कि जांच के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जाती है या फिर दोषियों के खिलाफ ठोस कदम उठाए जाते हैं।


