प्रधानमंत्री आवास योजना-2.0 को बिहार में मिली नई गति: 262 करोड़ रुपये से अधिक की मंजूरी, हजारों शहरी गरीब परिवारों को मिलेगा पक्के घर का लाभ

पटना। बिहार में शहरी गरीबों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री आवास (शहरी) योजना-2.0 के तहत राज्य सरकार ने लाभार्थी आधारित निर्माण (बीएलसी) परियोजनाओं को नई रफ्तार देने के लिए 262.37 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की है। इस फैसले से हजारों पात्र परिवारों को अपने सपनों का पक्का घर बनाने में मदद मिलेगी और राज्य में “सबके लिए आवास” के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।

नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री आवास (शहरी) योजना-2.0 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उनका कहना है कि सरकार का उद्देश्य केवल मकान बनाना नहीं, बल्कि लोगों को सुरक्षित, सम्मानजनक और बेहतर जीवन उपलब्ध कराना है। इसी सोच के साथ योजना के तहत स्वीकृत परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

200 परियोजनाओं को मिला वित्तीय संबल

नगर विकास एवं आवास विभाग के अनुसार प्रधानमंत्री आवास (शहरी) योजना-2.0 के तहत राज्य की 200 लाभार्थी आधारित निर्माण परियोजनाओं के लिए द्वितीय किस्त के रूप में 262.37 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी गई है। यह राशि एसएनए स्पर्श (SNA SPARSH) प्रणाली के माध्यम से जारी की जाएगी।

इस स्वीकृति का सीधा लाभ उन परिवारों को मिलेगा जो लंबे समय से आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण अपना घर नहीं बना पा रहे थे। विभाग का मानना है कि वित्तीय सहायता मिलने से आवास निर्माण कार्य में तेजी आएगी और निर्धारित समय के भीतर अधिक से अधिक लाभार्थियों को योजना का लाभ मिल सकेगा।

‘सबके लिए आवास’ लक्ष्य की ओर बढ़ता बिहार

नीतीश मिश्रा ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार का साझा लक्ष्य है कि कोई भी पात्र परिवार आवास से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले आर्थिक रूप से कमजोर और आवासविहीन परिवारों को सुरक्षित और स्थायी आवास उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना केवल एक निर्माण परियोजना नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सुरक्षा और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने का अभियान है। पक्का घर मिलने से परिवारों को सुरक्षा की भावना मिलती है, बच्चों की शिक्षा का माहौल बेहतर होता है और महिलाओं को भी अधिक सम्मानजनक जीवन मिलता है।

1 सितंबर 2024 से शुरू हुई योजना

प्रधानमंत्री आवास (शहरी) योजना-2.0 का शुभारंभ भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा 1 सितंबर 2024 को किया गया था। इस योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में रहने वाले उन परिवारों को सहायता प्रदान करना है जो अभी तक स्थायी आवास से वंचित हैं।

योजना विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, निम्न आय वर्ग के परिवारों और ऐसे लोगों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है जिनके पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक पात्र परिवार को ऐसा आवास उपलब्ध कराया जाए जो सुरक्षित, टिकाऊ और आधुनिक सुविधाओं से युक्त हो।

बीएलसी घटक के तहत मिलेगा लाभ

प्रधानमंत्री आवास (शहरी) योजना-2.0 के तहत लाभार्थी आधारित निर्माण (बीएलसी) घटक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसके अंतर्गत ऐसे पात्र परिवारों को सहायता प्रदान की जाती है जिनके पास अपनी भूमि उपलब्ध है लेकिन आर्थिक अभाव के कारण वे पक्का घर नहीं बना सकते।

इस योजना के माध्यम से लाभार्थियों को घर निर्माण के लिए वित्तीय सहयोग दिया जाता है ताकि वे अपनी जमीन पर गुणवत्तापूर्ण आवास तैयार कर सकें। इससे परिवारों को किराए के मकानों या अस्थायी आवासों पर निर्भर रहने की आवश्यकता कम हो जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बीएलसी मॉडल गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए सबसे प्रभावी विकल्पों में से एक है क्योंकि इसमें लाभार्थी स्वयं अपने घर के निर्माण की प्रक्रिया में भागीदार बनता है।

राष्ट्रीय भवन संहिता के अनुसार होंगे मकान

मंत्री ने बताया कि योजना के तहत बनने वाले सभी आवास राष्ट्रीय भवन संहिता (नेशनल बिल्डिंग कोड-एनबीसी) में निर्धारित मानकों के अनुरूप होंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लाभार्थियों को सुरक्षित, मजबूत और लंबे समय तक उपयोग योग्य आवास उपलब्ध हो।

उन्होंने कहा कि भवन निर्माण में सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा ताकि प्राकृतिक आपदाओं और अन्य जोखिमों के दौरान भी आवास सुरक्षित रह सकें। आधुनिक डिजाइन और गुणवत्तापूर्ण निर्माण सामग्री के उपयोग पर भी जोर दिया जाएगा।

30 से 45 वर्ग मीटर तक का होगा कारपेट एरिया

योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार लाभार्थियों को न्यूनतम 30 वर्ग मीटर और अधिकतम 45 वर्ग मीटर कारपेट एरिया तक के पक्के आवास निर्माण की अनुमति दी जा सकती है। इन मकानों को सभी मौसमों के अनुकूल तैयार किया जाएगा ताकि परिवारों को वर्षभर बेहतर आवासीय सुविधा मिल सके।

सरकार का मानना है कि यह आकार छोटे और मध्यम परिवारों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। इसके साथ ही मकानों की डिजाइन ऐसी होगी जिससे उपलब्ध स्थान का बेहतर उपयोग किया जा सके।

हर घर में होंगे आवश्यक सुविधाओं वाले कमरे

प्रधानमंत्री आवास योजना-2.0 के तहत निर्मित प्रत्येक आवास में न्यूनतम दो कमरे उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा रसोईघर, शौचालय और स्नानघर जैसी मूलभूत सुविधाएं भी सुनिश्चित की जाएंगी।

यह प्रावधान केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना भी है। स्वच्छ शौचालय और स्नानघर की उपलब्धता से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में कमी आएगी, जबकि अलग रसोईघर से परिवारों को बेहतर जीवन सुविधा प्राप्त होगी।

विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे आवास सामाजिक सुरक्षा, स्वच्छता और सम्मानजनक जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।

पारदर्शिता और गुणवत्ता पर रहेगा विशेष ध्यान

नीतीश मिश्रा ने कहा कि योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए विभाग द्वारा विस्तृत दिशानिर्देश तैयार किए जा रहे हैं। इन गाइडलाइनों का उद्देश्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि योजना का प्रत्येक लाभार्थी बिना किसी परेशानी के समय पर सहायता प्राप्त कर सके। इसके लिए निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत बनाया जा रहा है।

साथ ही निर्माण कार्यों की नियमित समीक्षा की जाएगी ताकि किसी प्रकार की अनियमितता या देरी की स्थिति उत्पन्न न हो। विभागीय स्तर पर जवाबदेही तय करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं।

हजारों परिवारों के जीवन में आएगा बदलाव

प्रधानमंत्री आवास (शहरी) योजना-2.0 बिहार के हजारों परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखती है। जिन लोगों के लिए पक्का घर कभी सपना हुआ करता था, उनके लिए अब यह सपना हकीकत में बदलता दिखाई दे रहा है।

सरकार का मानना है कि आवास केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास का आधार भी है। सुरक्षित घर मिलने से परिवारों में आत्मविश्वास बढ़ता है, बच्चों को बेहतर माहौल मिलता है और समाज में सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्राप्त होता है।

262 करोड़ रुपये से अधिक की नई स्वीकृति यह संकेत देती है कि बिहार सरकार “पक्का घर, बेहतर जीवन” के संकल्प को जमीन पर उतारने के लिए तेजी से आगे बढ़ रही है। आने वाले समय में इस योजना के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में रहने वाले हजारों जरूरतमंद परिवारों को स्थायी और सुरक्षित आवास उपलब्ध होने की उम्मीद है।

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