खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):
- ऐतिहासिक बदलाव: नीतीश कुमार का राज्यसभा के लिए नामांकन; बिहार में 21 साल लंबे सीएम पद के सफर का ‘क्लाइमेक्स’।
- पावर शिफ्ट: दिल्ली में नीतीश, तो पटना में क्या इस बार भाजपा का होगा मुख्यमंत्री?
- रेसमैन: नित्यानंद राय से लेकर सम्राट चौधरी तक, सीएम की कुर्सी के लिए 5 दावेदार।
- सस्पेंस: अमित शाह का वह ‘पुराना वादा’—कौन बनेगा अब बिहार का ‘बड़ा आदमी’?
पटना: बिहार की सियासत में आज एक युग का अंत होता दिख रहा है। ‘सुशासन बाबू’ के नाम से मशहूर नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए पर्चा भर दिया है, जिसका सीधा मतलब है कि बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी अब खाली होने वाली है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि इस बार सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल जाएगा। सूत्रों की मानें तो ‘BJP का मुख्यमंत्री और JDU का उपमुख्यमंत्री’—यही वह नया फार्मूला है जिस पर एनडीए की नई सरकार की नींव टिकी है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि वो चेहरा कौन होगा?
सीएम पद की रेस: ‘समीकरण’ बनाम ‘सरप्राइज’
भाजपा के भीतर जिन नामों पर सबसे ज्यादा मंथन चल रहा है, वे बिहार की राजनीति के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं:
|
संभावित नाम |
वर्तमान पद / कद |
क्यों हैं रेस में आगे? |
|---|---|---|
|
नित्यानंद राय |
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री |
अमित शाह के भरोसेमंद, यादव वोट बैंक में पैठ। |
|
सम्र्राट चौधरी |
उपमुख्यमंत्री, बिहार |
पार्टी का फायरब्रांड चेहरा, कुशवाहा समाज का बड़ा नेतृत्व। |
|
विजय कुमार सिन्हा |
उपमुख्यमंत्री, बिहार |
सवर्ण वोट बैंक और संगठन पर मजबूत पकड़। |
|
दिलीप जायसवाल |
मंत्री, बिहार सरकार |
वैश्य समाज का प्रतिनिधित्व और क्लीन इमेज। |
|
संजय चौरसिया |
वरिष्ठ भाजपा विधायक |
संघ के करीबी और संगठन के पुराने सिपाही। |
अमित शाह की ‘पोटली’ से निकलेगा ‘बड़ा आदमी’?
बिहार की जनता को आज गृहमंत्री अमित शाह का वह वादा याद आ रहा है, जो उन्होंने चुनावी रैलियों के दौरान किया था। शाह ने मंच से घोषणा की थी कि वे कुछ चुनिंदा चेहरों को ‘बड़ा आदमी’ बनाएंगे। अब जब नीतीश कुमार दिल्ली की ओर कूच कर रहे हैं, तो क्या इन दो नेताओं की किस्मत चमकने वाली है?
- सम्राट चौधरी: तारापुर (मुंगेर) की रैली में शाह ने उन्हें ‘बड़ा आदमी’ बनाने का भरोसा दिया था। वर्तमान में डिप्टी सीएम के रूप में वे पहले ही अपनी ताकत दिखा चुके हैं। क्या अब उन्हें सीधे ‘हॉट सीट’ पर बिठाया जाएगा?
- सुनील कुमार पिंटू: सीतामढ़ी के सांसद और विधायक रहे पिंटू को शाह ने अपना ‘दोस्त’ बताया था। उनके नाम की चर्चा भी किसी बड़े सरप्राइज के तौर पर की जा रही है।
भाजपा का ‘सरप्राइज एलिमेंट’
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा अक्सर उन नामों को आगे लाती है जो चर्चा में नहीं होते (जैसे मध्य प्रदेश में मोहन यादव या राजस्थान में भजनलाल शर्मा)। ऐसे में संजय चौरसिया या दिलीप जायसवाल जैसे नामों को भी नकारा नहीं जा सकता।
VOB का नजरिया: नीतीश के बाद ‘कंट्रोल’ किसके हाथ?
नीतीश कुमार के जाने के बाद बिहार की राजनीति का केंद्र ‘पटना’ से हटकर ‘दिल्ली’ (पीएमओ और गृह मंत्रालय) की ओर शिफ्ट हो जाएगा। अगर भाजपा का मुख्यमंत्री बनता है, तो यह 2005 के बाद बिहार में पहली बार होगा जब बीजेपी फ्रंट सीट पर होगी। जेडीयू के लिए चुनौती अपने वजूद को बचाने की होगी, वहीं भाजपा के लिए चुनौती एक ऐसे नेता को चुनने की है जो नीतीश कुमार की तरह सभी वर्गों (अति पिछड़ा और महिला वोट बैंक) को साथ लेकर चल सके।


