
भागलपुर | बिहार के भागलपुर जिले के नवगछिया क्षेत्र से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जो सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। महज 27 दिन पहले 6 करोड़ रुपये की लागत से दुरुस्त किया गया तटबंध का हिस्सा, अब गंगा के पानी के साथ भ्रष्टाचार की परतें भी उजागर कर रहा है।
तटबंध का स्पर संख्या-9 का एक बड़ा हिस्सा अचानक ध्वस्त हो गया है। बताया जा रहा है कि लगभग 70 मीटर लंबा बोल्डर क्रेटिंग कार्य पूरी तरह से बह गया, जो कटाव को रोकने के लिए किया गया था।
घटते जलस्तर में ही ध्वस्त हुआ निर्माण
हैरत की बात यह है कि अभी गंगा का जलस्तर घट रहा है, इसके बावजूद कटाव तेजी से हुआ और बोल्डर सहित पूरी संरचना ध्वस्त हो गई। बोल्डर क्रेटिंग, जिसे सबसे भरोसेमंद कटावरोधी उपाय माना जाता है, इतनी जल्दी टूट जाना दर्शाता है कि निर्माण कार्य में भारी लापरवाही या भ्रष्टाचार हुआ है।
अफसरों की टीम मौके पर पहुंची
घटना की गंभीरता को देखते हुए जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, और अन्य तकनीकी अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं। आपात स्थिति में बालू भरी बोरियां, हाथी पांव और बांस डालकर धारा मोड़ने का प्रयास किया जा रहा है ताकि शेष तटबंध को बचाया जा सके।
क्या है स्पर संख्या-9?
स्पर वह संरचना होती है जो तटबंध को बचाने के लिए नदी की धारा को मोड़ने का कार्य करती है। स्पर संख्या-9 को हाल ही में 6 करोड़ रुपये की लागत से मजबूत किया गया था, लेकिन यह संरचना महज एक महीने में ही धराशायी हो गई, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश है और भ्रष्टाचार की बू तेज हो गई है।
स्थानीय लोगों का सवाल: जिम्मेदार कौन?
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने इस पूरे प्रकरण पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि सरकारी धन की इस तरह की बर्बादी असहनीय है। कई ग्रामीणों ने कहा कि जिस निर्माण में करोड़ों खर्च हुए, वह 27 दिन भी नहीं टिक पाया — यह दर्शाता है कि नींव से लेकर निर्माण तक सबमें घोटाला हुआ है।
जांच की मांग तेज
अब पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठने लगी है। लोगों का कहना है कि जब जिम्मेदार अधिकारी और ठेकेदारों की मिलीभगत से निर्माण में भारी लापरवाही होती है, तो उसका खामियाजा गांव, खेत और जनता को भुगतना पड़ता है।
नवगछिया का यह मामला बिहार में जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली, गुणवत्ता मानकों और जवाबदेही पर गहरी चोट करता है। 6 करोड़ रुपये के निर्माण का 27 दिन में बह जाना सिर्फ एक तटबंध का टूटना नहीं, बल्कि यह जनता के विश्वास और टैक्स के पैसे का खुलेआम मज़ाक है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार इस मामले में सख्त जांच और दोषियों पर कार्रवाई करेगी या यह मामला भी धीरे-धीरे बाढ़ के पानी में बह जाएगा?


