
पटना, 09 जुलाई 2025 | बिहार की राजनीति में बुधवार को राजनीतिक ‘रेड कार्पेट’ से ज्यादा ‘रेड कार्ड’ का जलवा दिखा। मौका था इंडिया गठबंधन के बिहार बंद का और मंच सजा था पटना के आयकर गोलंबर पर। राहुल गांधी मौजूद थे, लेकिन नज़ारे पर सबकी निगाहें ठहर गईं – जब कन्हैया कुमार और पप्पू यादव को मंच से “लौटा” दिया गया।
सियासी मंच, लेकिन मेहमान तय!
मंच क्या था, पूरी सियासत का झरोखा। तेजस्वी यादव सेंटर स्टेज पर थे, राहुल गांधी पास खड़े थे, और महागठबंधन के तमाम सीनियर नेता अगल-बगल में। लेकिन जब कन्हैया कुमार (जो खुद को कांग्रेस की आवाज़ बताते हैं) और पप्पू यादव (जनता का दिल जीतने वाले नेता) मंच पर चढ़ने चले – तो सुरक्षा ने सीधा इनकार कर दिया।
“सूची में नाम नहीं है” – यही कहा गया!
पप्पू यादव ने दो बार मंच पर चढ़ने की कोशिश की, लेकिन हर बार इशारे में रोक दिया गया। दूसरी बार तो हल्का धक्का भी पड़ा, और भारी-भरकम कद वाले पप्पू किसी तरह खुद को संभाल सके। कन्हैया कुमार ने चढ़ने की कोशिश की, पर चुपचाप किनारे हो लिए।
मंच पर कौन-कौन था?
मंच पर जगह मिली – राहुल गांधी, तेजस्वी यादव, मंगनीलाल मंडल, संजय यादव, डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह, शकील अहमद, डी राजा, दीपंकर भट्टाचार्य, एम.ए. बेबी और मुकेश सहनी जैसे नेताओं को।
लेकिन कांग्रेस के जुझारू चेहरों को सिर्फ दर्शक बना दिया गया।
तेजस्वी की चाल या कांग्रेस की कमजोरी?
राजनीतिक गलियारों में इस “रोक” को तेजस्वी यादव का सधा हुआ बदला कहा जा रहा है। कभी तेजस्वी पर सवाल उठाने वाले पप्पू और जेएनयू ब्रांड के कन्हैया को मंच से दूर रखना शायद वही पुराना हिसाब बराबर करने का तरीका था।
सोशल मीडिया में मीम्स और बहस
एक ओर वीडियो वायरल हैं – जिसमें कन्हैया को ट्रक से नीचे किया जाता दिख रहा है, दूसरी तरफ पप्पू यादव मंच की ओर बढ़ते हैं, और रोक दिए जाते हैं।
एक यूज़र ने लिखा –
“बिहार में राजनीति ना कीजिए साहब… यहां मंच तक पहुंचने से पहले पुरानी यादें रोका करती हैं।”
अब क्या संकेत हैं?
इस घटना ने साफ कर दिया कि महागठबंधन की गाड़ी भले साथ चले, ड्राइवर की सीट पर अब RJD बैठना चाहती है – और कांग्रेस को सिर्फ मुसाफ़िर बनाकर रखना चाहती है।


