‘बिहारी को मिलती गोली और गाली…’ श्रमिक दिवस पर तेजस्वी यादव का केंद्र और NDA पर तीखा हमला

पटना, 1 मई 2026। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कार्यकारी अध्यक्ष ने केंद्र सरकार और एनडीए पर तीखा हमला बोलते हुए श्रमिकों की स्थिति को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश के निर्माण में श्रमिकों का योगदान अतुलनीय है, लेकिन उनके अधिकारों, सम्मान और जीवन स्तर पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

तेजस्वी यादव ने अपने बयान में कहा कि मजदूर वर्ग अपने पसीने और मेहनत से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाता है, लेकिन उनकी समस्याओं पर गंभीर विमर्श का अभाव चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि जब तक मजदूरों, उनके परिवारों और उनके गांवों का समुचित विकास नहीं होगा, तब तक “विकसित भारत” का सपना अधूरा ही रहेगा।

उन्होंने एनडीए सरकार की नीतियों को निशाने पर लेते हुए आरोप लगाया कि इन नीतियों का सबसे अधिक प्रभाव गरीब और मजदूर वर्ग पर पड़ा है। उनके अनुसार, पिछले दो दशकों में बिहार से बड़े पैमाने पर श्रमिकों का पलायन हुआ है, जो राज्य की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि रोजगार के अभाव में लाखों बिहारी मजदूर हर साल दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर होते हैं।

तेजस्वी यादव ने एक विवादित बयान देते हुए कहा कि दूसरे राज्यों में “बिहारी को कभी गोली तो कभी गाली मिलती है।” उन्होंने इसे गंभीर सामाजिक समस्या बताते हुए कहा कि यह स्थिति बिहार के विकास मॉडल पर सवाल खड़ा करती है। उन्होंने इसके लिए लंबे समय से सत्ता में रही एनडीए सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

उन्होंने नोटबंदी और लॉकडाउन का जिक्र करते हुए कहा कि इन फैसलों का सबसे ज्यादा असर प्रवासी मजदूरों पर पड़ा था। कोविड-19 महामारी के दौरान देशभर में लाखों मजदूरों के पैदल घर लौटने की तस्वीरों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वह दौर देश के लिए बेहद दर्दनाक था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उस समय मजदूरों के हितों की पर्याप्त चिंता नहीं की।

तेजस्वी यादव ने मौजूदा परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि गैस सिलेंडर की कीमतों और आर्थिक दबाव के कारण भी मजदूरों की स्थिति प्रभावित हो रही है। उन्होंने दावा किया कि कई मजदूर अब वापस बिहार लौट रहे हैं, लेकिन राज्य में उनके लिए रोजगार की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि लौट रहे मजदूरों के लिए रोजगार के अवसर सृजित किए जाएं।

इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री पर भी तंज कसते हुए कहा कि नाम बदलने की राजनीति करने वाले नेताओं को “श्रमिक दिवस” का नाम बदलकर “बिहार समर्पित दिवस” कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार देश को सबसे ज्यादा श्रमिक देता है, लेकिन औद्योगिक विकास के मामले में पीछे है, जो एक बड़ी विडंबना है।

तेजस्वी यादव ने कहा कि यदि बिहार के मजदूर बाहर काम करने नहीं जाएंगे, तो देश के कई राज्यों की औद्योगिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बिहार को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान देना होगा, ताकि लोगों को अपने राज्य में ही काम मिल सके।

उन्होंने श्रमिक दिवस के अवसर पर सभी राजनीतिक दलों और समाज के लोगों से अपील की कि वे मजदूरों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट हों। उन्होंने कहा कि पलायन रोकना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के सभी वर्गों की साझा जिम्मेदारी है।

अपने संबोधन के अंत में तेजस्वी यादव ने श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार लाने, उनके अधिकारों की रक्षा करने और उन्हें सम्मानजनक जीवन देने के लिए ठोस नीतियां बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब मजदूर मजबूत होंगे, तभी देश मजबूत होगा।

श्रमिक दिवस के मौके पर दिया गया यह बयान राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें राज्य और केंद्र सरकार की नीतियों पर सीधे सवाल उठाए गए हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।

  • ये भी पढ़े..

    बिहार के दो स्टार क्रिकेटरों को मिलेगा DSP पद! मुकेश कुमार और आकाश दीप की सीधी नियुक्ति की सिफारिश

    Share Add as a preferred…

    लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर RJD के पूर्व विधायक मुकेश रौशन को धमकी! SSP से लगाई सुरक्षा की गुहार

    Share Add as a preferred…