
महाराष्ट्र के नासिक में सामने आए कथित धर्मांतरण रैकेट की जांच अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है। इस मामले में का नाम सामने आने के बाद पुलिस और जांच एजेंसियों की सक्रियता और बढ़ गई है। आरोप है कि वह एक प्रमुख आईटी कंपनी Tata Consultancy Services की नासिक शाखा में एचआर हेड के पद पर रहते हुए इस नेटवर्क की अहम कड़ी के रूप में काम कर रही थी। फिलहाल वह फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में निदा खान को ‘लेडी कैप्टन’ की भूमिका में देखा जा रहा है। पुलिस का मानना है कि वह कथित नेटवर्क के महिला पक्ष को संभालती थी और नई महिलाओं को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी। बताया जा रहा है कि उसके माध्यम से एक संगठित ढांचे के तहत लोगों तक पहुंच बनाई जाती थी, जिससे जांच एजेंसियों को यह मामला और गंभीर प्रतीत हो रहा है।
पुलिस के अनुसार, इस केस में आरोपी नंबर-8 के रूप में उसका नाम सामने आया है और तभी से उसकी तलाश तेज कर दी गई है। हालांकि अब तक वह गिरफ्त से बाहर है। उसके संभावित ठिकानों पर कई बार दबिश दी जा चुकी है, लेकिन हर बार वह पुलिस को चकमा देने में सफल रही है। इससे यह भी संकेत मिल रहा है कि उसे पहले से ही कार्रवाई की भनक लग रही थी या फिर उसे किसी तरह का सहयोग मिल रहा हो सकता है।
जांच में यह भी सामने आया है कि निदा खान का काम सीधे तौर पर महिलाओं से संपर्क स्थापित करना और उन्हें भरोसे में लेना था। आरोप है कि वह दोस्ती और सहानुभूति के जरिए पहले संबंध बनाती थी और फिर धीरे-धीरे उन्हें कुछ धार्मिक प्रक्रियाओं से परिचित कराती थी। यह प्रक्रिया इतनी क्रमिक और योजनाबद्ध बताई जा रही है कि शुरुआत में किसी को किसी तरह के दबाव या साजिश का अंदेशा नहीं होता था।
सूत्रों का यह भी दावा है कि निदा खान केवल एक सदस्य नहीं थी, बल्कि वह एक संगठित ‘महिला विंग’ तैयार करने में जुटी हुई थी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस नेटवर्क के जरिए महिलाओं को मानसिक रूप से प्रभावित कर किसी विशेष विचारधारा की ओर मोड़ा जा रहा था। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो पाएगी।
पुलिस ने उसके मुंबई के पास भिवंडी क्षेत्र से जुड़े होने की जानकारी भी जुटाई है। इसी आधार पर वहां और आसपास के इलाकों में कई बार छापेमारी की गई, लेकिन उसका कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया। बताया जा रहा है कि उसने जनवरी 2026 में ही कंपनी छोड़ दी थी और उसके बाद से वह लगातार गायब है।
उसका मोबाइल फोन भी लगातार बंद या नेटवर्क से बाहर बताया जा रहा है, जिससे यह आशंका और मजबूत हो रही है कि वह अंडरग्राउंड हो चुकी है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमों का गठन किया है, जो अलग-अलग शहरों में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। इसके अलावा तकनीकी माध्यमों से भी उसकी लोकेशन ट्रैक करने की कोशिश की जा रही है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि निदा खान की गिरफ्तारी इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है। उससे पूछताछ के बाद इस कथित नेटवर्क के काम करने के तरीके, उससे जुड़े अन्य लोगों और इसके विस्तार को लेकर कई अहम खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल पुलिस इस मामले को बेहद संवेदनशील मानते हुए हर पहलू से जांच कर रही है।
इस मामले ने कॉर्पोरेट जगत में भी हलचल मचा दी है। एक बड़ी आईटी कंपनी का नाम सामने आने के कारण इस घटना ने और ज्यादा ध्यान आकर्षित किया है। हालांकि, कंपनी की ओर से अब तक इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में तथ्यों की पुष्टि बेहद जरूरी होती है, क्योंकि इससे समाज में गलत संदेश भी जा सकता है। इसलिए जांच एजेंसियों को पूरी पारदर्शिता और सावधानी के साथ इस मामले को आगे बढ़ाना होगा, ताकि सच्चाई सामने आ सके और किसी भी निर्दोष व्यक्ति को नुकसान न हो।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पुलिस की प्राथमिकता फरार आरोपी को जल्द से जल्द पकड़ना और नेटवर्क की वास्तविकता को उजागर करना है। फिलहाल यह मामला कई सवालों के घेरे में है और इसकी हर नई जानकारी पर लोगों की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और तेज होने की संभावना है, जिससे इस मामले के और भी पहलू सामने आ सकते हैं।


