
कोलकाता/बक्सर। पश्चिम बंगाल की राजनीति को झकझोर कर रख देने वाले चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में सोमवार, 11 मई 2026 को एक ऐसा मोड़ आया जिसने इस पूरी जांच को डिजिटल साक्ष्यों की ओर मोड़ दिया है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट) की हत्या की योजना बनाने और उसे अंजाम देने वाले गिरोह के तीन प्रमुख सदस्यों को बंगाल एसटीएफ ने उत्तर प्रदेश और बिहार के अलग-अलग इलाकों से गिरफ्तार कर लिया है। इस हाई-प्रोफाइल केस में सबसे चौंकाने वाला खुलासा अपराधियों के पकड़े जाने के तरीके को लेकर हुआ है। जिस ‘शार्प शूटर’ को पकड़ने के लिए पुलिस कई राज्यों में खाक छान रही थी, उसकी एक छोटी सी गलती और आधुनिक डिजिटल भुगतान पद्धति (UPI) ने उसे सलाखों के पीछे पहुँचा दिया। टोल प्लाजा पर किए गए एक ऑनलाइन ट्रांजैक्शन ने पुलिस को हत्यारों की सटीक लोकेशन बता दी, जिसके बाद बक्सर और अयोध्या में छापेमारी कर तीन लोगों को हिरासत में लिया गया। इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि अपराध कितना भी ‘फिल्मी’ क्यों न हो, तकनीक की नजर से बचना अब नामुमकिन है।
एक ‘यूपीआई’ ट्रांजैक्शन और बिखर गया सुरक्षा का घेरा
चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद से ही बंगाल पुलिस की विशेष टीमें अपराधियों के भागने के रूट को ट्रैक कर रही थीं। शूटरों ने भागने के लिए बहुत ही शातिराना रास्ता चुना था और वे मोबाइल फोन के इस्तेमाल से बच रहे थे। लेकिन कानून के हाथ तब उनकी गर्दन तक पहुँचे जब आरोपियों में से एक ने भागने के दौरान एक टोल प्लाजा पर नकदी की जगह UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के जरिए भुगतान किया।
जैसे ही ऑनलाइन पेमेंट हुआ, बैंक सर्वर और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम ने पुलिस को अलर्ट कर दिया। इस डिजिटल फुटप्रिंट ने न केवल अपराधियों के वाहन की पहचान की, बल्कि उनकी दिशा और समय का भी सटीक ब्यौरा दे दिया। इसी सुराग के आधार पर बंगाल एसटीएफ ने अपनी दो टीमें उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए रवाना कीं। पुलिस ने पाया कि शूटर कोलकाता से निकलकर झारखंड होते हुए बिहार और फिर यूपी की ओर बढ़ रहे थे। इस एक तकनीकी चूक ने उस अभेद्य घेरे को तोड़ दिया जो अपराधियों ने खुद को बचाने के लिए बनाया था।
बक्सर में आधी रात को दबिश: विक्की और मयंक हिरासत में
बिहार के बक्सर जिले में रविवार की देर रात बंगाल पुलिस की टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से कई संभावित ठिकानों पर छापेमारी की। सूत्रों के अनुसार, पुलिस की प्राथमिक कार्रवाई बक्सर के विभिन्न थाना क्षेत्रों में केंद्रित रही। यहाँ से पुलिस ने दो संदिग्धों, विक्की मौर्या और मयंक मिश्रा को हिरासत में लिया है। इन दोनों के बारे में जानकारी मिली है कि ये वारदात के समय शूटरों के संपर्क में थे और उन्हें भागने में मदद कर रहे थे।
पिछली रिपोर्टों में जिस विशाल श्रीवास्तव के पकड़े जाने की बात कही गई थी, उसके बारे में बड़ा अपडेट यह है कि पुलिस ने उससे गहन पूछताछ की और फिर उसे छोड़ दिया। विशाल श्रीवास्तव का आपराधिक इतिहास जरूर रहा है, लेकिन चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में उसकी सीधी संलिप्तता के ठोस प्रमाण न मिलने के कारण उसे मुक्त कर दिया गया। फिलहाल, विक्की मौर्या और मयंक मिश्रा को बंगाल पुलिस अपने साथ कोलकाता ले गई है, जहाँ इस बात की जांच की जा रही है कि हत्या की साजिश में उनकी भूमिका क्या थी और क्या उन्होंने हथियारों का इंतजाम करने में कोई मदद की थी।
अयोध्या से बलिया का ‘शार्प शूटर’ राज सिंह गिरफ्तार
इस केस का सबसे बड़ा ‘कैच’ उत्तर प्रदेश के अयोध्या से हुआ। बंगाल एसटीएफ और अयोध्या पुलिस के एक संयुक्त ऑपरेशन में राज सिंह नाम के शार्प शूटर को गिरफ्तार किया गया है। राज सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का रहने वाला है, लेकिन वह लंबे समय से बक्सर को अपना ठिकाना बनाए हुए था।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि राज सिंह उन मुख्य हमलावरों में शामिल था जिन्होंने 6 मई की रात चंद्रनाथ रथ की गाड़ी पर गोलियां चलाई थीं। राज सिंह एक पेशेवर शूटर है और उसे इस काम के लिए विशेष रूप से ‘हायर’ किया गया था। अयोध्या में वह अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था, लेकिन डिजिटल सर्विलांस ने उसकी लोकेशन को बेनकाब कर दिया। गिरफ्तारी के बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता ले जाया गया है। पुलिस का मानना है कि राज सिंह ही वह व्यक्ति है जो इस हत्याकांड के अन्य फरार साथियों और मास्टरमाइंड के बारे में सबसे सटीक जानकारी दे सकता है।
6 मई की रात: फिल्मी स्टाइल में खूनी खेल
चंद्रनाथ रथ की हत्या की पटकथा किसी सस्पेंस फिल्म जैसी खौफनाक थी। 6 मई की रात जब वे अपनी एसयूवी (SUV) गाड़ी से घर लौट रहे थे, तब वे अपने घर से मात्र 200 मीटर की दूरी पर थे। उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम के डोलतला इलाके में दोहरिया मोड़ के पास अचानक एक सिल्वर रंग की Nissan Micra कार ने उनकी एसयूवी का रास्ता रोक दिया।
जैसे ही चंद्रनाथ रथ की गाड़ी रुकी, पहले से पीछा कर रहे दो मोटरसाइकिलों पर सवार हमलावर खिड़की के पास पहुँचे। हमलावरों को सटीक जानकारी थी कि गाड़ी में चंद्रनाथ कहाँ बैठे हैं। उन्होंने गाड़ी के शीशे के पार से बेहद करीब से कई राउंड फायरिंग की। एक गोली सीधे चंद्रनाथ रथ के सीने में लगी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस हमले में उनके ड्राइवर को भी गोली लगी, जो गंभीर रूप से घायल है। वारदात को अंजाम देकर हमलावर अपनी बाइक और कार के साथ अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए।
चोरी की गाड़ियाँ और 8 लोगों का सिंडिकेट
पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि इस हत्याकांड में कम से कम आठ लोग शामिल थे। अपराधियों ने पहचान छिपाने के लिए जिन दो मोटरसाइकिलों और निसान माइक्रा कार का इस्तेमाल किया था, वे सभी चोरी की थीं। यह इस बात का प्रमाण है कि हत्या की तैयारी बहुत पहले से की जा रही थी।
पुलिस को अंदेशा है कि इस हाई-प्रोफाइल मर्डर में कुछ स्थानीय लोगों ने भी शूटरों की मदद की थी। शूटरों को यह पता होना कि चंद्रनाथ उस समय गाड़ी में किस सीट पर बैठे होंगे, यह दर्शाता है कि किसी करीबी या इलाके के जानकार ने ‘इनसाइडर इंफॉर्मेशन’ साझा की थी। बंगाल पुलिस अब उन स्थानीय संपर्कों को खंगाल रही है जिन्होंने बाहरी राज्यों से आए इन शूटरों को रुकने की जगह और वारदात से जुड़ी जानकारियां दी थीं।
राजनैतिक उबाल: 4 मई के नतीजों से जुड़ा कनेक्शन?
इस हत्याकांड ने पश्चिम बंगाल के सियासी माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है। गौरतलब है कि यह घटना 4 मई को चुनाव नतीजे आने के ठीक दो दिन बाद हुई। शुभेंदु अधिकारी के इतने करीबी सहयोगी की हत्या होने के बाद भाजपा ने सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर आरोप लगाया है। भाजपा का दावा है कि यह एक ‘पॉलिटिकल मर्डर’ है जिसका उद्देश्य विपक्षी खेमे में दहशत फैलाना है।
हालांकि, पुलिस ने अभी तक किसी राजनैतिक दल का नाम नहीं लिया है, लेकिन जांच के दायरे में राजनैतिक रंजिश का एंगल सबसे ऊपर है। बंगाल पुलिस की दो अलग-अलग टीमें उत्तर प्रदेश और बिहार में डेरा डाले हुए हैं क्योंकि उन्हें शक है कि इस हत्या के पीछे एक अंतरराज्यीय सिंडिकेट काम कर रहा है। आने वाले दिनों में जब गिरफ्तार आरोपियों को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की जाएगी, तब इस अपराध के पीछे के असली मकसद का खुलासा होने की उम्मीद है।
आगे की कार्रवाई: बंगाल पुलिस के आधिकारिक बयान का इंतजार
फिलहाल, राज सिंह, विक्की मौर्या और मयंक मिश्रा बंगाल पुलिस की हिरासत में हैं। बक्सर और अयोध्या की इस सफल कार्रवाई के बाद अब कोलकाता में इन आरोपियों की ‘क्रॉस-क्वेश्चनिंग’ की जाएगी। बंगाल पुलिस जल्द ही एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकती है जिसमें हत्या की सुपारी देने वाले मास्टरमाइंड और हत्या के पीछे के वास्तविक कारणों का खुलासा किया जाएगा।
बक्सर पुलिस ने भी स्पष्ट किया है कि वे बंगाल पुलिस को हर संभव सहयोग प्रदान कर रहे हैं। बिहार और यूपी के अपराधियों का बंगाल में जाकर इस तरह की वारदात को अंजाम देना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नई चुनौती है। चंद्रनाथ रथ की असमय मौत ने उनके परिवार और समर्थकों को गहरा सदमा दिया है, लेकिन अपराधियों की इन ताजा गिरफ्तारियों ने न्याय की उम्मीद जगा दी है। तकनीक और पारंपरिक पुलिसिंग के इस मेल ने साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे सीमा पार कर जाए या भेष बदल ले, डिजिटल निशान उसे अंततः सलाखों के पीछे पहुँचा ही देते हैं।


