
पटना, 30 मार्च। बिहार सरकार ने अनुशासनहीनता पर सख्त रुख अपनाते हुए 69वीं बैच के 69 परीक्ष्यमान राजस्व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। इन अधिकारियों पर सामूहिक अवकाश लेकर सरकारी कार्यों से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने का आरोप है।
अवैध घोषित हुआ सामूहिक अवकाश
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने स्पष्ट किया है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा लिया गया सामूहिक अवकाश अवैध है और इसे ‘डाईस नॉन’ माना गया है। इसका मतलब है कि इस अवधि को सेवा में नहीं गिना जाएगा और वेतन/सेवा लाभ पर भी असर पड़ेगा।
13 अप्रैल तक मांगा गया जवाब
विभाग के उप सचिव संजय कुमार सिंह की ओर से सभी अधिकारियों को नोटिस भेजकर 13 अप्रैल 2026 तक स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है। चेतावनी दी गई है कि तय समय सीमा तक जवाब नहीं देने पर एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें सेवा से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई शामिल हो सकती है।
सरकारी नियमों का उल्लंघन
पत्र में कहा गया है कि अधिकारियों का यह आचरण न केवल सरकारी आदेशों की अवहेलना है, बल्कि बिहार सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1976 के नियम 3(1) का भी उल्लंघन है। अधिकारियों पर आरोप है कि वे 25 मार्च की शाम 5 बजे तक अपने पदों पर वापस नहीं लौटे।
24 जिलों के अधिकारी कार्रवाई के दायरे में
यह कार्रवाई राज्य के 24 जिलों में तैनात अधिकारियों पर की गई है। इनमें—
- गया जिले में 8 अधिकारी
- रोहतास में 7
- मधुबनी में 5
- बक्सर, बेगूसराय, कटिहार, मधेपुरा, पूर्वी चंपारण, वैशाली और जमुई में 4-4
- सिवान, सीतामढ़ी और नालंदा में 3-3
- औरंगाबाद में 2 अधिकारी
इसके अलावा पटना समेत किशनगंज, खगड़िया, पूर्णिया, सुपौल, नवादा, अररिया, अरवल और लखीसराय में तैनात एक-एक अधिकारी भी इस कार्रवाई के दायरे में आए हैं।
सरकार का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समय पर जवाब नहीं देने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है।


