
बिहार के जिले से ऑनर किलिंग का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। एक परिवार पर आरोप है कि उसने अपनी ही 19 वर्षीय बेटी सुजाता कुमारी की केवल इसलिए हत्या कर दी, क्योंकि उसने परिवार की इच्छा के विरुद्ध अंतरजातीय प्रेम विवाह कर लिया था। इतना ही नहीं, हत्या के बाद आरोपियों ने शव को बूढ़ी गंडक नदी के किनारे ले जाकर जला दिया, ताकि घटना से जुड़े सभी सबूत मिटाए जा सकें। इस दिल दहला देने वाले मामले ने समाज में सम्मान के नाम पर होने वाली हिंसा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस के अनुसार सुजाता कुमारी और उसके पति की प्रेम कहानी स्कूल के दिनों से शुरू हुई थी। दोनों पड़ोसी गांवों के रहने वाले थे और धीरे-धीरे उनकी दोस्ती प्यार में बदल गई। वर्ष 2020 से दोनों एक-दूसरे के करीब आए और करीब छह वर्षों तक उनका रिश्ता जारी रहा। हालांकि दोनों अलग-अलग जातियों से थे, इसलिए परिवार इस रिश्ते के खिलाफ था।
परिवार के भारी विरोध के बावजूद दोनों ने जनवरी 2026 में घर छोड़ने का फैसला किया। इसके बाद दोनों समस्तीपुर जाकर कानूनी रूप से विवाह बंधन में बंध गए और शादी के बाद हरियाणा चले गए। यह विवाह परिवार को स्वीकार नहीं था। लड़की के परिजनों ने इस शादी का विरोध करते हुए युवक के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज करा दिया।
मामले में पुलिस सक्रिय हुई और कुछ समय बाद दोनों को खोजकर अदालत में पेश किया गया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान सुजाता ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह बालिग है और अपनी इच्छा से गौरीशंकर के साथ रहना चाहती है। उसने न्यायालय के सामने निर्भीक होकर अपने रिश्ते का समर्थन किया। कोर्ट के इस बयान ने साफ कर दिया कि यह विवाह उसकी सहमति से हुआ था।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। कानूनी प्रक्रिया के बाद कुछ परिस्थितियों में दोनों कुछ समय के लिए अलग हुए। इसी बीच होली के अवसर पर सुजाता अपने मायके लौट आई। पति गौरीशंकर के अनुसार उनकी सुजाता से आखिरी बार 31 मार्च को फोन पर बात हुई थी। इसके बाद अचानक उसका फोन बंद आने लगा।
शुरुआत में गौरीशंकर को लगा कि परिवार के दबाव के कारण संपर्क नहीं हो पा रहा होगा, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, उनकी चिंता बढ़ती गई। उन्होंने बार-बार पत्नी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जब उन्होंने सुजाता के परिवार से जानकारी लेने की कोशिश की तो कथित तौर पर उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
करीब दो महीने तक पत्नी का कोई सुराग न मिलने पर गौरीशंकर पूरी तरह टूट गए। अंततः उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया। एक भावुक वीडियो संदेश में उन्होंने प्रशासन से अपनी पत्नी को खोजने की अपील की। वीडियो में रोते हुए उन्होंने कहा कि यदि उनकी पत्नी के साथ कुछ गलत हुआ है तो दोषियों को सजा मिलनी चाहिए, अन्यथा वह अपनी जान दे देंगे।
यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया। सोशल मीडिया पर लोगों ने इस मामले को गंभीरता से उठाया। बढ़ते दबाव के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया। वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में एक विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया, जिसने पूरे मामले की गहराई से जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने सुजाता के भाई अभिषेक कुमार को हिरासत में लिया। पूछताछ में जो जानकारी सामने आई, उसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। पुलिस के अनुसार परिवार को डर था कि सुजाता फिर से अपने पति के पास चली जाएगी, जिससे समाज में उनकी कथित बदनामी होगी।
जांच में सामने आया कि इसी तथाकथित “इज्जत” को बचाने के नाम पर परिवार ने 8 मई को एक खौफनाक साजिश रची। आरोप है कि परिवार के कई सदस्यों ने मिलकर सुजाता का गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को चुपचाप घर से बाहर ले जाया गया।
पुलिस के अनुसार शव को के किनारे ले जाकर आग के हवाले कर दिया गया, ताकि हत्या का कोई प्रमाण न बचे। शव पूरी तरह जल जाने के बाद आरोपी लौट आए और सामान्य व्यवहार करते रहे। परिवार ने बाहरी दुनिया से घटना को पूरी तरह छिपाने की कोशिश की।
भाई की निशानदेही पर पुलिस ने नदी किनारे पहुंचकर फॉरेंसिक जांच के लिए राख और अन्य अवशेष एकत्र किए हैं। इन नमूनों को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए भेजा गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट इस मामले में अहम सबूत साबित हो सकती है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस ऑनर किलिंग में परिवार के पांच से अधिक सदस्य शामिल हो सकते हैं। मुख्य आरोपियों को हिरासत में लिया जा चुका है, जबकि अन्य फरार संदिग्धों की तलाश जारी है। कई स्थानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है।
यह मामला केवल एक हत्या का नहीं, बल्कि सामाजिक मानसिकता का भी आईना है। आज भी कई जगह अंतरजातीय विवाह को स्वीकार नहीं किया जाता। सम्मान और परंपरा के नाम पर युवा जीवन खत्म कर देना समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि ऑनर किलिंग जैसी घटनाएं बताती हैं कि सामाजिक सुधार की दिशा में अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। प्रेम विवाह या अंतरजातीय विवाह व्यक्तिगत अधिकारों के दायरे में आते हैं और किसी भी परिवार को हत्या जैसे अपराध का अधिकार नहीं है।
सुजाता की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि क्या आज भी समाज में युवाओं को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने की स्वतंत्रता वास्तव में प्राप्त है। यह घटना बताती है कि आधुनिकता के दौर में भी कई परिवार जाति और सामाजिक प्रतिष्ठा के नाम पर अमानवीय कदम उठा रहे हैं।
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपियों को जल्द कानून के दायरे में लाया जाएगा। सुजाता के पति गौरीशंकर न्याय की मांग पर अडिग हैं। पूरे बिहार की नजर अब इस केस पर टिकी है कि आखिर सुजाता को न्याय कब और कैसे मिलेगा।


