
बिहार में गंगा नदी के दोनों किनारों पर रहने वाले लोगों के लिए अब आवाजाही और भी सुगम होने जा रही है। राज्य के पटना, भोजपुर और वैशाली जिलों में गंगा नदी पर कुल 6 पीपा पुल बनाने की तैयारी तेज हो गई है। जल परिवहन विभाग इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने में जुटा है और कई स्थानों पर टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
इन पीपा पुलों का उद्देश्य केवल आवागमन को आसान बनाना नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और स्थानीय व्यापार को नई रफ्तार देना भी है। खासकर उन इलाकों में यह योजना बेहद अहम मानी जा रही है, जहां आज भी लोग गंगा पार करने के लिए नावों पर निर्भर हैं।
योजना के तहत पटना जिले में सबसे अधिक चार पीपा पुल बनाए जाएंगे, जबकि भोजपुर और वैशाली में एक-एक पुल का निर्माण प्रस्तावित है। विभाग ने सभी स्थानों की पहचान कर ली है और चरणबद्ध तरीके से निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। भोजपुर के मौजमपुर में बनने वाला पुल सबसे लंबा होगा, जिसकी लंबाई करीब 1034 मीटर तय की गई है।
वहीं वैशाली के चकौशन में लगभग 935 मीटर लंबा पीपा पुल बनाया जाएगा। पटना में दानापुर, ग्यासपुर और कच्ची दरगाह जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर भी पुल निर्माण की योजना है। कच्ची दरगाह में बनने वाला पुल करीब 943 मीटर से अधिक लंबा होगा, जिसके लिए टेंडर प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
इन पुलों के बनने से गंगा के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले किसानों को सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा। अब उन्हें खेतों तक पहुंचने के लिए नाव का सहारा नहीं लेना पड़ेगा, बल्कि वे सीधे खाद, बीज और कृषि उपकरण लेकर आसानी से अपने खेतों तक पहुंच सकेंगे। इससे खेती-किसानी में समय और लागत दोनों की बचत होगी।
इसके अलावा, बड़े पुलों पर लगने वाले ट्रैफिक जाम से भी राहत मिलने की उम्मीद है। छोटे वाहन इन पीपा पुलों का उपयोग कर वैकल्पिक मार्ग अपना सकेंगे, जिससे यातायात का दबाव कम होगा। स्थानीय लोगों के लिए यह पुल शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों तक पहुंच को भी सरल और तेज बनाएंगे।


