
बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के ट्रांसफर और पोस्टिंग को लेकर स्थिति एक बार फिर स्पष्ट नहीं हो सकी है। इस प्रक्रिया में हो रही देरी के कारण शिक्षकों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। बिहार शिक्षा विभाग ने नई ट्रांसफर नीति तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसे विभिन्न सुझावों के आधार पर अंतिम रूप दिया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, वर्तमान ट्रांसफर पॉलिसी में कई खामियां सामने आई हैं, जिसके चलते स्कूलों में विषयवार शिक्षकों का संतुलन बिगड़ गया है। कई माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में एक ही विषय के लिए निर्धारित पदों से अधिक शिक्षकों की तैनाती हो गई है, जबकि अन्य महत्वपूर्ण विषयों में शिक्षकों की भारी कमी देखी जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, कुछ स्कूलों में जहां दो पद स्वीकृत हैं, वहां चार-चार शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि कई स्थानों पर विषय विशेषज्ञ शिक्षकों का अभाव है। इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। इस मुद्दे पर 24 अप्रैल को विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक भी आयोजित की गई थी।
बैठक में ट्रांसफर और पोस्टिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के निर्देश दिए गए। सरकार का उद्देश्य है कि इस व्यवस्था को सरल, निष्पक्ष और प्रभावी बनाया जाए, ताकि सभी स्कूलों में संतुलित रूप से शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
सूत्रों के मुताबिक, मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नई ट्रांसफर नीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। इससे पहले शिक्षक संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव लिए जाएंगे। सभी सुझावों पर विचार करने के बाद ही नई नीति लागू की जाएगी।
फिलहाल, शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के ट्रांसफर पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिससे राज्यभर के शिक्षकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है और वे नई नीति के लागू होने का इंतजार कर रहे हैं।


