
सीतामढ़ी। बिहार के सीतामढ़ी जिले में इंसानियत को झकझोर देने वाली एक अत्यंत घृणित और खौफनाक वारदात सामने आई है। जिले के नगर थाना क्षेत्र में एक 10 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ उसके ही पड़ोसी ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। महज एक चॉकलेट का लालच देकर आरोपी ने मासूम की जिंदगी को नर्क बना दिया। इस घटना के सार्वजनिक होते ही पूरे सीतामढ़ी शहर में उबाल आ गया है। स्थानीय निवासियों का गुस्सा फूट पड़ा है और स्थिति इस कदर तनावपूर्ण हो गई है कि बड़ी संख्या में महिलाएं हाथों में झाड़ू लेकर सड़कों पर उतर आई हैं। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया है और टायर जलाकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की जा रही है। पुलिस के आला अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और भीड़ को शांत करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लोगों की मांग है कि आरोपी को तुरंत सलाखों के पीछे भेजा जाए और उसे ऐसी सजा मिले जो मिसाल बन सके।
हैवानियत की खौफनाक दास्तान: चॉकलेट का जाल और दरिंदगी
सीतामढ़ी के नगर थाना क्षेत्र स्थित एक मोहल्ले में यह वारदात बुधवार को हुई। जानकारी के अनुसार, पीड़ित बच्ची अपने घर के पास खेल रही थी, तभी उसके पड़ोसी युवक ने उसे अपनी ओर बुलाया। आरोपी ने बच्ची को चॉकलेट दिलाने का झांसा दिया। मासूम अपनी नादानी में पड़ोसी पर भरोसा कर उसके साथ चली गई। आरोपी उसे एक एकांत स्थान पर ले गया, जहाँ उसने मासूम की मासूमियत को तार-तार कर दिया। वारदात के बाद आरोपी ने बच्ची को डराया-धमकाया और वहां से भाग निकला।
बच्ची जब रोती-बिलखती और लहूलुहान हालत में अपने घर पहुँची, तो उसके माता-पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। बच्ची ने इशारों और अपनी टूटी-फूटी जुबान से जो आपबीती सुनाई, उसने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। मोहल्ले के लोगों को जैसे ही इस कुकृत्य की भनक लगी, देखते ही देखते लोगों का हुजूम इकट्ठा हो गया। हर कोई उस दरिंदे की गिरफ्तारी की मांग करने लगा जिसने भरोसे के रिश्ते को कलंकित किया था।
सड़क पर उतरा जन-आक्रोश: झाड़ू और आगजनी के बीच भारी हंगामा
घटना की जानकारी मिलने के कुछ ही घंटों के भीतर सीतामढ़ी की मुख्य सड़कें रणक्षेत्र में तब्दील हो गईं। आक्रोशित लोगों ने नगर थाना क्षेत्र के मुख्य चौराहे को जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क के बीचों-बीच टायर जलाए, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। इस प्रदर्शन में सबसे ज्यादा आक्रोश महिलाओं में देखा गया। सैकड़ों की संख्या में महिलाएं अपने हाथों में झाड़ू लेकर सड़कों पर निकलीं और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की।
प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना था कि जिले में अपराधी बेखौफ हो गए हैं और अब बच्चियां अपने घर के पास भी सुरक्षित नहीं हैं। महिलाओं ने पुलिस प्रशासन पर ढुलमुल रवैया अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि जब तक आरोपी की गिरफ्तारी सुनिश्चित नहीं होती, वे सड़क से नहीं हटेंगी। आगजनी और हंगामे के कारण शहर के कई हिस्सों में दुकानों के शटर गिर गए और लोग दहशत के कारण घरों में दुबक गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई थानों की पुलिस को मौके पर बुलाया गया है।
शातिर अपराधी की चालाकी: सिम फेंककर हुआ फरार
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी बेहद शातिर किस्म का है। वारदात को अंजाम देने के बाद जब उसे लगा कि पुलिस उस तक पहुँच सकती है, तो उसने बड़ी चालाकी से अपना मोबाइल सिम कार्ड तोड़कर अपने घर के पास ही फेंक दिया। उसने मोबाइल हैंडसेट अपने पास रखा है लेकिन सिम न होने के कारण पुलिस को उसे ट्रैक करने में तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सदर डीएसपी राजीव कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस ने आरोपी के घर पर दबिश दी थी, लेकिन वह फरार मिला। पुलिस ने उसके परिवार के कुछ सदस्यों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। परिजनों ने भी स्वीकार किया है कि घटना के बाद से ही युवक गायब है। पुलिस का मानना है कि आरोपी किसी गुप्त ठिकाने पर छिपा हुआ है या जिला छोड़कर भागने की फिराक में है।
पुलिस की कार्रवाई और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मुख्यालय भी सक्रिय हो गया है। सदर डीएसपी राजीव कुमार सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया है जो लगातार छापेमारी कर रही है। पुलिस ने पीड़ित बच्ची को तत्काल मेडिकल परीक्षण के लिए अस्पताल भेजा, जहाँ उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। डॉक्टरों की एक टीम उसकी निगरानी कर रही है।
डीएसपी राजीव कुमार सिंह ने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस इस मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रही है। उन्होंने आक्रोशित लोगों से अपील की कि वे कानून को अपने हाथ में न लें और सड़क जाम खत्म करें ताकि जांच प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। उन्होंने आश्वासन दिया कि आरोपी की पहचान हो चुकी है और उसके भागने के सभी रास्तों को सील कर दिया गया है। तकनीकी सेल की मदद से उसके मोबाइल की लोकेशन ट्रेस करने की कोशिश की जा रही है।
तनावपूर्ण सन्नाटा और प्रशासन की चुनौती
वर्तमान में सीतामढ़ी के प्रभावित इलाकों में भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। वज्र वाहन और दंगा नियंत्रण दस्ते को भी अलर्ट पर रखा गया है। भले ही पुलिस प्रदर्शनकारियों को शांत कराने का दावा कर रही हो, लेकिन मोहल्लों के भीतर सुलगता गुस्सा कभी भी दोबारा सड़क पर आ सकता है। सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना की निंदा की है और स्पीडी ट्रायल चलाकर आरोपी को फांसी की सजा देने की मांग उठाई है।
सीतामढ़ी की इस घटना ने एक बार फिर समाज में बच्चों की सुरक्षा और पड़ोसियों के बीच बढ़ते अविश्वास को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। प्रशासन के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे कितनी जल्दी उस फरार दरिंदे को पकड़कर सलाखों के पीछे भेजते हैं, जिसने एक 10 साल की मासूम की गरिमा और उसके भविष्य को चोट पहुँचाई है। शहर के प्रबुद्ध नागरिकों ने शांति बनाए रखने की अपील की है, लेकिन न्याय की मांग को लेकर लोगों का धरना अब भी जारी है। पुलिस की गश्ती गाड़ियां रात भर मोहल्ले में गश्त कर रही हैं ताकि कोई अप्रिय घटना न घटे।


