​बक्सर में साइबर अपराधियों की बड़ी हिमाकत: जज के नाम पर बनाया फर्जी व्हाट्सएप, वकीलों से मांगे 50-50 हजार रुपये

बक्सर। बिहार के बक्सर जिले में साइबर अपराधियों ने दुस्साहस की सारी सीमाएं लांघते हुए न्यायपालिका के सर्वोच्च पद की गरिमा को निशाना बनाया है। तकनीक का सहारा लेकर जालसाजों ने इस बार किसी आम नागरिक को नहीं, बल्कि सीधे न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं को ठगने का जाल बुना। थाईलैंड के कंट्री कोड वाले एक मोबाइल नंबर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की तस्वीर और नाम का इस्तेमाल कर फर्जी व्हाट्सएप प्रोफाइल तैयार की गई। इस फर्जी अकाउंट के जरिए जिले के नामचीन वकीलों और न्यायालय कर्मियों को संदेश भेजकर तत्काल रुपयों की मांग की गई। जैसे ही यह मामला सार्वजनिक हुआ, कचहरी परिसर में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में पुलिस के आला अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई। पुलिस अब उस विदेशी नंबर के डिजिटल फुटप्रिंट खंगाल रही है ताकि इस अंतरराष्ट्रीय साजिश के पीछे छिपे चेहरों को बेनकाब किया जा सके।

थाईलैंड के नंबर से रची गई ठगी की पटकथा

​साइबर अपराध की इस नई और चौंकाने वाली वारदात में जिस तकनीक का इस्तेमाल हुआ है, वह पुलिस के लिए भी चुनौती बनी हुई है। अपराधियों ने व्हाट्सएप अकाउंट बनाने के लिए +66 कंट्री कोड वाले नंबर (+66 840021540) का उपयोग किया, जो थाईलैंड का है। इस नंबर की प्रोफाइल पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कैयल झांब की आधिकारिक पहचान और तस्वीर लगा दी गई ताकि पहली नजर में किसी को भी संदेश की सत्यता पर शक न हो।

​बुधवार की सुबह जब न्यायालय परिसर में कामकाज शुरू हुआ, तब कई अधिवक्ताओं के मोबाइल फोन पर इस नंबर से मैसेज आने शुरू हुए। संदेश में खुद को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बताते हुए यह कहा गया कि वे एक बेहद जरूरी काम में व्यस्त हैं और उन्हें तत्काल 50 हजार रुपये की आवश्यकता है। संदेश भेजने वाले ने वकीलों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश की और जल्द से जल्द रुपये एक डिजिटल वॉलेट या बैंक खाते में ट्रांसफर करने को कहा।

वकीलों के बीच अफरा-तफरी और शक की सुई

​शुरुआत में कुछ अधिवक्ताओं को लगा कि शायद न्यायाधीश को वास्तव में किसी आपात स्थिति में मदद की जरूरत है, लेकिन जैसे ही यह बात एक से दूसरे वकील तक पहुँची, सभी चौंक गए। जब आधा दर्जन से अधिक लोगों के पास एक ही तरह के मैसेज आए, तब मामला संदिग्ध लगने लगा। अधिवक्ताओं ने आपस में चर्चा की कि एक जिला जज स्तर का अधिकारी कभी भी इस तरह व्हाट्सएप पर वकीलों से सीधे रुपयों की मांग नहीं करेगा।

​जैसे ही यह पुख्ता हुआ कि यह किसी साइबर ठग की हरकत है, न्यायालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। अधिवक्ता संघ के सदस्यों ने इसे न्यायपालिका की छवि खराब करने और सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाने वाला गंभीर अपराध करार दिया। तुरंत इसकी जानकारी न्यायालय के प्रशासनिक विभाग और जिला पुलिस को दी गई। मामला सीधे तौर पर जिले के सबसे वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी से जुड़ा था, इसलिए पुलिस महकमा भी तुरंत सक्रिय हो गया।

साइबर सेल ने शुरू किया तकनीकी अनुसंधान

​इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर डीएसपी अविनाश कुमार ने स्वयं कमान संभाली है। उन्होंने बताया कि इस मामले में सनहा दर्ज कर लिया गया है और प्राथमिकता के आधार पर तकनीकी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अपराधी वास्तव में थाईलैंड में बैठा है या फिर वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) और वीओआईपी (VOIP) तकनीक का इस्तेमाल कर लोकेशन बदली गई है।

​अविनाश कुमार के अनुसार, साइबर अपराधियों ने ‘इम्पर्सनेशन’ (भेष बदलना या दूसरे की पहचान लेना) का सहारा लिया है। वे अक्सर इंटरनेट से बड़े अधिकारियों की तस्वीरें और पदनाम निकालकर फर्जी प्रोफाइल बनाते हैं। पुलिस अब उस बैंक खाते और यूपीआई आईडी की भी जांच कर रही है, जिसका जिक्र रुपयों की मांग करने वाले संदेशों में किया गया था। साइबर सेल के विशेषज्ञों की टीम इस विदेशी नंबर के कॉल डेटा और आईपी एड्रेस को ट्रैक करने में जुटी है।

अधिकारियों की पहचान का दुरुपयोग: एक नया ट्रेंड

​बक्सर में हुई यह घटना बिहार में बढ़ते साइबर अपराध के एक नए और खतरनाक ट्रेंड की ओर इशारा करती है। हाल के दिनों में देखा गया है कि अपराधी अब केवल बैंक ग्राहकों को ही निशाना नहीं बना रहे, बल्कि वे आईएएस, आईपीएस और अब न्यायाधीशों के नाम का उपयोग कर रहे हैं। अपराधियों को पता है कि बड़े अधिकारियों के नाम पर लोग जल्दी दबाव में आ जाते हैं और बिना जांच-पड़ताल किए रुपये भेज देते हैं।

​अधिवक्ताओं का कहना है कि यह केवल ठगी का प्रयास नहीं है, बल्कि न्यायिक गरिमा पर हमला है। यदि वकील जैसे जागरूक लोग इस जाल में फंस सकते हैं, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या होगा। जिला जज की फोटो लगाकर ठगी की कोशिश ने यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराधियों के मन में कानून का रत्ती भर भी खौफ नहीं रह गया है।

पुलिस की अपील: संदिग्ध संदेशों से रहें सावधान

​इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने जिले के सभी नागरिकों, विशेष रूप से सरकारी कर्मियों और अधिकारियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। साइबर डीएसपी ने अपील की है कि यदि किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किसी बड़े अधिकारी के नाम से रुपयों की मांग की जाती है, तो उसे तुरंत ठगी का प्रयास मानें। कोई भी जिम्मेदार अधिकारी कभी भी इस तरह से व्यक्तिगत रूप से रुपयों की लेनदेन नहीं करता है।

​पुलिस ने यह भी साफ किया है कि इस मामले में शामिल अपराधियों को जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा। बक्सर पुलिस की टीम अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय ऐसे गिरोहों के पैटर्न का अध्ययन कर रही है। फिलहाल न्यायालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चर्चा तेज है और लोग इस बात को लेकर हैरान हैं कि अपराधियों के पास वकीलों और कोर्ट कर्मियों के मोबाइल नंबरों का डेटा कहाँ से पहुँचा। पुलिस अब उस डेटा लीक के पहलू पर भी जांच कर रही है।

सुरक्षा मानकों पर सवाल

​न्यायालय परिसर जैसे अति-सुरक्षित क्षेत्र से जुड़े लोगों की जानकारी का इस तरह से अपराधियों तक पहुँचना सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय है। यह मामला दर्शाता है कि डिजिटल दुनिया में किसी की भी पहचान सुरक्षित नहीं है। बक्सर के अधिवक्ताओं ने मांग की है कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल चलाकर कड़ी सजा दी जाए ताकि भविष्य में कोई भी न्यायपालिका के नाम का दुरुपयोग करने की जुर्रत न कर सके। पुलिस फिलहाल पूरे मामले के डिजिटल साक्ष्य जुटाने में लगी है और उम्मीद जताई जा रही है कि अगले कुछ दिनों में इस अंतरराष्ट्रीय सिम और फर्जी अकाउंट की गुत्थी सुलझ जाएगी।

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