पेंशनधारियों के लिए अंतिम चेतावनी: 30 मई तक जीवन प्रमाणीकरण अनिवार्य, वरना बंद हो जाएगी सरकारी सहायता; समाज कल्याण मंत्री ने बुलाई समीक्षा बैठक

पटना। बिहार के लाखों पेंशनधारियों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण सूचना सामने आई है। राज्य सरकार के समाज कल्याण विभाग ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं का लाभ ले रहे लाभार्थियों के लिए ‘जीवन प्रमाणीकरण’ (Life Certification) कराने की अंतिम तिथि निर्धारित कर दी है। समाज कल्याण मंत्री श्वेता गुप्ता ने विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद स्पष्ट किया है कि आगामी 30 मई 2026 तक जिन पेंशनधारियों का जीवन प्रमाणीकरण पूरा नहीं होगा, उनकी पेंशन राशि पर रोक लगाई जा सकती है। सरकार का यह कदम पेंशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने और यह सुनिश्चित करने के लिए है कि योजना का लाभ केवल जीवित और वास्तविक पात्र व्यक्तियों को ही मिले। बुधवार को पटना में आयोजित इस बैठक में विभाग के आला अधिकारियों के साथ योजनाओं की वर्तमान स्थिति और तकनीकी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

30 मई की समय-सीमा: निर्बाध भुगतान के लिए प्रमाणीकरण जरूरी

​समाज कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री श्वेता गुप्ता ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि अब तक राज्य के लगभग 91.25 लाख पेंशनधारियों ने अपना जीवन प्रमाणीकरण सफलतापूर्वक करवा लिया है। हालांकि, अभी भी एक बड़ी संख्या ऐसी है जिन्होंने इस प्रक्रिया को पूरा नहीं किया है। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पंचायत स्तर पर विशेष शिविर लगाएं और व्यापक प्रचार-प्रसार करें ताकि कोई भी पात्र लाभार्थी सूचना के अभाव में इस लाभ से वंचित न रह जाए।

​यह प्रमाणीकरण इसलिए अनिवार्य है क्योंकि इसके अभाव में विभाग यह सुनिश्चित नहीं कर पाता कि लाभार्थी जीवित है या नहीं। कई बार लाभार्थी की मृत्यु के बाद भी बैंक खातों में राशि जाती रहती है, जिसे रोकने के लिए डिजिटल जीवन प्रमाणीकरण एक प्रभावी जरिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि 30 मई के बाद डाटा को फ्रीज किया जा सकता है, जिसके बाद प्रमाणीकरण न कराने वाले खातों में पेंशन की अगली किस्त नहीं भेजी जाएगी।

निःशुल्क सुविधा: पंचायत भवन और कॉमन सर्विस सेंटर पर होगा काम

​ग्रामीण क्षेत्रों के वृद्ध और निःशक्त पेंशनधारियों की सुविधा के लिए सरकार ने इस प्रक्रिया को बेहद सरल और निःशुल्क बनाया है। पेंशनधारी अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या पंचायत स्तर पर आयोजित होने वाले विशेष शिविरों में जाकर बायोमेट्रिक माध्यम से अपना जीवन प्रमाणीकरण करा सकते हैं।

  • पंचायत स्तरीय शिविर: दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले बुजुर्गों के लिए पंचायत भवनों पर शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया गया है।
  • निःशुल्क सेवा: किसी भी लाभार्थी से इस प्रक्रिया के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। यदि कोई केंद्र संचालक पैसों की मांग करता है, तो उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
  • जरूरी दस्तावेज: प्रमाणीकरण के लिए पेंशनधारी को अपना आधार कार्ड, बैंक पासबुक और पेंशन आईडी (PPO नंबर) साथ लेकर जाना होगा।

वंचित पात्रों को जोड़ने का लक्ष्य: ‘अंत्योदय’ की भावना पर जोर

​समीक्षा बैठक में श्वेता गुप्ता ने केवल मौजूदा लाभार्थियों की ही बात नहीं की, बल्कि उन पात्र लोगों को भी योजना से जोड़ने का निर्देश दिया जो अब तक इससे बाहर हैं। विभाग का लक्ष्य राज्य के हर गरीब परिवार के वृद्ध, निःशक्त (विकलांग), विधवा, कुष्ठ पीड़ित और भिक्षुक वर्ग के लोगों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। बैठक में मौजूद अपर मुख्य सचिव एच.आर. श्रीनिवास और सामाजिक सुरक्षा निदेशक धर्मेन्द्र कुमार को निर्देश दिया गया कि वे योजनाओं की मॉनिटरिंग व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करें।

​मंत्री ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा योजनाएं सरकार की लोक कल्याणकारी नीतियों का आधार हैं। कई बार जानकारी के अभाव में अत्यंत जरूरतमंद लोग आवेदन नहीं कर पाते हैं। ऐसे में विभागीय अधिकारियों को जमीनी स्तर पर समन्वय स्थापित कर यह सुनिश्चित करना होगा कि सामाजिक सुरक्षा निदेशालय के माध्यम से मिलने वाली आर्थिक सहायता हर उस दरवाजे तक पहुँचे जहाँ इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।

पारदर्शिता और जवाबदेही: अधिकारियों को सख्त निर्देश

​बैठक के दौरान योजनाओं के क्रियान्वयन में होने वाली देरी पर भी चर्चा हुई। श्वेता गुप्ता ने विभागीय पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे फाइलों के निपटारे में समयबद्धता और पारदर्शिता बरतें। उन्होंने कहा कि पेंशन वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे नियमित रूप से प्रखंड और जिला स्तर के कार्यालयों का निरीक्षण करें ताकि पेंशनधारियों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

​निदेशक धर्मेन्द्र कुमार ने बताया कि विभाग अब तकनीक का अधिक उपयोग कर रहा है जिससे भुगतान की प्रक्रिया में लगने वाला समय कम हुआ है। ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) के माध्यम से सीधे बैंक खाते में राशि भेजने से बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है। अब विभाग का पूरा ध्यान जीवन प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को शत-प्रतिशत पूरा करने पर है ताकि बजट का सही उपयोग हो सके।

सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का व्यापक दायरा

​बिहार में संचालित सामाजिक सुरक्षा योजनाएं समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों के लिए जीवनरेखा की तरह हैं। इसमें इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और विकलांगता पेंशन जैसी केंद्र प्रायोजित योजनाओं के साथ-साथ मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना जैसी राज्य स्तरीय योजनाएं भी शामिल हैं। इन योजनाओं के तहत लाभार्थियों को हर महीने एक निश्चित राशि दी जाती है जिससे वे अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा कर सकें।

​30 मई तक की इस मोहलत का उद्देश्य यह भी है कि डेटाबेस को पूरी तरह अपडेट कर दिया जाए। विभाग ने निर्देश दिया है कि जो लोग चलने-फिरने में असमर्थ हैं या बहुत अधिक वृद्ध हैं, उनके लिए मोबाइल टीमों के जरिए घर पर ही प्रमाणीकरण की संभावनाओं को तलाशा जाए। समाचार माध्यमों और विज्ञापनों के जरिए जिला प्रशासन को इस अभियान को गति देने को कहा गया है। विभाग ने सभी पेंशनधारियों से मार्मिक अपील की है कि वे समय रहते इस कार्य को पूरा कर लें ताकि उनकी आर्थिक मदद बिना किसी रुकावट के जारी रहे।

​श्वेता गुप्ता ने अंत में अधिकारियों से यह भी कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि समाज कल्याण विभाग की छवि एक सेवाभावी विभाग के रूप में बनी रहे। पेंशनधारियों के साथ आने वाली किसी भी तकनीकी समस्या, जैसे फिंगरप्रिंट न मिलना या आधार लिंक न होना, का समाधान स्थानीय स्तर पर प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। इस बैठक के बाद अब पूरे राज्य में प्रमाणीकरण अभियान में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

​एक प्रासंगिक सवाल यह भी उठता है कि क्या 30 मई के बाद भी समय सीमा बढ़ाई जाएगी? इस पर विभाग ने फिलहाल कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है, जिससे यह साफ है कि पेंशनधारी इस तारीख को ही अंतिम मानकर अपना काम पूरा कर लें। 91 लाख से अधिक लोगों का पहले ही जुड़ जाना इस योजना की सफलता को दर्शाता है, लेकिन शेष बचे लाभार्थियों के लिए यह अगले 15 दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

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