
पटना, 29 अप्रैल 2026। बिहार में नई सरकार के गठन के बाद आज सम्राट चौधरी के नेतृत्व में कैबिनेट की दूसरी बैठक आयोजित होने जा रही है। मुख्यमंत्री सचिवालय में शाम 5 बजे होने वाली इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर निर्णय लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
इस बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे, जबकि उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र यादव भी इसमें शामिल होंगे। सरकार के गठन के बाद यह दूसरी औपचारिक कैबिनेट बैठक है, जिससे राज्य की नीतियों और प्राथमिकताओं को लेकर एक स्पष्ट दिशा सामने आ सकती है।
शाम 6 बजे होगी कैबिनेट ब्रीफिंग
कैबिनेट बैठक के बाद शाम 6 बजे प्रेस ब्रीफिंग के माध्यम से लिए गए फैसलों की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। इस ब्रीफिंग पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसमें राज्य के विकास और प्रशासनिक सुधार से जुड़े बड़े फैसलों की घोषणा हो सकती है।
दूसरी बैठक से बढ़ी उम्मीदें
यह कैबिनेट की दूसरी बैठक है, इसलिए इससे अपेक्षाएं भी अधिक हैं। पहली बैठक में जहां 22 महत्वपूर्ण एजेंडों को मंजूरी दी गई थी, वहीं इस बार भी कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगने की संभावना है।
सरकार के शुरुआती फैसले यह संकेत दे रहे हैं कि प्रशासनिक सुधार, शहरी विकास और बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता दी जा रही है।
पहली बैठक के फैसलों की झलक
22 अप्रैल को आयोजित पहली कैबिनेट बैठक में कई बड़े निर्णय लिए गए थे, जिनमें सबसे प्रमुख था राज्य के 11 शहरों में सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव।
इस योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों का विस्तार करना, भीड़भाड़ कम करना और आधुनिक सुविधाओं से लैस नए शहरों का निर्माण करना है।
जमीन खरीद-बिक्री पर रोक
सैटेलाइट टाउनशिप योजना के तहत सरकार ने संबंधित क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री पर अस्थायी रोक भी लगा दी है।
मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, भागलपुर और छपरा के आसपास यह प्रतिबंध 30 जून 2027 तक लागू रहेगा। वहीं पटना, सोनपुर, गया, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया और मुंगेर में यह रोक 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेगी।
इस फैसले का उद्देश्य भूमि की अनियंत्रित खरीद-फरोख्त को रोकना और योजनाबद्ध तरीके से विकास कार्यों को आगे बढ़ाना है।
कैबिनेट विस्तार का इंतजार
गौरतलब है कि अभी तक बिहार सरकार का कैबिनेट विस्तार नहीं हुआ है। फिलहाल सभी विभाग मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों के पास ही हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जल्द ही कैबिनेट का विस्तार किया जा सकता है, जिससे प्रशासनिक जिम्मेदारियों का बेहतर बंटवारा हो सके।
संभावित एजेंडे
हालांकि बैठक के एजेंडे की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि इसमें कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हो सकती है, जैसे—
- बुनियादी ढांचा विकास
- शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार
- रोजगार सृजन से जुड़ी योजनाएं
- प्रशासनिक सुधार और नई नीतियां
सरकार की प्राथमिकताएं
नई सरकार का फोकस विकास, पारदर्शिता और सुशासन पर है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि कैबिनेट बैठक में लिए जाने वाले फैसले इन प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने वाले होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती बैठकों में लिए गए निर्णय सरकार की कार्यशैली और दिशा तय करते हैं, इसलिए यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जनता की नजरें फैसलों पर
राज्य की जनता भी इस बैठक से काफी उम्मीदें लगाए बैठी है। खासकर युवा, किसान और शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोग सरकार से ठोस और प्रभावी फैसलों की उम्मीद कर रहे हैं।
यदि सरकार इस बैठक में बड़े और व्यावहारिक निर्णय लेती है, तो इससे जनता का विश्वास और मजबूत होगा।
सम्राट चौधरी सरकार की दूसरी कैबिनेट बैठक बिहार की राजनीति और प्रशासनिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
पहली बैठक में लिए गए फैसलों ने जहां सरकार की प्राथमिकताओं की झलक दी थी, वहीं दूसरी बैठक से इन प्राथमिकताओं को और स्पष्ट रूप मिलने की उम्मीद है।
अब सभी की नजरें शाम 6 बजे होने वाली कैबिनेट ब्रीफिंग पर टिकी हैं, जहां यह साफ होगा कि सरकार ने राज्य के विकास के लिए कौन-कौन से महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं।


