कच्ची दरगाह-बिदुपुर गंगा पुल परियोजना अंतिम चरण में, जुलाई के पहले सप्ताह तक पूरा होने का लक्ष्य

पटना। बिहार की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क एवं पुल परियोजनाओं में शामिल कच्ची दरगाह-बिदुपुर छह लेन गंगा पुल परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। राजधानी पटना और उत्तर बिहार के बीच आवागमन को नई दिशा देने वाली इस बहुप्रतीक्षित परियोजना का निर्माण कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है। शनिवार को बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने परियोजना स्थल का दौरा कर निर्माण कार्यों की प्रगति का विस्तृत जायजा लिया और अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर शेष कार्य पूरा करने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव ने मुख्य पुल, एप्रोच रोड, तकनीकी संरचनाओं तथा अन्य निर्माण गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने परियोजना से जुड़े अभियंताओं और अधिकारियों के साथ स्थल पर ही विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की तथा निर्माण की गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष ध्यान देने को कहा।

मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि यह परियोजना बिहार के परिवहन ढांचे के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसके पूरा होने से राज्य की कनेक्टिविटी व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि परियोजना के अंतिम चरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। वरिष्ठ अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग करने और प्रतिदिन कार्यों की प्रगति की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है।

निरीक्षण के दौरान पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने मुख्य सचिव को परियोजना की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब अधिकांश प्रमुख कार्य पूरे किए जा चुके हैं। वर्तमान में पुल पर फिनिशिंग कार्य, एक्सपेंशन जॉइंट्स की स्ट्रेसिंग, सड़क सतह से जुड़े तकनीकी कार्य तथा अन्य अंतिम चरण की प्रक्रियाएं जारी हैं।

अधिकारियों के अनुसार परियोजना का भौतिक कार्य लगभग 98.2 प्रतिशत पूरा हो चुका है। शेष बचे कार्यों को जुलाई 2026 के पहले सप्ताह तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विभाग का दावा है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर परियोजना को पूरी तरह तैयार कर लिया जाएगा ताकि आम जनता को इसका लाभ मिल सके।

यह परियोजना पटना जिले के कच्ची दरगाह क्षेत्र को वैशाली जिले के बिदुपुर से जोड़ती है। गंगा नदी पर बन रहा यह विशाल पुल बिहार की सबसे बड़ी आधारभूत संरचना परियोजनाओं में गिना जा रहा है। कुल 19.76 किलोमीटर लंबी इस छह लेन ग्रीनफील्ड परियोजना में 9.76 किलोमीटर लंबा मुख्य पुल और लगभग 10 किलोमीटर लंबा पहुंच मार्ग शामिल है।

परियोजना की खास बात यह है कि इसे आधुनिक तकनीक और उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। निर्माण एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि सभी तकनीकी मापदंडों का सख्ती से पालन किया जाए ताकि यह पुल आने वाले दशकों तक सुरक्षित और मजबूत बना रहे।

इस परियोजना का एक हिस्सा पहले ही आम लोगों के लिए खोला जा चुका है। प्रथम चरण के अंतर्गत कच्ची दरगाह से राघोपुर दियारा तक लगभग 4.57 किलोमीटर लंबे खंड का उद्घाटन किया जा चुका है। इससे क्षेत्र के लोगों को पहले से ही आंशिक लाभ मिलने लगा है। अब शेष हिस्से के पूरा होने का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद पूरी परियोजना का वास्तविक प्रभाव सामने आएगा।

कच्ची दरगाह-बिदुपुर पुल का सबसे बड़ा लाभ राजधानी पटना और उत्तर बिहार के बीच यात्रा को आसान बनाना होगा। वर्तमान में बड़ी संख्या में लोग महात्मा गांधी सेतु के माध्यम से गंगा नदी पार करते हैं। यातायात का भारी दबाव होने के कारण अक्सर जाम और यात्रा में देरी जैसी समस्याएं सामने आती हैं। नए पुल के चालू होने के बाद इन समस्याओं में काफी कमी आने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पुल केवल एक परिवहन परियोजना नहीं बल्कि क्षेत्रीय विकास का नया द्वार साबित होगा। पटना के सबलपुर क्षेत्र को राष्ट्रीय राजमार्ग-103 से जोड़ने वाला यह पुल सीधे पटना-बख्तियारपुर बाईपास और राष्ट्रीय राजमार्ग-30 से कनेक्ट होगा। इससे उत्तर बिहार के कई जिलों तक पहुंचना पहले की तुलना में अधिक आसान और तेज हो जाएगा।

परियोजना के पूरा होने से वैशाली, हाजीपुर, समस्तीपुर और आसपास के अन्य क्षेत्रों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। व्यापार, परिवहन और कृषि क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित होंगी। किसानों को अपने उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा होगी, जिससे उनकी आय बढ़ने की संभावना है।

उद्योग और व्यवसाय के क्षेत्र में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। बेहतर सड़क संपर्क मिलने से निवेश आकर्षित होगा और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। परिवहन लागत कम होने से व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी इस पुल का प्रभाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तर बिहार के कई इलाकों से गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए पटना आना पड़ता है। वर्तमान में यात्रा में लगने वाला समय कई बार इलाज में देरी का कारण बन जाता है। पुल के चालू होने के बाद मरीजों को राजधानी के बड़े अस्पतालों तक पहुंचने में कम समय लगेगा, जिससे आपातकालीन स्थितियों में राहत मिलेगी।

शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में भी यह परियोजना अहम भूमिका निभाएगी। छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और व्यवसायियों को पटना आने-जाने में अधिक सुविधा मिलेगी। इससे विभिन्न क्षेत्रों के बीच सामाजिक और आर्थिक संबंध भी मजबूत होंगे।

परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि छह लेन की यह संरचना भविष्य की यातायात आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है। आने वाले वर्षों में वाहनों की संख्या बढ़ने के बावजूद यह पुल बेहतर यातायात प्रबंधन सुनिश्चित करने में सक्षम होगा। इसके अलावा भारी वाहनों के लिए भी यह मार्ग एक महत्वपूर्ण विकल्प बन जाएगा।

मुख्य सचिव ने निरीक्षण के दौरान कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल सड़क और पुल बनाना नहीं है, बल्कि लोगों को बेहतर और सुरक्षित यात्रा अनुभव उपलब्ध कराना है। उन्होंने निर्माण एजेंसियों से कहा कि अंतिम चरण के कार्यों में गुणवत्ता के साथ कोई समझौता न किया जाए और प्रत्येक कार्य की तकनीकी जांच सुनिश्चित की जाए।

कच्ची दरगाह-बिदुपुर गंगा पुल परियोजना के पूरा होने के बाद बिहार के सड़क नेटवर्क को नई मजबूती मिलेगी। यह परियोजना गंगा नदी के दोनों किनारों के बीच आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संपर्क को मजबूत करेगी। साथ ही महात्मा गांधी सेतु पर बढ़ते यातायात दबाव को कम करने में भी बड़ी भूमिका निभाएगी।

राज्य सरकार और पथ निर्माण विभाग को उम्मीद है कि जुलाई 2026 के पहले सप्ताह तक शेष निर्माण कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। इसके बाद यह मेगा परियोजना पूरी तरह से जनता को समर्पित की जा सकेगी। माना जा रहा है कि इसके शुरू होने के बाद बिहार में परिवहन, व्यापार और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी और उत्तर बिहार की कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलेगा।

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