नालंदा विश्वविद्यालय पहुंचे SCO महासचिव नुरलान यरमेकबायेव, बौद्ध विरासत और क्षेत्रीय सहयोग पर हुआ संवाद

बिहार के नालंदा स्थित Nalanda University में आज शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के महासचिव Nurlan Yermekbayev और उनके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया गया। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के आमंत्रण पर भारत यात्रा के दौरान उनका नालंदा विश्वविद्यालय पहुंचना संस्थान के लिए महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।

सतत विकास और बौद्ध विरासत पर संवाद

इस अवसर पर विश्वविद्यालय में सतत विकास, नेट ज़ीरो पहल, ‘सहभागिता’, बौद्ध विरासत तथा क्षेत्रीय सहयोग जैसे विषयों पर प्रेजेंटेशन और संवाद का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों और अधिकारियों के साथ हुई चर्चाओं में ज्ञान-विनिमय, सांस्कृतिक समझ, विरासत संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर विशेष जोर दिया गया।

पीएम मोदी की दूरदृष्टि का किया जिक्र

अपने संबोधन में SCO महासचिव नुरलान यरमेकबायेव ने SCO देशों की साझा बौद्ध विरासत पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में भारत की अध्यक्षता के दौरान Narendra Modi के मार्गदर्शन और दूरदृष्टि में साझा बौद्ध विरासत को शंघाई सहयोग संगठन के एक नए स्तंभ के रूप में शामिल किया गया था।

उन्होंने कहा, “SCO देशों की साझा बौद्ध विरासत के संवर्धन और प्रसार में नालंदा विश्वविद्यालय की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है।”

विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ हुई अहम चर्चा

महासचिव के इस बयान के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ विभिन्न शैक्षणिक और सांस्कृतिक आयामों पर विस्तार से चर्चा की गई। बातचीत में बौद्ध विरासत, क्षेत्रीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी जैसे विषय प्रमुख रहे।

सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने में अहम भूमिका

विश्वविद्यालय के कुलपति Sachin Chaturvedi ने कहा कि बौद्ध विरासत मध्य एशिया सहित रूस, मंगोलिया और चीन जैसे देशों के साथ सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने कहा कि प्राचीन बौद्ध नेटवर्क, सांस्कृतिक गलियारे, भाषाएं, लिपियां और पांडुलिपियां इन क्षेत्रों के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंधों को दर्शाती हैं। कुलपति ने बताया कि नालंदा विश्वविद्यालय इन विषयों को अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों और अंतरराष्ट्रीय सहयोगों में सक्रिय रूप से शामिल कर रहा है।

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