​हरिहरनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री: सम्राट चौधरी ने सपरिवार की पूजा, सारण में हुआ भव्य स्वागत

सोनपुर (सारण)। बिहार की सत्ता की कमान संभालने के बाद आध्यात्मिक ऊर्जा और जन-आशीर्वाद के संगम पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर स्थित ऐतिहासिक बाबा हरिहरनाथ मंदिर शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026 को उस वक्त राजनैतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का केंद्र बन गया, जब मुख्यमंत्री सपरिवार यहाँ मत्था टेकने पहुँचे। सारण जिले की सीमा में प्रवेश करते ही प्रशासन और जनता ने उनका जो उत्साहपूर्ण स्वागत किया, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व के प्रति लोगों में कितनी भारी उम्मीदें हैं। यह दौरा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि शासन की सफलता के लिए ईश्वरीय शक्ति और जनता के विश्वास के समन्वय की एक कोशिश भी थी। मुख्यमंत्री ने मंदिर के गर्भगृह में जाकर पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और विकास के लिए संकल्प लिया।

सारण में प्रशासनिक धमक: जिलाधिकारी ने किया स्वागत

​मुख्यमंत्री का काफिला जैसे ही सारण जिले की धरती पर पहुँचा, प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रोटोकॉल के तहत उनकी अगवानी की। हरिहरनाथ मंदिर परिसर के समीप जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने पुष्पगुच्छ भेंट कर मुख्यमंत्री का औपचारिक स्वागत किया। इस दौरान सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे और पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील नजर आया। स्वागत की इस प्रक्रिया में औपचारिकता से ज्यादा एक आत्मीयता दिखाई दी, जहाँ जिलाधिकारी ने मुख्यमंत्री को जिले की वर्तमान स्थिति और मंदिर की व्यवस्थाओं के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी।

​स्वागत के तुरंत बाद, मुख्यमंत्री ने गार्ड ऑफ ऑनर स्वीकार किया। बिहार पुलिस के जवानों ने मुख्यमंत्री को सलामी दी, जो उनके प्रशासनिक अधिकार और राज्य के सर्वोच्च कार्यकारी पद की गरिमा का प्रतीक था। सम्राट चौधरी ने गम्भीरता के साथ सलामी का निरीक्षण किया और वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों को अपनी कार्यशैली का संकेत दिया। इस औपचारिक प्रक्रिया के बाद वे सीधे मंदिर की ओर बढ़े, जहाँ पहले से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पार्टी कार्यकर्ताओं की भीड़ उनकी एक झलक पाने के लिए बेताब थी।

आध्यात्मिक संगम: सपरिवार बाबा हरिहरनाथ की आराधना

​बाबा हरिहरनाथ मंदिर का ऐतिहासिक महत्व भगवान विष्णु और भगवान शिव के एकाकार रूप से जुड़ा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सपरिवार मंदिर के मुख्य द्वार पर प्रवेश किया। उनके साथ परिवार के सदस्यों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि वे अपनी राजनैतिक व्यस्तताओं के बीच पारिवारिक और सांस्कृतिक मूल्यों को कितनी प्राथमिकता देते हैं। मंदिर के मुख्य पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मुख्यमंत्री का स्वागत किया और उन्हें गर्भगृह तक ले गए।

​पवित्र शिवलिंग और भगवान विष्णु की संयुक्त प्रतिमा के सम्मुख बैठकर मुख्यमंत्री ने विशेष रुद्राभिषेक और पूजा की। लगभग आधे घंटे तक चली इस पूजा के दौरान मुख्यमंत्री पूरी तरह आध्यात्मिक मुद्रा में नजर आए। उन्होंने बाबा हरिहरनाथ से बिहार की 13 करोड़ जनता की खुशहाली और प्रदेश को ‘विकसित बिहार’ बनाने की शक्ति मांगी। पूजा संपन्न होने के बाद पुजारियों ने उन्हें अंगवस्त्र और प्रसाद भेंट किया। मंदिर प्रशासन की ओर से मुख्यमंत्री को मंदिर के इतिहास और पौराणिक महत्व से जुड़ी जानकारी भी साझा की गई।

जनता के बीच ‘सम्राट’: सहजता और संवाद का संगम

​मंदिर से बाहर निकलते ही माहौल पूरी तरह जन-संवाद में बदल गया। मुख्यमंत्री ने सुरक्षा घेरे के बावजूद आम जनता और श्रद्धालुओं की ओर हाथ हिलाकर उनका अभिवादन स्वीकार किया। “सम्राट चौधरी जिंदाबाद” के नारों से पूरा मंदिर परिसर गूँज उठा। मुख्यमंत्री ने अपनी सहजता का परिचय देते हुए कई बुजुर्गों और युवाओं के पास जाकर उनसे हाथ मिलाया और उनकी खैरियत पूछी। यह दृश्य यह बताने के लिए काफी था कि सम्राट चौधरी अपनी जड़ों से जुड़े हुए नेता हैं और वे सत्ता के गलियारों में रहकर भी जनता की धड़कनों को महसूस करना चाहते हैं।

​सारण की जनता के लिए यह गौरव का क्षण था कि उनका मुख्यमंत्री सीधे उनके बीच खड़ा है। सम्राट चौधरी ने वहां मौजूद कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात की और उन्हें निर्देश दिया कि वे सरकार की लोक-कल्याणकारी योजनाओं को हर दरवाजे तक पहुँचाएं। उन्होंने कहा कि जनता का प्यार ही उनकी असली ताकत है और वे इस भरोसे को कभी टूटने नहीं देंगे। जन-अभिवादन की इस प्रक्रिया ने यह संदेश दिया कि नई सरकार केवल सचिवालय तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वह गांवों और कस्बों की गलियों तक अपनी पहुँच बनाएगी।

सारण और सोनपुर के विकास पर जोर

​पूजा-अर्चना के बाद पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री ने सारण जिले और विशेष रूप से सोनपुर के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि हरिहरनाथ मंदिर और सोनपुर मेला न केवल बिहार की, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत है। सरकार का लक्ष्य यहाँ की बुनियादी सुविधाओं को विश्वस्तरीय बनाना है ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

​जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव को निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदिर के आसपास की साफ-सफाई और बुनियादी ढांचे में और सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने सोनपुर मेले के ऐतिहासिक महत्व को पुनर्जीवित करने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने की बात कही। मुख्यमंत्री का यह विजन दर्शाता है कि वे विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक जड़ों को सींचने में भी विश्वास रखते हैं। सारण के जनप्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री को क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं से अवगत कराया, जिस पर उन्होंने सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

सुशासन और संकल्प की नई शुरुआत

​सम्राट चौधरी का हरिहरनाथ मंदिर दौरा बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। सत्ता परिवर्तन के बाद यह उनकी पहली बड़ी आध्यात्मिक यात्रा थी, जिसने यह स्पष्ट कर दिया कि वे परंपरा और आधुनिकता के संतुलन के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं। सपरिवार पूजा करना उनके उस पक्ष को उजागर करता है जहाँ वे एक जिम्मेदार मुखिया के रूप में समाज को एकजुट करने का संदेश देते हैं।

​प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी यह दौरा महत्वपूर्ण रहा। जिलाधिकारी और अन्य वरीय अधिकारियों के साथ उनकी बातचीत ने जिले के प्रशासनिक तंत्र को सक्रिय कर दिया है। गार्ड ऑफ ऑनर लेना और फिर जनता के बीच जाकर उनका अभिवादन स्वीकार करना, एक सशक्त और सुलभ नेतृत्व की पहचान है। सारण की धरती से उठा यह जयघोष अब पूरे बिहार में शासन की नई ऊर्जा का संचार करेगा।

निष्कर्ष: आस्था और कर्तव्य का मिलन

​17 अप्रैल की यह दोपहर सोनपुर के इतिहास में एक और महत्वपूर्ण दिन के रूप में दर्ज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बाबा हरिहरनाथ की शरण में पहुँचकर न केवल अपनी व्यक्तिगत आस्था प्रकट की, बल्कि पूरे बिहार के लिए एक उज्ज्वल भविष्य की कामना की। वैभव श्रीवास्तव के नेतृत्व में जिला प्रशासन ने इस दौरे को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जनता का अपार उत्साह यह बताता है कि लोग अब सम्राट चौधरी की कार्यशैली और उनके निर्णयों को धरातल पर देखने के लिए उत्सुक हैं। बाबा हरिहरनाथ का आशीर्वाद लेकर लौटे मुख्यमंत्री अब प्रदेश के विकास के एजेंडे को और अधिक रफ़्तार देंगे, ऐसी जन-आकांक्षा है।

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