
पटना: बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह ने राज्य सरकार और जांच एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आनंद किशोर को इस पूरे मामले का “असली किंगपिन” और “सबसे बड़ा माफिया” बताते हुए दावा किया कि हाल में दाखिल चार्जशीट में बड़े अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों को जानबूझकर बचाया गया है।
‘निलंबित IAS का चार्जशीट में नाम क्यों नहीं?’
सुधाकर सिंह ने सवाल उठाया कि यदि दो आईएएस अधिकारियों योगेश सागर और अभिलाषा शर्मा को भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित किया गया था, तो फिर चार्जशीट में उनके नाम क्यों नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि यदि अधिकारी दोषी नहीं थे तो निलंबन क्यों किया गया, और यदि दोषी थे तो चार्जशीट से उनके नाम गायब क्यों हैं।
आनंद किशोर को बताया ‘मुख्य किंगपिन’
सांसद ने आरोप लगाया कि वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आनंद किशोर पूरे टेंडर नेटवर्क के सबसे अहम व्यक्ति हैं।
उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों ने उनसे पूछताछ तक नहीं की, जबकि वे फरार भी नहीं हैं। उनके अनुसार, यदि निष्पक्ष जांच हो तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।
पोस्टिंग में पैसों के लेन-देन का आरोप
सुधाकर सिंह ने दावा किया कि अधिकारियों की मनचाही पोस्टिंग के लिए लाखों रुपये की वसूली की गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि वित्त विभाग में नियुक्तियों और तबादलों के पीछे भी बड़े स्तर पर आर्थिक लेन-देन हुआ और इस पूरे सिस्टम में प्रभावशाली अधिकारियों की भूमिका रही।
‘आरोपियों को मिल रही है प्राइम पोस्टिंग’
आरजेडी सांसद ने आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों के खिलाफ जांच होनी चाहिए, उन्हें सरकार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दे रही है।
उन्होंने कहा कि यदि आरोपी अधिकारियों को संरक्षण मिलता रहेगा तो भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई पर जनता का भरोसा कमजोर होगा।
नीतीश कुमार पर भी उठाए सवाल
सुधाकर सिंह ने चारा घोटाले का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि उस मामले में सर्विस एक्सटेंशन के आधार पर राजनीतिक जवाबदेही तय की गई थी, तो टेंडर घोटाले के संदर्भ में भी पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सवाल पूछे जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और किसी भी व्यक्ति को जांच से ऊपर नहीं माना जाना चाहिए।
सरकार की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार
सुधाकर सिंह के इन आरोपों पर राज्य सरकार या संबंधित अधिकारियों की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में टेंडर घोटाले को लेकर बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है।


