
तपेदिक यानी टीबी जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और आम लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने के उद्देश्य से पूर्व रेलवे के मालदा मंडल ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। सोमवार को व्यापक टीबी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें यात्रियों, स्थानीय नागरिकों और रेलवे कर्मचारियों को तपेदिक की पहचान, रोकथाम और उपचार से जुड़ी अहम जानकारियां दी गईं। यह कार्यक्रम भारत सरकार के राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) और “टीबी मुक्त भारत” अभियान के तहत आयोजित किया गया।
यह अभियान 100 दिवसीय विशेष जनजागरूकता कार्यक्रम का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य देशभर में तपेदिक के प्रति लोगों की समझ बढ़ाना और समय पर जांच व उपचार को प्रोत्साहित करना है। रेलवे जैसे व्यस्त सार्वजनिक स्थलों पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाने का मुख्य उद्देश्य बड़ी संख्या में लोगों तक स्वास्थ्य संबंधी संदेश पहुंचाना है, ताकि बीमारी को शुरुआती स्तर पर पहचाना जा सके और इसके प्रसार को रोका जा सके।
मालदा मंडल द्वारा आयोजित इस विशेष कार्यक्रम का संचालन मंडल रेल प्रबंधक मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम की निगरानी मंडल रेलवे अस्पताल, मालदा की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुपा घोष ने की, जबकि अपर मंडल चिकित्सा अधिकारी डॉ. अथिरा प्रतापन के नेतृत्व में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने इसकी रूपरेखा तैयार की। इस आयोजन में स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ भारत स्काउट्स एवं गाइड्स, मालदा की टीम और रेलवे अस्पताल के कर्मचारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के दौरान स्टेशन परिसर में कई गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनका उद्देश्य यात्रियों और आम नागरिकों को टीबी के बारे में जागरूक करना था। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को बताया कि तपेदिक एक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है। हालांकि यदि समय पर इसकी पहचान हो जाए और पूरा उपचार लिया जाए तो यह बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकती है।
अभियान में सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र भारत स्काउट्स एवं गाइड्स, मालदा द्वारा प्रस्तुत प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक रहा। इस नाटक के माध्यम से कलाकारों ने बेहद सरल और प्रभावशाली तरीके से लोगों को समझाया कि टीबी के लक्षण क्या होते हैं, संक्रमण कैसे फैलता है और किन सावधानियों से इससे बचा जा सकता है। यात्रियों ने बड़ी संख्या में रुककर इस प्रस्तुति को देखा और स्वास्थ्य संबंधी संदेशों को गंभीरता से सुना।
नुक्कड़ नाटक में लगातार खांसी, वजन कम होना, बुखार, रात में पसीना आना और कमजोरी जैसे लक्षणों को प्रमुख संकेत के रूप में दर्शाया गया। कलाकारों ने यह भी बताया कि यदि किसी व्यक्ति में दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी बनी रहती है तो उसे तुरंत जांच करानी चाहिए। नाटक के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि बीमारी को छिपाने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना सबसे जरूरी कदम है।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू टीबी से जुड़े सामाजिक कलंक और भ्रांतियों को दूर करना भी था। लंबे समय से समाज में तपेदिक को लेकर कई गलत धारणाएं मौजूद रही हैं, जिनके कारण कई मरीज समय पर जांच और उपचार नहीं करा पाते। जागरूकता कार्यक्रम में यह स्पष्ट किया गया कि टीबी कोई लाइलाज बीमारी नहीं है और आधुनिक चिकित्सा पद्धति के जरिए इसका सफल उपचार संभव है।
विशेषज्ञों ने लोगों को बताया कि सरकार द्वारा टीबी की जांच और दवाइयां मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके बावजूद कई लोग जागरूकता की कमी, सामाजिक संकोच या गलत जानकारी के कारण उपचार में देरी कर देते हैं। यही देरी बीमारी को गंभीर बना सकती है। इसलिए लोगों को प्रोत्साहित किया गया कि वे बिना झिझक स्वास्थ्य केंद्रों या अस्पतालों से संपर्क करें।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि टीबी का उपचार बीच में छोड़ना बेहद खतरनाक हो सकता है। अधूरा इलाज न केवल मरीज के लिए नुकसानदायक है बल्कि इससे दवा प्रतिरोधी टीबी का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए उपचार की पूरी अवधि तक डॉक्टर की सलाह का पालन करना अनिवार्य है।
रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थान पर अभियान चलाने का महत्व भी कार्यक्रम में रेखांकित किया गया। प्रतिदिन हजारों यात्रियों की आवाजाही वाले स्टेशन पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर एक बड़े वर्ग तक स्वास्थ्य संदेश पहुंचाया जा सकता है। इससे दूरदराज के इलाकों से आने वाले लोगों को भी सही जानकारी मिलती है और स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होती है।
कार्यक्रम के दौरान रेलवे अस्पताल के कर्मचारियों ने यात्रियों को टीबी जांच प्रक्रिया, उपचार सुविधाओं और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में जानकारी दी। कई लोगों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों से सीधे सवाल पूछे और बीमारी से संबंधित अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त किया। इससे अभियान और अधिक प्रभावी साबित हुआ।
पूर्व रेलवे के मालदा मंडल ने इस आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य केवल अस्पतालों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी से ही मजबूत हो सकता है। टीबी उन्मूलन जैसे राष्ट्रीय लक्ष्य तभी पूरे होंगे जब लोग जागरूक होंगे और बीमारी को लेकर खुलकर बात करेंगे।
भारत सरकार का “टीबी मुक्त भारत” अभियान वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ शुरू किया गया था, और इसके तहत विभिन्न संस्थानों द्वारा लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। मालदा मंडल का यह प्रयास इसी राष्ट्रीय संकल्प को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस कार्यक्रम ने एक बार फिर साबित किया कि जागरूकता ही किसी भी बीमारी से लड़ने का सबसे प्रभावी हथियार है। सही जानकारी, समय पर जांच और नियमित उपचार से तपेदिक जैसी गंभीर बीमारी पर पूरी तरह नियंत्रण पाया जा सकता है। मालदा टाउन स्टेशन पर आयोजित यह अभियान न केवल यात्रियों के लिए उपयोगी साबित हुआ, बल्कि “टीबी मुक्त भारत” के सपने को साकार करने की दिशा में एक प्रेरक पहल भी बनकर सामने आया।


