
पटना, 8 अप्रैल 2026: बिहार की राजधानी पटना से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक मर्यादाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक सास ने अपनी बहू पर कई पुरुषों के साथ अवैध संबंध होने का आरोप लगाते हुए बिहार राज्य महिला आयोग का दरवाजा खटखटाया है। मामले में डिजिटल सबूत भी पेश किए गए हैं, जिसके बाद आयोग ने संज्ञान लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है।
शादी के कुछ साल बाद शुरू हुआ विवाद
पीड़ित परिवार के अनुसार, वर्ष 2016 में उनके बेटे ने पड़ोस की ही एक युवती से प्रेम विवाह किया था। शुरुआती वर्षों में दंपति का जीवन सामान्य और खुशहाल रहा, लेकिन 2018 के बाद रिश्तों में दरार आने लगी।
सास का आरोप है कि उसी दौरान बहू को घर आए एक मेहमान के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखा गया था। हालांकि उस समय परिवार और सामाजिक दबाव के चलते मामले को दबा दिया गया और बहू के माफीनामे के बाद बेटे ने उसे एक और मौका दिया।
अलग रहने के बाद भी नहीं सुधरी स्थिति
घटना के बाद पति-पत्नी समाज के दबाव से बचने के लिए अलग रहने लगे। कुछ समय तक सब कुछ सामान्य प्रतीत हुआ, लेकिन वर्ष 2024 में जब दोनों दोबारा परिवार के साथ रहने लगे, तो विवाद फिर से बढ़ गया।
इसी दौरान बहू ने एक स्कूल में शिक्षिका के रूप में काम करना शुरू किया, लेकिन परिवार के अनुसार उसका व्यवहार धीरे-धीरे संदिग्ध होता चला गया।
मोबाइल चैट से हुआ खुलासा
परिवार का आरोप है कि बहू अक्सर छत या बाथरूम में जाकर घंटों फोन पर बात करती थी। पति को शक होने पर जब मोबाइल की जांच की गई, तो उसमें दो अलग-अलग पुरुषों के साथ आपत्तिजनक चैट और निजी बातचीत मिली।
इन कथित चैट्स के स्क्रीनशॉट सास ने सबूत के तौर पर महिला आयोग को सौंप दिए हैं।
विरोध करने पर मिली कानूनी कार्रवाई की धमकी
सास का कहना है कि जब बेटे ने इस बारे में पत्नी से सवाल किया, तो उसने उल्टा पूरे परिवार को दहेज उत्पीड़न के झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी।
परिवार का दावा है कि इस मानसिक दबाव और तनाव के कारण बेटा गंभीर अवसाद (डिप्रेशन) में चला गया है और उसका इलाज चल रहा है।
महिला आयोग ने लिया संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार राज्य महिला आयोग ने इस पर संज्ञान लिया है। आयोग की सदस्य शीला टुड्डू के अनुसार, प्रस्तुत डिजिटल साक्ष्यों को रिकॉर्ड में लिया गया है और संबंधित पक्ष को समन जारी किया गया है।
इस मामले की अगली सुनवाई 8 मई को तय की गई है, जिसमें दोनों पक्षों को उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
कई स्तरों पर उठे सवाल
यह मामला न केवल एक परिवार के अंदरूनी विवाद को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि निजी रिश्तों के विवाद अब कानूनी और संस्थागत स्तर तक पहुंच रहे हैं।
साथ ही, यह केस इस बात पर भी बहस छेड़ता है कि डिजिटल सबूतों की भूमिका, पारिवारिक विवादों में कानून का इस्तेमाल और दुरुपयोग—इन सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।


