कैथी लिपि के अभिलेखों का होगा देवनागरी में अनुवाद, बिहार सरकार और भाषिणी के बीच हुआ समझौता

पटना, 04 जुलाई 2025।बिहार की ऐतिहासिक विरासत को तकनीक के माध्यम से आम जनता के लिए सुलभ बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। राज्य के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग और डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन (डीआईबीडी) के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसके तहत कैथी लिपि में लिखे गए अभिलेखों का अनुवाद और लिप्यंतरण देवनागरी में किया जाएगा।

यह समझौता डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन के सीईओ अमिताभ नाग और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह के बीच हस्ताक्षरित किया गया।

मुख्य सचिव ने बताया सराहनीय पहल

मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाएगा, बल्कि तकनीक के माध्यम से भाषा की बाधाओं को भी समाप्त करेगा। उन्होंने पाली लिपि के आलेखों को भी हिन्दी और अंग्रेज़ी में अनुवादित करने का सुझाव दिया और बिहार स्पेसिफिक हैकथॉन शुरू करने का भी निर्देश दिया।

पुराने अभिलेख होंगे डिजिटल और सुलभ

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने बताया कि विशेष सर्वेक्षण प्रक्रिया में बड़ी संख्या में अभिलेख कैथी लिपि में हैं जिन्हें पढ़ना चुनौतीपूर्ण है। इस तकनीकी सहयोग से इन दस्तावेजों को पढ़ना और समझना आसान होगा, जिससे भूमि सुधार व रिकॉर्ड प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी।

भाषा नहीं बनेगी बाधा: भाषिणी के सीईओ

डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन के सीईओ अमिताभ नाग ने कहा कि उनका लक्ष्य है कि भाषा किसी भी सेवा, सूचना या तकनीक तक पहुँच में बाधा न बने। यह परियोजना बिहार के ऐतिहासिक ज्ञान को डिजिटाइज़ और लोकतांत्रिक बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

तकनीकी कार्यशाला का भी हुआ आयोजन

कार्यक्रम के बाद राजस्व सर्वे प्रशिक्षण संस्थान में एक राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यशाला में भाषिणी के तकनीकी ढांचे को विभागीय प्रक्रियाओं में एकीकृत करने और कर्मचारियों के क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया गया।

उपस्थित रहे वरिष्ठ अधिकारी

इस अवसर पर सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव बी. राजेन्द्र, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की एसीएस हरजोत कौर बम्हरा, सीआईडी के एडीजी पारसनाथ, भूमि अभिलेख निदेशक जे. प्रियदर्शिनी सहित अनेक विभागों के सचिव, अधिकारी और डीआईबीडी के प्रतिनिधि मौजूद थे।


 

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