
पटना: बिहार की राजनीति में एक बार फिर कथित टेंडर घोटाले को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता एवं सांसद सुधाकर सिंह ने दावा किया है कि बिहार के शहरी विकास विभाग और नमामि गंगे परियोजनाओं में लगभग 30 हजार करोड़ रुपये का बड़ा घोटाला हुआ है।
मंगलवार को पटना में प्रेस वार्ता के दौरान सांसद ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय द्वारा पटना हाई कोर्ट में दाखिल 278 पन्नों के जवाबी हलफनामे में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में नौ वरिष्ठ IAS अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है।
“इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से खुला भ्रष्टाचार का नेटवर्क”
सुधाकर सिंह ने दावा किया कि IAS अधिकारी संजीव हंस की गिरफ्तारी के बाद ED की जांच में कथित बिचौलिए रिशु श्री के पास से कई इलेक्ट्रॉनिक सबूत और व्हाट्सएप चैट बरामद हुए। उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उन्होंने भ्रष्टाचार के बड़े नेटवर्क का आरोप लगाया।
आनंद किशोर पर लगाए गंभीर आरोप
RJD सांसद ने वरिष्ठ IAS अधिकारी आनंद किशोर को कथित सिंडिकेट का “गैंग लीडर” बताते हुए कहा कि ED के पास उनके खिलाफ भी पर्याप्त दस्तावेज मौजूद हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जांच एजेंसियों के पास ऐसे दस्तावेज थे तो उन्हें महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी क्यों दी गई।
नमामि गंगे योजना पर भी सवाल
सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि गंगा सफाई के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी हजारों करोड़ रुपये का सही उपयोग नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि भारी राशि खर्च होने के बावजूद गंगा की स्थिति में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं देता।
सरकार पर लगाया संरक्षण का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सांसद ने बिहार सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि छोटे अधिकारियों पर कार्रवाई कर बड़े अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने हाल में हुए कुछ प्रशासनिक निलंबनों को “दिखावटी कार्रवाई” बताया।
अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं
सांसद द्वारा लगाए गए आरोपों पर संबंधित अधिकारियों या बिहार सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह बिहार के हालिया वर्षों के सबसे बड़े प्रशासनिक और वित्तीय घोटालों में से एक माना जा सकता है। वहीं दूसरी ओर आरोपों की जांच और संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।


