
पटना/राजगीर, मई 2026। बिहार के प्रशासनिक ढांचे में नीतिगत निर्णयों और विकास योजनाओं की धरातलीय निगरानी को गति देने के क्रम में एक बड़ा नीतिगत संज्ञान लिया गया है। बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने राजगीर की ऐतिहासिक पहाड़ियों की गोद में निर्मित अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त नालंदा विश्वविद्यालय के नवनिर्मित अत्याधुनिक परिसर का विस्तृत और सघन भ्रमण किया। मुख्य सचिव के इस उच्चस्तरीय दौरे का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय के भीतर संचालित हो रही अंतरराष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक गतिविधियों, वैश्विक स्तर के बुनियादी ढांचे और परिसर के भीतर क्रियान्वित किए गए अनूठे ‘नेट जीरो’ (Net Zero) पर्यावरण अनुकूल मॉडल की वास्तविक प्रगति और तकनीकी विन्यासों का प्रत्यक्ष आकलन करना था। इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रम के दौरान नालंदा के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक सहित राज्य प्रशासन के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी सलाहकार भी कड़ाई के साथ मौके पर उपस्थित रहे, जिन्होंने मुख्य सचिव को सुरक्षा और अवसंरचनात्मक विकास के विभिन्न विलेखों से अवगत कराया।
वरिष्ठ संकायों द्वारा भव्य अगवानी और शैक्षणिक ढांचे का विस्तृत प्रस्तुतीकरण
विश्वविद्यालय परिसर के मुख्य द्वार पर आगमन के उपरांत मुख्य सचिव का स्वागत संस्थान के वरिष्ठ संकाय सदस्यों, कुलसचिव और प्रशासनिक कप्तानों द्वारा पूरी गरिमा और अकादमिक परंपराओं के अनुसार किया गया। इसके तुरंत बाद प्रशासनिक भवन के मुख्य विमर्श कक्ष में संकाय सदस्यों द्वारा एक विस्तृत डिजिटल प्रेजेंटेशन (प्रस्तुतीकरण) के माध्यम से मुख्य सचिव को संस्थान के प्राचीन गौरवशाली इतिहास, इसकी ऐतिहासिक कड़ियों और वर्तमान समय में संचालित हो रहे नए शैक्षणिक ढांचे से विस्तार से परिचित कराया गया।
मुख्य सचिव को तकनीकी विलेखों के माध्यम से बताया गया कि नालंदा विश्वविद्यालय वर्तमान समय में ज्ञान के वैश्विक आदान-प्रदान को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विभिन्न अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्कूलों का सफल संचालन कर रहा है। इनमें मुख्य रूप से ऐतिहासिक अध्ययन स्कूल, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण अध्ययन स्कूल, और बौद्ध अध्ययन, दर्शन व तुलनात्मक धर्म जैसे अत्यंत प्रतिष्ठित और वैश्विक महत्व के संकाय शामिल हैं। इन विभावों में देश-विदेश के सैकड़ों शोधार्थी और अंतरराष्ट्रीय छात्र वर्तमान समय में उच्च स्तरीय अनुसंधान और ज्ञानार्जन की विधा से जुड़े हुए हैं, जो बिहार की इस पावन धरती को दोबारा वैश्विक ज्ञान का मुख्य केंद्र बना रहे हैं।
प्राचीन वास्तुकला और आधुनिक तकनीक के संगम का भौतिक निरीक्षण
प्रस्तुतीकरण के उपरांत मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने विश्वविद्यालय के विभिन्न परिसरों और नवनिर्मित विशाल भवनों का भौतिक निरीक्षण शुरू किया। उन्होंने संस्थान के भीतर बने अत्याधुनिक और पूर्णतः डिजिटल पुस्तकालय (लाइब्रेरी) का अवलोकन किया, जहां लाखों प्राचीन विलेखों और आधुनिक शोध पत्रों को डिजिटल प्रणालियों के तहत संधारित किया गया है। इसके बाद उन्होंने नवनिर्मित सुषमा स्वराज ऑडिटोरियम, आधुनिक योग परिसर और विभिन्न शैक्षणिक ब्लॉकों की आंतरिक बनावट और नागरिक सुविधाओं की कड़ाई से जांच की।
निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव ने इस बात की विशेष सराहना की कि नए परिसर के निर्माण में प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक स्थापत्य कला और आधुनिक काल की सर्वोत्कृष्ट तकनीकों का एक अद्भुत और विस्मयकारी संगम धरातल पर उतारा गया है। भवनों की दीवारें और संरेखण जहां अतीत की गौरव गाथा को दर्शाते हैं, वहीं उनके भीतर की प्रणालियां पूरी तरह से हाई-टेक और भविष्योन्मुखी हैं, जो शिक्षा के लिए एक अत्यंत शांत और प्रेरक वातावरण का निर्माण करती हैं।
6.5 मेगावाट का सौर फार्म और पर्यावरण अनुकूल हरित विन्यास
इस पूरे भ्रमण का सबसे तकनीकी और रणनीतिक पहलू विश्वविद्यालय के आत्मनिर्भर ऊर्जा मॉडल की समीक्षा से जुड़ा हुआ था। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने परिसर के भीतर स्थापित किए गए 6.5 मेगावाट की क्षमता वाले विशाल सौर ऊर्जा फार्म (सोलर प्लांट), अत्याधुनिक बायोगैस संयंत्र और उन्नत जल संचयन (वाटर हार्वेस्टिंग) प्रणालियों के भौतिक बुनियादी ढांचे को देखने में विशेष रुचि दिखाई।
संस्थान के इंजीनियरों ने स्पष्ट किया कि यह पूरा परिसर अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भर नहीं है, बल्कि सौर ऊर्जा और जैविक कचरे के माध्यम से अपनी शत-प्रतिशत बिजली और ईंधन खुद पैदा करता है। साथ ही, बारिश के पानी की एक-एक बूंद को संचित करने के लिए विशाल जलाशयों का नेटवर्क बनाया गया है। मुख्य सचिव ने इस पूर्णतः कार्बन मुक्त और आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय का यह ‘नेट जीरो’ कार्बन फुटप्रिंट मॉडल संपूर्ण बिहार राज्य के अन्य सभी सरकारी भवनों, तकनीकी शिक्षण संस्थानों और औद्योगिक परिसरों के लिए एक मार्गदर्शक और प्रेरणा का मुख्य स्रोत बनना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय ज्ञान के केंद्र के रूप में पुनर्स्थापित करने का संकल्प
परिसर के निरीक्षण और तकनीकी कड़ियों की समीक्षा पूरी होने के उपरांत मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक विमर्श कक्ष में उपस्थित सभी जिला स्तरीय अधिकारियों, कुलपतियों और संकाय सदस्यों को संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने नालंदा की मिट्टी के ऐतिहासिक महत्व और वैश्विक साख को पूरी प्रगाढ़ता के साथ रेखांकित किया।
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत का आधिकारिक वक्तव्य:
“नालंदा का इतिहास केवल बिहार की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्राचीन काल से ही पूरे विश्व के लिए ज्ञान, दर्शन और चेतना का एक अप्रतिम प्रतीक रहा है। इस नवनिर्मित और भव्य परिसर को धरातल पर देखना मेरे लिए एक अत्यंत सुखद और गौरवशाली अनुभव है, जो अपनी समृद्ध प्राचीन विरासत को आधुनिक नवाचारों के साथ पूरी कड़ाई से संजोए हुए है। बिहार सरकार इस विश्वविद्यालय के सर्वांगीण विकास, इसकी सुरक्षात्मक कड़ियों की मजबूती और इसे पुनः अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान के सर्वोच्च केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए हर संभव प्रशासनिक और विधिक सहयोग प्रदान करने हेतु पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”
आस-पास के प्रक्षेत्रों में चल रहे बुनियादी ढांचागत कार्यों की समीक्षा
इस यात्रा के अंतिम चरण में नालंदा के जिलाधिकारी ने मुख्य सचिव को एक विस्तृत प्रगति रिपोर्ट सौंपते हुए विश्वविद्यालय परिसर के बाहरी मुहानों और आस-पास के ग्रामीण व शहरी प्रक्षेत्रों में जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न संपर्क मार्ग विकास कार्यों, सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं और नागरिक सुरक्षा अवसंरचनाओं के बारे में बिंदुवार जानकारी दी। जिलाधिकारी ने बताया कि विश्वविद्यालय में आने वाले विदेशी अतिथियों, राजदूतों और छात्रों की सुगमता के लिए राजगीर के पूरे यातायात प्रबंधन को नया स्वरूप दिया जा रहा है और सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा रखने के लिए विशेष पुलिस गश्ती विन्यासों को संधारित किया गया है।
मुख्य सचिव ने जिलाधिकारी को कड़े निर्देश जारी किए कि विश्वविद्यालय परिसर की बाहरी सीमाओं पर किसी भी प्रकार के अवैध अतिक्रमण, अनियोजित निर्माण या पर्यावरणीय प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों को पूरी तरह से ब्लॉक रखा जाए। अंत में, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने विश्वविद्यालय के उज्ज्वल भविष्य और वैश्विक साख की कामना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह महान संस्थान आने वाले समय में दक्षिण-पूर्व एशिया (आसियान देशों) और विश्व के अन्य विकसित राष्ट्रों के साथ भारत के शैक्षणिक, सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को एक नई और अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करने का मुख्य जरिया साबित होगा।


