धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राहुल गांधी का सरकार पर हमला, बोले— “यह शुरुआत है, अभी दो मांगें बाकी हैं”

नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस्तीफे को देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम बताते हुए कहा कि छात्रों की दो प्रमुख मांगें अब भी अधूरी हैं। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों से माफी मांगने और आंदोलन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।

“यह छात्रों के संघर्ष की जीत”

वीडियो संदेश जारी करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उन छात्रों और युवाओं की लोकतांत्रिक लड़ाई का परिणाम है, जिन्होंने अपने भविष्य, संविधान और शिक्षा व्यवस्था की रक्षा के लिए संघर्ष किया।

उन्होंने कहा,

“देशभर के छात्रों और युवाओं को बधाई। आपने लोकतंत्र और संविधान के दायरे में रहकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई। यह शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में पहला, लेकिन बहुत बड़ा कदम है।”

राहुल गांधी की दो प्रमुख मांगें

राहुल गांधी ने कहा कि आंदोलन की दो महत्वपूर्ण मांगें अब भी बाकी हैं।

उन्होंने मांग की कि:

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
  • आंदोलन के दौरान कथित बल प्रयोग और 20 जुलाई के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुई कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों पर कार्रवाई की योजना बनाने और उसे लागू करने वाले लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

किसानों, मजदूरों और युवाओं से भी अपील

राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की यह लड़ाई पूरे समाज के लिए प्रेरणा है। उन्होंने किसानों, मजदूरों, गरीबों और अन्य नागरिकों से भी संविधान के दायरे में रहकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील की।

उन्होंने अपने संदेश का समापन इन शब्दों के साथ किया,

“डरो मत। अपने अधिकारों और सम्मान के लिए लोकतांत्रिक तरीके से खड़ा होना ही सबसे बड़ा साहस है।”

पवन खेड़ा बोले— “असली लड़ाई अभी बाकी है”

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे छात्रों, युवाओं और बेरोजगारों की जीत बताया।

उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान केवल एक प्रतीक थे, जबकि वास्तविक संघर्ष उस व्यवस्था के खिलाफ है, जो अभी भी कायम है।

खेड़ा ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति, विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों, पेपर लीक की घटनाओं और छात्र आंदोलनों के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई में उसी सोच की झलक दिखाई देती है। उनके अनुसार, युवाओं को विरोधी की तरह देखना गलत है और इस व्यवस्था में बदलाव के लिए संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। एक ओर कांग्रेस इसे छात्र आंदोलन की बड़ी जीत बता रही है, तो दूसरी ओर सत्तारूढ़ दल इसे जवाबदेही और लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा बता रहा है।

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