सोशल मीडिया पोस्ट से राष्ट्रीय आंदोलन तक: कैसे बनी CJP और कैसे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक पहुंची लड़ाई?

नई दिल्ली: भारत की राजनीति में आमतौर पर नए राजनीतिक दलों या संगठनों की शुरुआत जमीनी आंदोलनों, जनसभाओं या लंबे सामाजिक संघर्षों से होती रही है। लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की कहानी इससे अलग बताई जा रही है। संगठन की शुरुआत 16 मई 2026 को सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक व्यंग्यात्मक पोस्ट से हुई और कुछ ही महीनों में यह NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद से जुड़े देशव्यापी छात्र आंदोलन का प्रमुख चेहरा बन गया।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद शुरू हुई बहस

बताया जाता है कि 15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा शुरू हुई। टिप्पणी को लेकर विवाद बढ़ने पर मुख्य न्यायाधीश ने बाद में स्पष्ट किया कि उनकी बात का संदर्भ गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया और उनका उद्देश्य बेरोजगार युवाओं का अपमान करना नहीं था।

16 मई: सोशल मीडिया पर जन्मी CJP

विवाद के अगले दिन 16 मई को अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक गूगल फॉर्म साझा कर प्रतीकात्मक रूप से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़ने का आह्वान किया। शुरुआत में यह एक व्यंग्यात्मक डिजिटल अभियान था, लेकिन देखते ही देखते हजारों युवाओं ने इसमें रुचि दिखाई और यह अभियान तेजी से फैल गया।

NEET विवाद ने बदल दी आंदोलन की दिशा

NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद CJP ने अपना फोकस शिक्षा व्यवस्था पर केंद्रित कर दिया। संगठन ने प्रमुख मांगें रखीं—

  • NEET पेपर लीक की निष्पक्ष जांच।
  • परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार।
  • कथित अनियमितताओं के लिए जवाबदेही तय करना।
  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग।

6 जून: जंतर-मंतर से शुरू हुआ धरना

6 जून 2026 को CJP ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहला बड़ा ऑफलाइन प्रदर्शन आयोजित किया और अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। धीरे-धीरे इसमें देशभर के छात्र, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग शामिल होने लगे।

सोनम वांगचुक के जुड़ने से बढ़ा आंदोलन

28 जून को पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक आंदोलन में शामिल हुए और छात्रों के समर्थन में भूख हड़ताल शुरू की। उनके जुड़ने के बाद आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक पहचान मिली और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग पर बहस तेज हो गई।

20 जुलाई: ‘चलो संसद’ मार्च और बढ़ा टकराव

20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के दौरान CJP ने ‘चलो संसद’ मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की खबरें सामने आईं। कई लोग घायल हुए और हिंसा से जुड़े मामलों में एफआईआर दर्ज की गई। इसी दौरान सरकार और CJP के बीच बातचीत का दौर भी शुरू हुआ।

भूख हड़ताल, वार्ता और इस्तीफा

आंदोलन के दौरान अभिजीत दीपके और बाद में सोनम वांगचुक ने भी भूख हड़ताल की। 24 जुलाई को वांगचुक ने सरकार से मिले आश्वासन के बाद अपना अनशन समाप्त किया। इसके अगले दिन 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

सरकार और CJP के बीच बनी सहमति, आंदोलन समाप्त

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार और CJP के बीच तीसरे दौर की वार्ता हुई। इसके बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP ने घोषणा की कि सरकार की ओर से प्रमुख मांगों पर सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद संगठन तत्काल प्रभाव से अपना आंदोलन समाप्त कर रहा है।

संगठन के अनुसार, सरकार ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के अलावा आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों पर राहत और अन्य मांगों पर भी सकारात्मक रुख अपनाया है। इसके साथ ही जंतर-मंतर पर कई दिनों से चल रहा आंदोलन औपचारिक रूप से समाप्त हो गया।

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