धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर BJP अध्यक्ष नितिन नबीन ने की तारीफ, बोले- निस्वार्थ सेवा का उदाहरण

नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने धर्मेंद्र प्रधान के योगदान की सराहना करते हुए उनके फैसले को सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और निस्वार्थ सेवा का उदाहरण बताया। वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे छात्रों के संघर्ष की बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि आंदोलन की दो प्रमुख मांगें अभी भी पूरी नहीं हुई हैं।

नितिन नबीन ने की धर्मेंद्र प्रधान की सराहना

बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में धर्मेंद्र प्रधान ने देश की शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण सुधार किए और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) सहित कई प्रमुख पहलों को प्रभावी ढंग से लागू करने में अहम भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा,

“व्यापक हितों को प्राथमिकता देते हुए उनका पद छोड़ने का निर्णय सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और निस्वार्थ सेवा के उच्चतम मानकों को दर्शाता है। भारतीय जनता पार्टी इस निर्णय में धर्मेंद्र प्रधान के साथ मजबूती से खड़ी है और उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं देती है।”

राहुल गांधी बोले— अभी दो मांगें बाकी

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया और देशभर के छात्रों तथा युवाओं को बधाई दी।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान के दायरे में रहकर छात्रों ने अपनी आवाज बुलंद की है। हालांकि, राहुल गांधी ने कहा कि आंदोलन की दो अहम मांगें अभी भी बाकी हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की कि:

  • छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए।
  • आंदोलन के दौरान हुई कथित हिंसा के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

धर्मेंद्र प्रधान का युवाओं के नाम संदेश

इस्तीफे के बाद जारी अपने पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि NEET-UG के घोषित परिणामों में गरीब और साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले कई मेधावी छात्रों ने सफलता हासिल की।

उन्होंने लिखा कि कुछ लोगों ने छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की, जिससे उन्हें गहरा दुख हुआ।

अपने संदेश में उन्होंने कहा,

“मुझे भारतीय लोकतंत्र की शक्ति पर अटूट विश्वास है। देश के युवा केवल भारत का भविष्य नहीं, बल्कि विकसित भारत के वाहक, निर्माता और भविष्य के शिल्पकार हैं।”

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जहां सत्ता पक्ष उनके योगदान को रेखांकित कर रहा है, वहीं विपक्ष इसे छात्र आंदोलन की उपलब्धि बताते हुए सरकार से शेष मांगों पर भी निर्णय लेने की मांग कर रहा है।

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