
पूर्णिया/मालदा/पटना। पूर्णिया के नवनिर्वाचित निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के लिए मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 का दिन चुनौतियों और संकटों से भरा रहा। एक ओर जहाँ वे पश्चिम बंगाल के मालदा में भीषण गर्मी के बीच चुनावी रण में पसीना बहा रहे थे, वहीं दूसरी ओर उनके शरीर ने इस तपिश के आगे घुटने टेक दिए। मालदा में चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें लू (Heatstroke) लग गई, जिसके कारण उनकी तबीयत अचानक काफी बिगड़ गई। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें पूर्णिया के लिए रवाना होना पड़ा। लेकिन संकट केवल शारीरिक स्तर तक सीमित नहीं रहा; जैसे ही वे अपनी अस्वस्थता से जूझ रहे थे, बिहार राज्य महिला आयोग ने उनके एक हालिया विवादित बयान पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी कर दिया। आयोग ने न केवल उनके बयान पर जवाब मांगा है, बल्कि उनकी लोकसभा सदस्यता की वैधता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। शारीरिक अस्वस्थता और कानूनी घेराबंदी के इस दोहरे वार ने पप्पू यादव की सियासी राह को फिलहाल काफी पेचीदा बना दिया है।
मालदा का चुनावी रण और ‘लू’ का प्रहार: जब बेड पर दिखे सांसद
पश्चिम बंगाल में इन दिनों चुनावी पारा अपने चरम पर है। मालदा का इलाका, जो अपनी गर्म जलवायु के लिए जाना जाता है, वहाँ मंगलवार को तापमान ने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए। इसी झुलसाने वाली गर्मी में पप्पू यादव अपनी पार्टी और समर्थित उम्मीदवारों के पक्ष में जनसभा करने पहुँचे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जनसभा के दौरान ही उन्हें बेचैनी और अत्यधिक पसीने की शिकायत हुई। मंच पर ही वे अस्वस्थ महसूस करने लगे, जिसके बाद आनन-फानन में उन्हें स्थानीय चिकित्सा केंद्र ले जाया गया।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने उनके समर्थकों की चिंता और बढ़ा दी है। वीडियो में पप्पू यादव एक बेड पर लेटे हुए नजर आ रहे हैं और उनके पास मौजूद सहयोगी उनके सिर पर पानी की धार डालकर और कपड़ों से हवा कर उनके शरीर के तापमान को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। चिकित्सकों ने बताया कि वे ‘हीट एग्जॉशन’ (Heat Exhaustion) और निर्जलीकरण (Dehydration) का शिकार हुए हैं। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उन्हें पूर्ण विश्राम की सलाह दी है। तबीयत में थोड़ा सुधार होते ही वे एम्बुलेंस के जरिए मालदा से अपने संसदीय क्षेत्र पूर्णिया के लिए रवाना हो गए। चुनाव प्रचार के व्यस्त समय में इस तरह अस्वस्थ होना उनके लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
महिला आयोग का ‘हंटर’: विवादित बयान पर 3 दिन का अल्टीमेटम
एक तरफ पप्पू यादव मालदा की गर्मी से लड़ रहे थे, तो दूसरी तरफ पटना में उनके खिलाफ कानूनी मोर्चा खुल गया। बिहार राज्य महिला आयोग ने महिलाओं के राजनैतिक करियर और उनके शोषण से संबंधित पप्पू यादव की विवादास्पद टिप्पणी का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने सांसद को नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर यह स्पष्ट करने को कहा है कि उन्होंने किस आधार पर ऐसी अपमानजनक टिप्पणी की।
नोटिस के मुख्य अंश इस प्रकार हैं:
- तथ्यात्मक स्पष्टीकरण: आयोग ने पूछा है कि पप्पू यादव ने किन साक्ष्यों के आधार पर यह दावा किया कि 90% महिलाओं को राजनीति में आगे बढ़ने के लिए ‘समझौते’ करने पड़ते हैं।
- मर्यादा का उल्लंघन: आयोग का मानना है कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले व्यक्ति द्वारा इस तरह के सामान्यीकरण वाले बयान न केवल महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाते हैं, बल्कि समाज में एक नकारात्मक और अविश्वासपूर्ण संदेश भी भेजते हैं।
- सदस्यता पर सवाल: सबसे गंभीर बात यह है कि आयोग ने अपनी अनुशंसा में यह भी शामिल किया है कि इस तरह की संकुचित और अपमानजनक सोच रखने वाले व्यक्ति की लोकसभा सदस्यता समाप्त करने पर विचार क्यों न किया जाए। इसके लिए आयोग लोकसभा अध्यक्ष को भी अपनी रिपोर्ट भेजने की तैयारी में है।
क्या था वह बयान जिसने खड़ा किया बवंडर?
पप्पू यादव ने हाल ही में राजनीति में महिलाओं की स्थिति और राजनेताओं के व्यक्तिगत आचरण पर एक बहुत बड़ा और विवादास्पद आरोप लगाया था। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण) पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि भारतीय राजनीति में महिलाओं के लिए बिना किसी प्रकार के ‘समझौते’ के आगे बढ़ना नामुमकिन जैसा हो गया है। उन्होंने दावा किया था कि अधिकांश महिलाओं का राजनैतिक करियर किसी न किसी प्रभावशाली नेता के प्रभाव और उनके साथ किए गए समझौतों से शुरू होता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि समाज में भले ही महिलाओं को ‘देवी’ कहा जाए, लेकिन राजनैतिक दलों के भीतर हकीकत इसके बिल्कुल उलट और डरावनी है। पप्पू यादव ने नेताओं के मोबाइल फोन की जांच तक की मांग की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उनमें महिलाओं के शोषण से जुड़ी अश्लील सामग्री छिपी होती है। उनके इस बयान ने न केवल राजनैतिक गलियारों में आक्रोश पैदा किया, बल्कि उन महिला नेताओं को भी गहरी चोट पहुँचाई जो अपने दम पर और ईमानदारी से जनसेवा कर रही हैं।
राजनैतिक विश्लेषकों की राय और भविष्य की चुनौतियां
पप्पू यादव के लिए यह समय अग्निपरीक्षा जैसा है। मालदा की गर्मी ने जहाँ उनकी शारीरिक ऊर्जा सोख ली है, वहीं महिला आयोग के नोटिस ने उनकी राजनैतिक छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि पप्पू यादव अक्सर व्यवस्था की कमियों को उजागर करने के चक्कर में शब्दों की मर्यादा भूल जाते हैं। उनके इस बयान ने एक बड़े महिला वोट बैंक को नाराज किया है, जो आने वाले समय में उनके लिए घाटे का सौदा साबित हो सकता है।
बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि तीन दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आयोग इस मामले को दिल्ली (राष्ट्रीय महिला आयोग और लोकसभा सचिवालय) तक ले जाएगा। पप्पू यादव के लिए अब दोहरी चुनौती है: पहले अपनी सेहत को दुरुस्त कर पूर्णिया वापस पहुँचना और फिर आयोग के नोटिस का ऐसा तार्किक जवाब तैयार करना जिससे उनकी सदस्यता और साख दोनों बच सकें।


