
पटना हाईकोर्ट ने राज्य के राष्ट्रीय और राजकीय मार्गों पर वाहनों की ओवरलोडिंग से हो रहे नुकसान को गंभीरता से लिया है। चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने सड़क निर्माण से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से जवाब मांगा।
मंगलवार को आरा-मोहनियां NH-30 के पूरी तरह चालू नहीं होने के मामले पर सुनवाई हुई। राज्य के महाधिवक्ता पीके शाही ने अदालत को बताया कि इस मार्ग के दो बड़े पुल ओवरलोडिंग के कारण क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिनकी मरम्मत जारी है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने कोर्ट को बताया कि ओवरलोडिंग के कारण सड़कों की स्थिति तेजी से खराब होती है, जिससे उनका रखरखाव चुनौतीपूर्ण हो जाता है। कोर्ट के निर्देश पर 8 और 9 अप्रैल 2026 को महाधिवक्ता कार्यालय में सभी संबंधित पक्षों की बैठक हुई, जिसमें समाधान पर चर्चा की गई।
केंद्र सरकार अब इस समस्या के समाधान के लिए नई तकनीक को बिहार में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू कर रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राज्य में तीन स्थानों पर ऑटोमैटिक वजन जांच प्रणाली स्थापित की है।
इस तकनीक के तहत वाहन के गुजरते ही उसकी क्षमता और वास्तविक वजन का डेटा स्वतः रिकॉर्ड हो जाएगा। यदि वाहन ओवरलोड पाया जाता है, तो बिना रोके ही वाहन मालिक को जुर्माने की सूचना भेज दी जाएगी। जुर्माना न भरने पर वाहन का लाइसेंस नवीनीकरण नहीं होगा और उसे सड़क पर चलने की अनुमति भी नहीं दी जाएगी।
सरकार का कहना है कि यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो इसे देश के अन्य राज्यों में भी लागू किया जाएगा। इससे ओवरलोडिंग पर नियंत्रण के साथ सड़कों की सुरक्षा और रखरखाव में सुधार होगा।
मामले में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता पीके शाही, अपर महाधिवक्ता अंजनी कुमार और सरकारी अधिवक्ता आलोक कुमार राही ने पक्ष रखा। वहीं NHAI की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के एन सिंह उपस्थित हुए।
इस मामले की अगली सुनवाई 12 मई 2026 को निर्धारित की गई है।


