
पूर्णिया। राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (GMCH) पूर्णिया के गलियारों में सोमवार की रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब संवेदनाओं और चिकित्सा के सबसे संवेदनशील कहे जाने वाले ‘बच्चा वार्ड’ में एक व्यक्ति ने नशे की हालत में जमकर उत्पात मचाया। एक पिता, जिसकी आँखों में अपने बीमार बच्चे के लिए फिक्र होनी चाहिए थी, वह शराब के नशे में इस कदर चूर था कि उसे न तो जगह की गरिमा का ख्याल रहा और न ही वहां जीवन की जंग लड़ रहे अन्य मासूमों की पीड़ा का। इलाज में लापरवाही का मनगढ़ंत आरोप लगाते हुए आरोपी ने अस्पताल के महिला स्वास्थ्यकर्मियों और डॉक्टरों के साथ न केवल बदसलूकी की, बल्कि पूरे वार्ड के माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में तैनात स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, स्थानीय पुलिस की मुस्तैदी से स्थिति को बिगड़ने से पहले संभाल लिया गया और आरोपी को हिरासत में लेकर जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
नशे की लत और संवेदनाओं का कत्ल: क्या है पूरा घटनाक्रम?
जानकारी के अनुसार, कटिहार जिले के कोढ़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत डुम्मर गांव निवासी मिथुन कुमार अपने बीमार बच्चे का इलाज कराने के लिए पूर्णिया GMCH पहुँचा था। बच्चा वार्ड में भर्ती अपने कलेजे के टुकड़े की देखभाल करने के बजाय मिथुन शराब के नशे में आकंठ डूबा हुआ था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रात के सन्नाटे में जब वार्ड में शांति की सबसे अधिक जरूरत थी, मिथुन ने अचानक चिल्लाना शुरू कर दिया। उसने बिना किसी आधार के वहां तैनात ऑन-ड्यूटी डॉक्टरों और नर्सों पर इलाज में कोताही बरतने का आरोप लगाया।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मिथुन का व्यवहार पूरी तरह अनियंत्रित था। वह नशे के झोंके में इतना उग्र हो गया था कि उसने नर्सों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया और उनके साथ गाली-गलौज पर उतारू हो गया। वार्ड में भर्ती अन्य बच्चों के परिजन भी इस दृश्य को देखकर सहम गए। अस्पताल के सुरक्षा गार्डों ने जब उसे शांत कराने की कोशिश की, तो वह उनसे भी उलझ गया और मारपीट की स्थिति पैदा कर दी। वार्ड के भीतर मचे इस ‘हाई-वोल्टेज ड्रामे’ के कारण इलाज की प्रक्रिया कुछ समय के लिए बाधित हो गई, जिससे वहां भर्ती अन्य गंभीर मरीजों की जान पर भी बन आई थी।
स्वास्थ्यकर्मियों की जुबानी: दहशत और असुरक्षा का माहौल
वार्ड में तैनात जीएनएम मधु ने उस खौफनाक अनुभव को साझा करते हुए बताया कि युवक पूरी तरह से अपने होश खो चुका था। मधु के अनुसार, “वह व्यक्ति शराब के नशे में धुत होकर वार्ड में दाखिल हुआ और बिना किसी ठोस कारण के हमें निशाना बनाने लगा। हमने उसे समझाने की बहुत कोशिश की कि बच्चे का इलाज सही दिशा में चल रहा है, लेकिन वह कुछ भी सुनने को तैयार नहीं था। वह बार-बार हमारे पास आकर गाली-गलौज कर रहा था और मारपीट की धमकी दे रहा था।”
मधु ने आगे बताया कि सरकारी अस्पताल में इस तरह की घटनाएं स्वास्थ्यकर्मियों के मनोबल को तोड़ती हैं। रात के समय जब सीमित स्टाफ होता है और जिम्मेदारी अधिक होती है, तब ऐसे असामाजिक तत्वों का सामना करना जान जोखिम में डालने जैसा है। सुरक्षा गार्डों और वहां मौजूद कुछ जागरूक लोगों ने मिथुन को पकड़ने और शांत करने की कोशिश की, लेकिन उसके उग्र तेवर को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने बिना देरी किए पुलिस को सूचित करना ही बेहतर समझा।
पुलिसिया कार्रवाई: ‘फणीश्वर नाथ रेणु’ टीओपी प्रभारी ने संभाला मोर्चा
जैसे ही हंगामे की सूचना फणीश्वर नाथ रेणु टीओपी थाना को मिली, टीओपी प्रभारी राजनंदनी पुलिस बल के साथ तत्काल GMCH पहुँचीं। पुलिस के पहुँचते ही वार्ड में छिड़ी बहस और शोर-शराबा शांत हुआ। पुलिस ने देखा कि आरोपी मिथुन कुमार अभी भी नशे के प्रभाव में चिल्ला रहा था। राजनंदनी ने सूझबूझ से काम लेते हुए सबसे पहले वार्ड के माहौल को सामान्य कराया और फिर आरोपी मिथुन को हिरासत में ले लिया।
थाने ले जाकर जब पुलिस ने मिथुन से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने स्वयं स्वीकार किया कि उसने शराब पी रखी थी। बिहार जैसे राज्य में, जहाँ पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है, एक व्यक्ति का नशे की हालत में सरकारी अस्पताल के संवेदनशील वार्ड में इस तरह का उपद्रव करना पुलिस प्रशासन के लिए भी एक कड़ी चुनौती है। आरोपी की पहचान कटिहार के कोढ़ा निवासी के रूप में पुख्ता होने के बाद पुलिस ने उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है।
न्यायिक प्रक्रिया और जेल की तैयारी: थानाध्यक्ष का बयान
थानाध्यक्ष राजनंदनी ने मीडिया को बताया कि मिथुन कुमार को नशे की हालत में सरकारी कार्य में बाधा डालने और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “अस्पताल जैसे सार्वजनिक और सेवाभावी संस्थानों में इस तरह की गुंडागर्दी और अराजकता कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आरोपी ने शराब पीने की बात कबूली है और उसका मेडिकल परीक्षण भी कराया गया है। अब उसे न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेजा जा रहा है।”
पुलिस अब इस पहलू की भी जांच कर रही है कि शराबबंदी वाले राज्य में मिथुन को शराब कहाँ से उपलब्ध हुई। कटिहार से पूर्णिया तक के सफर के दौरान वह पुलिस की नजरों से कैसे बच गया, यह भी एक बड़ा सवाल है। फिलहाल, आरोपी के विरुद्ध मद्य निषेध अधिनियम के साथ-साथ अन्य सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।


