
बाढ़ (पटना)। खुशियों की शहनाई और डीजे की धुन कब चीख-पुकार में बदल जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। पटना जिले के बाढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत दयाचक मोहल्ले में सोमवार की रात एक ऐसी ही घटना घटी, जहाँ झारखंड के बोकारो से आई एक बारात रणक्षेत्र में तब्दील हो गई। अपराधियों और असामाजिक तत्वों के हमले में सात बाराती लहूलुहान हो गए, जिसे देख दूल्हे ने शादी करने से ही हाथ खड़े कर दिए। घंटों चले ड्रामे, पुलिसिया हस्तक्षेप और अस्पताल परिसर में हुई मान-मनौव्वल के बाद आखिरकार डर के साये में ही सही, लेकिन शादी की रस्में पूरी की गईं। 28 अप्रैल 2026 की सुबह यह बारात भारी मन और पट्टियों में लिपटे जख्मी बारातियों के साथ वापस बोकारो के लिए रवाना हुई।
डीजे की धुन और अचानक हमला: 7 बाराती घायल
घटनाक्रम के अनुसार, झारखंड के बोकारो स्टील सिटी (सेक्टर-9) से बारात बाढ़ रेलवे स्टेशन के पास दयाचक मोहल्ले में आई थी। बारात बड़े ही उत्साह के साथ निकल रही थी और युवा डीजे की धुन पर थिरक रहे थे। इसी बीच, कुछ स्थानीय असामाजिक तत्व भीड़ में घुस आए और बारातियों के साथ बदसलूकी करने लगे।
विरोध करने पर देखते ही देखते लाठी-डंडे चलने लगे। हमलावरों ने बारातियों को बेरहमी से पीटा, जिसमें 7 बाराती गंभीर रूप से घायल हो गए। अचानक हुए इस हमले से बारात में भगदड़ मच गई। आनन-फानन में सभी घायलों को इलाज के लिए बाढ़ अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया गया।
खून-खराबा देख दूल्हे ने फेरे लेने से किया मना
अस्पताल में अपने साथियों और परिजनों को खून से लथपथ देख दूल्हा इस कदर सहम गया कि उसने शादी करने से साफ इनकार कर दिया। दूल्हे का कहना था कि जिस माहौल में जान का खतरा हो, वहां वह वैवाहिक संबंध नहीं जोड़ सकता।
इसके बाद शुरू हुआ घंटों लंबा ‘हाई-वोल्टेज ड्रामा’:
- अस्पताल बना मंडप: लड़की पक्ष के लोग बदहवास होकर अस्पताल पहुँच गए और दूल्हे को मनाने की कोशिश करने लगे।
- अजीबोगरीब दबाव: स्थिति ऐसी बनी कि लोग मंडप की जगह अस्पताल परिसर या पास के किसी मंदिर में ही शादी संपन्न कराने का दबाव बनाने लगे।
- सड़क पर हंगामा: तनाव इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और हंगामे की स्थिति पैदा हो गई।
पुलिस और डॉक्टरों की पहल: ‘संकटमोचक’ बनी खाकी
मामले की गंभीरता और बिगड़ती स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और अस्पताल के डॉक्टरों ने मोर्चा संभाला। पुलिस अधिकारियों ने दूल्हे और उसके परिवार को सुरक्षा का भरोसा दिलाया और काफी देर तक काउंसलिंग की।
”पुलिस और प्रशासन के सहयोग से दूल्हे के मन से डर निकाला गया। दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर सुलह कराई गई, जिसके बाद दूल्हा वापस मंडप जाने को तैयार हुआ।”
बाढ़ थाना पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था के बीच दूल्हे को दोबारा कन्या पक्ष के घर (मंडप) लाया गया। वहां बिना किसी तामझाम के, जल्दबाजी में जयमाला और सिंदूरदान की रस्में पूरी की गईं।
निष्कर्ष: डर के साये में विदाई
मंगलवार की सुबह विदाई की रस्म पूरी की गई। एक तरफ जहाँ शादी की रस्में पूरी हुईं, वहीं दूसरी ओर घायल बारातियों का इलाज अस्पताल में जारी रहा। प्राथमिक उपचार के बाद सभी बाराती दूल्हा-दुल्हन के साथ बोकारो के लिए रवाना हो गए। इस घटना ने एक बार फिर शादियों में सुरक्षा और असामाजिक तत्वों के बढ़ते दुस्साहस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस फिलहाल हमलावरों की पहचान करने और उन पर कानूनी कार्रवाई करने में जुटी है।
वॉयस ऑफ बिहार (VOB) न्यूज़ डेस्क की रिपोर्ट।
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