भोजपुर में भरत तिवारी एनकाउंटर पर प्रस्तावित ‘बहुजन महापंचायत’ रद्द, प्रशासन ने नहीं दी अनुमति; डीएसपी के तबादले पर परिजनों ने उठाए सवाल

भोजपुर: बिहार के भोजपुर जिले के जगदीशपुर में 5 जुलाई को आयोजित होने वाली प्रस्तावित ‘बहुजन महापंचायत’ को प्रशासन ने अनुमति देने से इनकार करते हुए रद्द कर दिया है। भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले को लेकर बुलाई गई इस महापंचायत को कानून-व्यवस्था और संभावित सामाजिक तनाव का हवाला देते हुए स्थगित कर दिया गया। दूसरी ओर, मामले के नामजद तत्कालीन डीएसपी के तबादले के बाद मृतक भरत तिवारी के परिजनों ने सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

प्रशासन ने अनुमति की अर्जी की खारिज

जगदीशपुर अनुमंडल प्रशासन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि प्रस्तावित महापंचायत में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना थी, जिससे कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी। इसी आधार पर आयोजन की अनुमति संबंधी आवेदन को निरस्त कर दिया गया।

प्रशासन ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

स्कूल परिसर की अनुमति भी वापस

महापंचायत का आयोजन जगदीशपुर प्रखंड के जंगल दावां स्थित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर में प्रस्तावित था। हालांकि विद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा कारणों और नियमों का हवाला देते हुए पहले दी गई अनुमति वापस ले ली। मैदान की अनुमति रद्द होने के बाद आयोजकों को कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा।

जीतन राम मांझी ने भी की थी कार्यक्रम टालने की अपील

महापंचायत में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। लेकिन क्षेत्र में बढ़ते सामाजिक तनाव की आशंका को देखते हुए उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से आयोजकों से कार्यक्रम स्थगित करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व इस मंच का इस्तेमाल कर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं।

प्रशासन अलर्ट, शांति बनाए रखने की अपील

महापंचायत स्थगित होने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली है। स्थानीय प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी है। वहीं कई सामाजिक संगठनों और प्रबुद्ध नागरिकों ने भी फैसले का स्वागत करते हुए इसे सामाजिक सद्भाव के हित में बताया है।

डीएसपी के तबादले पर भरत तिवारी की मां का सवाल

इधर 17 जून को शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले में नामजद तत्कालीन जगदीशपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (डीएसपी) राजेश कुमार शर्मा के तबादले के बाद मृतक की मां आशा देवी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

उन्होंने कहा कि जिन अधिकारी के खिलाफ हत्या समेत गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने उनका सिर्फ तबादला कर नई पोस्टिंग दे दी।

“डीएसपी का ट्रांसफर नहीं, केस के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए थी। उन पर केस चल रहा है। ऐसे में उनका तबादला और बड़ी जिम्मेदारी देना दिखाता है कि सरकार लीपापोती कर रही है।”
– आशा देवी, भरत तिवारी की मां

गृह विभाग ने जारी किया तबादला आदेश

गृह विभाग के आदेश के अनुसार, वर्ष 2019 बैच के डीएसपी राजेश कुमार शर्मा को पुलिस उपाधीक्षक, मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक ब्यूरो, पटना में पदस्थापित किया गया है। इससे पहले वह जगदीशपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के रूप में कार्यरत थे।

एनकाउंटर मामले में दर्ज है प्राथमिकी

सरकार के आदेश पर दर्ज प्राथमिकी में डीएसपी राजेश कुमार शर्मा का नाम भी शामिल है। मामले की जांच फिलहाल जारी है। परिजनों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले संबंधित अधिकारी को नई जिम्मेदारी देना उचित नहीं है।

परिजनों की मांग— हो निष्पक्ष जांच

भरत तिवारी के परिजन लगातार मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि दोषी पाए जाने वाले सभी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

भरत भूषण तिवारी का कथित पुलिस एनकाउंटर 17 जून 2026 को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुआ था। घटना से पहले भरत तिवारी ने फेसबुक लाइव किया था। परिजनों का आरोप है कि उसने हथियार फेंककर आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद पुलिस ने गोली मार दी। हालांकि इस पूरे मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।

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