पूर्वी चंपारण में अवैध कारतूस बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश, पुलिस ने 500 से ज्यादा कारतूस बरामद कर 4 आरोपियों को दबोचा

पूर्वी चंपारण जिले में पुलिस ने अवैध हथियार और कारतूस के कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसके जरिए कथित तौर पर लंबे समय से अवैध कारतूस तैयार किए जा रहे थे। चकिया थाना क्षेत्र के ओझा टोला में की गई इस कार्रवाई के दौरान पुलिस को बड़ी संख्या में तैयार और अधबने कारतूस मिले हैं। इसके अलावा कारतूस तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली मशीनें, उपकरण और कई तरह की सामग्री भी बरामद की गई है।

पुलिस की कार्रवाई के दौरान इस अवैध गतिविधि से जुड़े चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। शुरुआती जांच में पुलिस को आशंका है कि यहां तैयार किए जा रहे कारतूस केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं थे, बल्कि इन्हें जिले से बाहर भी अलग-अलग इलाकों में भेजा जाता था। इस जानकारी के आधार पर अब पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है।

अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई से अवैध हथियार और कारतूस के कारोबार से जुड़े एक सक्रिय गिरोह को बड़ा झटका लगा है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस अवैध कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और तैयार कारतूस किन लोगों तक पहुंचाए जाते थे।

गुप्त सूचना के बाद पुलिस ने तैयार किया विशेष अभियान

पुलिस को चकिया थाना क्षेत्र के ओझा टोला में अवैध तरीके से कारतूस तैयार किए जाने की सूचना मिली थी। सूचना की गंभीरता को देखते हुए पूर्वी चंपारण के पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर तत्काल कार्रवाई की योजना बनाई गई।

अभियान को सफल बनाने के लिए चकिया और पकड़ीदयाल अनुमंडल के पुलिस अधिकारियों के नेतृत्व में एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। इस टीम में मेहसी, चकिया, मधुबन, गड़हिया और फेनहारा थाना क्षेत्रों के पुलिसकर्मियों के साथ जिला आसूचना इकाई के अधिकारी भी शामिल किए गए।

पुलिस टीम ने पहले सूचना की पुष्टि की और इसके बाद संदिग्ध ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई शुरू की। जांच एजेंसियों को आशंका थी कि अवैध गतिविधि से जुड़े लोग पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए अलग-अलग स्थानों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसी वजह से कई संदिग्ध ठिकानों को अभियान के दायरे में रखा गया।

छापेमारी में बड़ी संख्या में कारतूस बरामद

संयुक्त पुलिस टीम ने ओझा टोला सहित कई संदिग्ध स्थानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान पुलिस को 500 से अधिक निर्मित और अर्धनिर्मित कारतूस मिले। इतनी बड़ी मात्रा में अवैध सामग्री बरामद होने के बाद पुलिस ने इसे गंभीर मामला मानते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया है।

छापेमारी के दौरान चार आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब इनसे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अवैध कारतूस निर्माण का काम कब से चल रहा था और इसमें कितने लोग शामिल थे।

जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बरामद कारतूस कहां-कहां भेजे जाते थे। पुलिस को शुरुआती जानकारी के आधार पर संदेह है कि तैयार कारतूस को अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय अवैध हथियार कारोबारियों और अपराधी तत्वों तक पहुंचाया जा सकता था।

मशीनों और अन्य सामान की भी बरामदगी

पुलिस की कार्रवाई केवल तैयार और अधबने कारतूस तक सीमित नहीं रही। छापेमारी के दौरान कारतूस तैयार करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मशीनें और अन्य उपकरण भी बरामद किए गए हैं।

इसके अलावा बड़ी मात्रा में धातु से जुड़ी सामग्री और विभिन्न रासायनिक पदार्थ भी पुलिस के हाथ लगे हैं। बरामद सामान की जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इसका इस्तेमाल किस प्रकार की अवैध गतिविधियों में किया जाता था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, छापेमारी के दौरान मिले सामान से यह संकेत मिलता है कि यहां केवल कारतूस का भंडारण नहीं किया जा रहा था, बल्कि निर्माण से जुड़ी गतिविधियां भी संचालित होने की आशंका है। बरामद सभी वस्तुओं को जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है और विशेषज्ञों की मदद से इनकी पड़ताल की जा रही है।

अंतर-जिला सप्लाई नेटवर्क की आशंका

पुलिस की प्रारंभिक जांच में सबसे अहम जानकारी अवैध कारतूस की संभावित सप्लाई को लेकर सामने आई है। जांच अधिकारियों को आशंका है कि यहां तैयार होने वाले कारतूस की आपूर्ति केवल पूर्वी चंपारण के आसपास के इलाकों में नहीं होती थी।

संभावना जताई जा रही है कि इस नेटवर्क के जरिए अलग-अलग जिलों में कारतूस पहुंचाए जाते थे। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर सप्लाई से जुड़े संपर्कों का पता लगाने में जुटी है।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस अवैध कारोबार के पीछे मुख्य संचालक कौन हैं और गिरफ्तार किए गए चार लोगों की भूमिका क्या थी। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ से नेटवर्क के अन्य सदस्यों और उनके ठिकानों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।

अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ जारी

अवैध कारतूस निर्माण से जुड़े इस मामले में पुलिस ने अपनी जांच को और विस्तृत कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, नेटवर्क से जुड़े कुछ अन्य संदिग्ध लोगों को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।

पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि गिरफ्तार आरोपियों के संपर्क किन लोगों से थे। इसके साथ ही कारतूस की खरीद, निर्माण, भंडारण और आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया की जानकारी जुटाई जा रही है।

जांच टीम इस बात का भी पता लगा रही है कि क्या इस नेटवर्क का संबंध पहले सामने आए किसी अन्य अवैध हथियार मामले से है। यदि जांच के दौरान ऐसे कोई तथ्य सामने आते हैं तो पुलिस कार्रवाई का दायरा और बढ़ा सकती है।

फरार लोगों की तलाश में छापेमारी

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में कुछ अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। संभावित आरोपियों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की जा रही है।

जांच टीम का लक्ष्य केवल अवैध कारतूस बनाने वाले स्थान को बंद करना नहीं, बल्कि इस पूरे नेटवर्क को उजागर करना है। पुलिस यह पता लगाना चाहती है कि अवैध कारतूस तैयार होने के बाद उन्हें किन माध्यमों से दूसरे स्थानों तक पहुंचाया जाता था।

अधिकारियों का मानना है कि यदि इस नेटवर्क की पूरी कड़ी सामने आती है तो अवैध हथियार और कारतूस के कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है।

पुलिस टीम को मिलेगा नकद पुरस्कार

इस अभियान की सफलता पर पुलिस अधीक्षक ने कार्रवाई में शामिल अधिकारियों और जवानों की सराहना की है। उन्होंने अभियान में बेहतर समन्वय और कार्रवाई के लिए पूरी टीम को 25 हजार रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।

अभियान में शामिल पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी विशेष रूप से प्रशंसा की गई। अधिकारियों ने कहा कि गुप्त सूचना पर तेजी से कार्रवाई और विभिन्न थाना क्षेत्रों की टीमों के बीच बेहतर तालमेल के कारण यह अभियान सफल हो सका।

फिलहाल गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस बरामद कारतूस और अन्य सामान की जांच के साथ-साथ पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हुई है। आने वाले समय में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।

पूर्वी चंपारण में हुई इस कार्रवाई ने एक बार फिर अवैध हथियार और कारतूस के कारोबार के खिलाफ पुलिस की सक्रियता को सामने रखा है। 500 से अधिक तैयार और अर्धनिर्मित कारतूस की बरामदगी के बाद मामला और गंभीर हो गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस नेटवर्क का विस्तार कितना बड़ा था और इसके जरिए अवैध कारतूस किन-किन क्षेत्रों तक पहुंचाए जा रहे थे। पुलिस की आगे की जांच से इन सवालों के जवाब सामने आने की उम्मीद है।

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