बिहार में स्कूल रसोइयों के मानदेय में बड़ी बढ़ोतरी की तैयारी, 2025 चुनाव से पहले नीतीश सरकार का बड़ा कदम

पटना, जून 2025 – बिहार के लाखों स्कूल रसोइयों और सहायकों के लिए राहत भरी खबर है। नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली राज्य सरकार मध्याह्न भोजन योजना के तहत कार्यरत लगभग 2.38 लाख रसोइयों का मासिक मानदेय 1650 रुपये से बढ़ाकर 3000 से 8000 रुपये करने की योजना बना रही है। यह प्रस्ताव आगामी विधानसभा चुनाव 2025 से पहले लागू हो सकता है।

यह कदम न केवल महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देगा, बल्कि ग्रामीण वोट बैंक को साधने की सरकार की रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है।

रसोइयों के लिए कितना बढ़ सकता है मानदेय?

शिक्षा विभाग ने मानदेय बढ़ाने के लिए छह अलग-अलग प्रस्ताव तैयार किए हैं:

  • ₹3000
  • ₹4000
  • ₹5000
  • ₹6000
  • ₹7000
  • ₹8000

इनमें से किसी एक प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की संभावना है। वर्तमान में रसोइयों को ₹1650/माह मिलते हैं – जिसमें ₹600 केंद्र सरकार, ₹400 राज्य सरकार और ₹650 राज्य टॉप-अप शामिल है।

बजट पर कितना होगा असर?

यदि मानदेय दोगुना या उससे अधिक किया जाता है, तो सरकार पर हर महीने लगभग ₹450 से ₹550 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा। हालांकि, यह राशि लाखों गरीब परिवारों की महिलाओं को आर्थिक सम्मान और स्थायित्व दिलाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

अन्य राज्यों से तुलना में बिहार पीछे क्यों?

बिहार में मानदेय की यह राशि अकुशल मजदूर की न्यूनतम मजदूरी (₹11,024/माह) से भी काफी कम है। इस असमानता को दूर करने की मांग रसोइयों के संगठनों और विपक्ष द्वारा लगातार उठाई जा रही थी।

रसोइयों की भूमिका और नियुक्ति कैसे होती है?

  • कक्षा 1 से 8 तक के स्कूलों में कार्यरत
  • छात्र संख्या के अनुसार:
    • 100 छात्रों तक: 1 रसोइया
    • 200 छात्रों तक: 2 रसोइये
    • 200 से अधिक: 3 रसोइये
  • भोजन बनाना, परोसना और साफ-सफाई की जिम्मेदारी

राजनीतिक महत्व: वोट बैंक और चुनावी समीकरण

  • यह फैसला खासकर ग्रामीण महिलाओं को साधने की दिशा में उठाया गया रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
  • राजद नेता तेजस्वी यादव पहले ही रसोइयों के आंदोलन का समर्थन कर चुके हैं।
  • कई रसोइयों ने ₹10,000 से ₹15,000 मासिक मानदेय की भी मांग की है, जिसे कुछ वर्गों से समर्थन मिला है।

क्या कहती है सरकार?

शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के बाद कैबिनेट में मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

नीतीश सरकार इसे महिला सशक्तीकरण और सामाजिक न्याय के एजेंडे के तहत देख रही है।

सरकार का मानना है कि यह सुधार चुनावी दृष्टि से भी NDA गठबंधन की स्थिति मजबूत कर सकता है।

निष्कर्ष: आर्थिक राहत + राजनीतिक रणनीति

बिहार सरकार का यह प्रस्ताव जहां रसोइयों के जीवनस्तर में बदलाव लाने वाला है, वहीं यह राजनीतिक समीकरणों पर भी असर डाल सकता है। आगामी दिनों में कैबिनेट की मंजूरी और फाइनल राशि को लेकर सभी की नजरें सरकार के निर्णय पर टिकी हैं।

अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह बिहार के इतिहास में रसोइयों को मिलने वाली सबसे बड़ी वित्तीय राहत होगी।

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