पटना: बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे राजनीतिक हमलों की तीव्रता भी बढ़ती जा रही है। महागठबंधन के घोषणापत्र ‘तेजस्वी प्रण’ के जारी होते ही सियासी बयानों की बौछार शुरू हो गई है।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इसे “झूठ का पुलिंदा” बताया, जबकि जेडीयू के वरिष्ठ नेता संजय झा ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि “ये लोग तो 15 साल पहले ही बिहार का प्राण ले चुके हैं, अब ‘तेजस्वी प्रण’ जारी कर रहे हैं।”
महागठबंधन का ‘तेजस्वी प्रण’ जारी
महागठबंधन ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए अपना घोषणापत्र ‘तेजस्वी प्रण’ के नाम से जारी किया है।
इसमें प्रमुख वादे किए गए हैं —
- हर घर में सरकारी नौकरी,
- माई-बहिन योजना,
- 200 यूनिट मुफ्त बिजली,
- और बिहार को नंबर वन राज्य बनाने का संकल्प।
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि यह घोषणापत्र “बिहार के विकास और सम्मान की दिशा में संकल्प है।”
गिरिराज सिंह का तीखा हमला
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने महागठबंधन और तेजस्वी यादव पर तीखा प्रहार करते हुए कहा —
“यह घोषणापत्र झूठ का पुलिंदा है। तेजस्वी यादव ने पिछले वादे पूरे नहीं किए, जनता को फिर से भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है।”
उन्होंने कहा कि जनता अब वादों और जुमलों से ऊपर उठ चुकी है, और बिहार को ठोस विकास चाहिए, न कि खोखले आश्वासन।
संजय झा का व्यंग्य — “बिहार का प्राण पहले ही ले चुके हैं”
जेडीयू नेता संजय झा ने महागठबंधन पर हमला बोलते हुए कहा —
“इन लोगों ने तो पहले ही बिहार का प्राण ले लिया था। उनके शासन में दंगे, जातीय हिंसा, लूट, अपहरण चरम पर थे। लोग मजबूर होकर बिहार छोड़कर भाग गए थे। अब ‘तेजस्वी प्रण’ जारी कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि जनता अब इनकी सच्चाई जान चुकी है और बिहार को पीछे ले जाने वाली ताकतों को जवाब देने के लिए तैयार है।
सियासी बयानबाजी से गरमाई बिहार की राजनीति
महागठबंधन के घोषणापत्र पर एनडीए के नेताओं के हमले से बिहार की सियासत एक बार फिर गरमा गई है।
जहां एनडीए इसे “झूठ और भ्रम का दस्तावेज़” बता रहा है, वहीं आरजेडी इसे “बदलाव का संकल्पपत्र” कह रही है।
अब देखना होगा कि जनता किसकी बात पर भरोसा करती है — वादों की राजनीति पर या विकास के दावों पर।



