तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर बढ़ी सियासी हलचल, बहुमत साबित करने को तैयार दिखे विजय

चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति इन दिनों बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच चुकी है। विधानसभा चुनाव के बाद सरकार गठन को लेकर जारी सस्पेंस लगातार गहराता जा रहा है। इस राजनीतिक खींचतान के केंद्र में अभिनेता से नेता बने Vijay हैं, जिनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) राज्य की सत्ता तक पहुंचने की कोशिश में जुटी हुई है। हालांकि बहुमत के आंकड़े से पीछे रहने के कारण उनकी राह आसान नहीं मानी जा रही। इसी बीच गुरुवार को राज्यपाल R. V. Arlekar और विजय के बीच हुई मुलाकात ने पूरे राजनीतिक घटनाक्रम को और तेज कर दिया है।

सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल ने विजय को लोक भवन तलब कर सरकार गठन को लेकर उनकी स्थिति स्पष्ट करने को कहा। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब तमिलनाडु में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है और सभी राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं। बताया जा रहा है कि मुलाकात के दौरान राज्यपाल ने विजय से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे, जिनमें सबसे अहम सरकार की स्थिरता को लेकर था।

राज्यपाल ने विजय से पूछा कि जब बहुमत के लिए 118 विधायकों की जरूरत है, तब 113 विधायकों के समर्थन के साथ वे किस आधार पर स्थिर सरकार चलाने का दावा कर रहे हैं। साथ ही उनसे उन दलों और विधायकों की सूची भी मांगी गई, जो बिना शर्त TVK को समर्थन देने के लिए तैयार हैं। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि राज्यपाल सरकार गठन से पहले यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि बनने वाली सरकार विधानसभा में बहुमत साबित करने की स्थिति में हो।

बैठक के दौरान विजय ने कथित तौर पर साफ कहा कि वे फ्लोर टेस्ट के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उनका कहना था कि यदि उन्हें सरकार बनाने का मौका दिया जाता है तो वे विधानसभा के भीतर बहुमत साबित कर देंगे। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, विजय इस समय उन क्षेत्रीय दलों और निर्दलीय विधायकों के संपर्क में हैं जो सत्ता गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

तमिलनाडु विधानसभा के वर्तमान समीकरणों पर नजर डालें तो TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन उसके पास अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा नहीं है। पार्टी को सरकार बनाने के लिए सहयोगी दलों और निर्दलीय विधायकों की जरूरत पड़ रही है। यही कारण है कि पिछले कुछ दिनों से राज्य की राजनीति में जोड़-तोड़ और संभावित गठबंधनों की चर्चा तेज हो गई है।

कांग्रेस ने TVK को समर्थन देने की इच्छा जाहिर की है, लेकिन इसके साथ कुछ राजनीतिक शर्तें भी रखी गई हैं। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस चाहती है कि विजय किसी भी ऐसी पार्टी से दूरी बनाए रखें जिसे वह सांप्रदायिक राजनीति से जोड़कर देखती है। ऐसे में भाजपा या भाजपा समर्थक दलों से संभावित समीकरण को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।

विजय की नजर अब वामपंथी दलों और कुछ क्षेत्रीय पार्टियों पर भी टिकी हुई है। यदि CPI, CPM, VCK और PMK जैसे दल समर्थन देते हैं तो TVK आसानी से बहुमत का आंकड़ा पार कर सकती है। हालांकि सबसे बड़ी चुनौती यही है कि इन दलों के राजनीतिक समीकरण फिलहाल अलग-अलग दिशाओं में हैं।

विशेष रूप से VCK फिलहाल DMK गठबंधन का हिस्सा मानी जा रही है, जबकि PMK का झुकाव भाजपा की ओर बताया जाता है। ऐसे में विजय के लिए इन दलों को अपने पक्ष में करना आसान नहीं माना जा रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले 48 घंटे तमिलनाडु की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

इसी बीच राज्य की राजनीति में रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की चर्चा भी तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, AIADMK के कुछ विधायक विजय के संपर्क में बताए जा रहे हैं। चर्चा यह भी है कि संभावित टूट-फूट और दबाव की राजनीति से बचने के लिए कुछ विधायकों को पुडुचेरी और महाबलीपुरम के रिसॉर्ट्स में रखा गया है। हालांकि AIADMK के वरिष्ठ नेताओं ने ऐसे किसी भी राजनीतिक गठबंधन या समर्थन की संभावना से इनकार किया है।

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि विजय फिलहाल बेहद सतर्क रणनीति के साथ आगे बढ़ रहे हैं। राजनीति में नए होने के बावजूद वे अपने विधायकों को एकजुट रखने और संभावित टूट-फूट से बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। महाबलीपुरम के रिसॉर्ट में सुरक्षा के बीच विधायकों को रखने की खबरों ने इस राजनीतिक ड्रामे को और दिलचस्प बना दिया है।

वहीं दूसरी ओर DMK और भाजपा भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। दोनों दल इस राजनीतिक अस्थिरता को अपने-अपने तरीके से देख रहे हैं। यदि विजय बहुमत साबित करने में सफल होते हैं तो तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा, क्योंकि पहली बार कोई नया राजनीतिक दल सीधे सत्ता के करीब पहुंचता दिखाई देगा।

राज्यपाल के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए स्थिर सरकार सुनिश्चित करने की है। यदि विजय पर्याप्त समर्थन का प्रमाण देने में विफल रहते हैं, तो राज्यपाल के पास अन्य दलों को मौका देने या फिर विधानसभा को निलंबित करने जैसे विकल्प मौजूद होंगे। ऐसी स्थिति में राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश भी की जा सकती है।

हालांकि राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि तमिलनाडु जैसे बड़े राज्य में दोबारा चुनाव से बचने की कोशिश की जाएगी और सभी दल सरकार गठन के लिए अंतिम समय तक प्रयास करते रहेंगे। फिलहाल पूरा ध्यान इस बात पर टिका है कि विजय बहुमत का आंकड़ा जुटा पाते हैं या नहीं।

फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए विजय के लिए यह अब तक की सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा मानी जा रही है। चुनाव में मिली बड़ी सफलता के बाद अब उन्हें विधानसभा के भीतर अपनी राजनीतिक ताकत साबित करनी होगी। आने वाले दिनों में राज्यपाल का फैसला, संभावित गठबंधन और फ्लोर टेस्ट तमिलनाडु की राजनीति की दिशा तय करेंगे। अभी के लिए पूरा राज्य इस सियासी घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और हर नई हलचल चर्चा का विषय बन रही है।

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