
पटना। बिहार के श्रमबल को शारीरिक रूप से सुदृढ़ बनाने और औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले कामगारों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में गुरुवार, 07 मई 2026 को एक बड़ा कदम उठाया गया। राजधानी से सटे बिहटा स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के ऑडिटोरियम में 40 वर्ष से अधिक आयु के श्रमिकों के लिए मुफ्त ‘वार्षिक स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम’ का भव्य शुभारंभ हुआ। यह आयोजन केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि भारत सरकार के केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने नई दिल्ली से वर्चुअल माध्यम के जरिए देश के 12 विभिन्न रणनीतिक स्थानों पर एक साथ इस राष्ट्रव्यापी स्वास्थ्य अभियान का उद्घाटन किया। केंद्र और राज्य सरकार का यह साझा प्रयास उस ‘नया भारत, स्वस्थ भारत’ के विजन को धरातल पर उतारने की कोशिश है, जहाँ विकास के पहियों को घुमाने वाले श्रमिकों की सेहत को प्राथमिकता दी जा रही है। इस कार्यक्रम के माध्यम से न केवल बीमारियों की समय पर पहचान होगी, बल्कि श्रमिकों को वित्तीय संकट से बचाने के लिए ईएसआईसी द्वारा प्रदान किए जाने वाले विभिन्न नकद और चिकित्सा लाभों के प्रति भी जागरूक किया गया।
वर्चुअल उद्घाटन और राष्ट्रीय संदर्भ
डॉ. मनसुख मांडविया ने दिल्ली से इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि श्रमिक राष्ट्र के निर्माण की रीढ़ हैं और उनकी कार्यक्षमता सीधे तौर पर उनके स्वास्थ्य से जुड़ी होती है। उन्होंने बताया कि 40 वर्ष की आयु एक ऐसा पड़ाव है जहाँ जीवनशैली से जुड़ी कई बीमारियाँ चुपके से शरीर में प्रवेश करने लगती हैं। समय पर जांच न होने के कारण ये बीमारियाँ बाद में गंभीर रूप ले लेती हैं, जिससे न केवल श्रमिक का परिवार संकट में पड़ता है, बल्कि देश की उत्पादकता भी प्रभावित होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए देश के 12 प्रमुख केंद्रों पर यह कार्यक्रम शुरू किया गया है, जिसमें बिहटा (बिहार) को एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में चुना गया।
बिहटा के ईएसआईसी ऑडिटोरियम में इस अवसर पर बिहार सरकार के श्रम संसाधन विभाग के सचिव दीपक आनंद मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे, जबकि श्रमायुक्त राजेश भारती ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इन अधिकारियों की मौजूदगी यह स्पष्ट करती है कि बिहार सरकार नई श्रम संहिताओं को लागू करने और श्रमिकों के कल्याण के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।
नई श्रम संहिता: नियोक्ताओं के लिए अनिवार्य हुए निर्देश
इस स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी इसका कानूनी आधार है। पिछले साल नवंबर में अधिसूचित की गई नई श्रम संहिताओं के अंतर्गत, ‘व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता, 2020’ (OSH Code) को लागू किया गया है। इस संहिता की धारा 6(1)(सी) के तहत अब यह कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है कि प्रत्येक नियोक्ता (Employer) अपने उन श्रमिकों की वार्षिक स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करे जिनकी आयु 40 वर्ष या उससे अधिक हो गई है।
श्रम सचिव दीपक आनंद ने अपने संबोधन में इस कानूनी पक्ष पर जोर देते हुए कहा कि बिहार सरकार राज्य में औद्योगिक शांति और श्रमिक सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नई श्रम संहिताओं को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारा जाएगा। नियोक्ताओं को यह संदेश दिया गया है कि श्रमिकों की सेहत में किया गया निवेश वास्तव में उद्योग की लंबी उम्र और बेहतर उत्पादन की गारंटी है। सरकार अब इस बात की भी निगरानी करेगी कि कंपनियां और कारखाने अपने कर्मचारियों के लिए इन अनिवार्य जांचों की व्यवस्था कर रहे हैं या नहीं।
सवेतन अवकाश: जांच के लिए नहीं कटेगी मजदूरी
श्रमिकों के मन में अक्सर यह संशय रहता है कि यदि वे अस्पताल जांच कराने जाएंगे, तो उस दिन की उनकी दिहाड़ी या वेतन काट लिया जाएगा। इस चिंता को दूर करते हुए श्रमायुक्त राजेश भारती ने एक बड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि वार्षिक स्वास्थ्य जांच के लिए श्रमिकों को सवेतन अवकाश (Paid Leave) देने का प्रावधान किया गया है। यानी, जिस दिन श्रमिक अपनी सेहत की जांच कराने ईएसआईसी अस्पताल आएगा, उस दिन उसे कार्य पर उपस्थित माना जाएगा और उसका वेतन नहीं कटेगा।
राजेश भारती ने ओएसएच कोड के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए बताया कि राज्य सरकार श्रमिकों के कार्यस्थल की स्थितियों को सुधारने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। वार्षिक जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी बीमारियों की पहचान शुरुआती चरणों में ही हो जाए। इससे इलाज आसान और कम खर्चीला हो जाता है।
ईएसआईसी के लाभ: पेंशन से लेकर शिक्षा में आरक्षण तक
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के डीन डॉ. विनय विश्वास ने अस्पताल प्रबंधन की ओर से आश्वस्त किया कि श्रमिकों की जांच के लिए अस्पताल में विशेष काउंटर और अनुभवी डॉक्टरों की टीम तैनात की गई है। उन्होंने स्वास्थ्य जांच के वैज्ञानिक महत्व पर चर्चा करते हुए बताया कि कैसे एक साधारण ब्लड टेस्ट या ईसीजी किसी बड़ी अनहोनी को टाल सकता है।
कार्यक्रम के दौरान क्षेत्रीय निदेशक (बिहार) सीए निरंजन कुमार ने ईएसआई योजना के तहत मिलने वाले उन लाभों का विवरण प्रस्तुत किया जो अक्सर आम श्रमिकों को पता नहीं होते। उन्होंने बताया कि ईएसआईसी केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण सामाजिक सुरक्षा चक्र है:
- बीमारी में वेतन: यदि कोई बीमित श्रमिक बीमार पड़ता है, तो उसे बीमारी की अवधि के दौरान वेतन का एक हिस्सा प्रदान किया जाता है।
- दुर्घटना की स्थिति में आजीवन पेंशन: कार्यस्थल पर किसी दुर्घटना के कारण यदि श्रमिक दिव्यांग हो जाता है, तो उसे आजीवन पेंशन की सुविधा मिलती है।
- मृत्यु की स्थिति में आश्रितों को सुरक्षा: यदि किसी श्रमिक की कार्य के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो उसके आश्रितों को 90 प्रतिशत तक आजीवन पेंशन दी जाती है।
- मातृत्व हितलाभ: महिला श्रमिकों के लिए 26 सप्ताह तक सवेतन मातृत्व अवकाश की व्यवस्था है।
- शिक्षा में आरक्षण: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बीमित श्रमिकों के बच्चों के लिए ईएसआईसी द्वारा संचालित मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण की विशेष व्यवस्था की गई है, जिससे श्रमिकों के बच्चे भी डॉक्टर बनने का सपना पूरा कर सकें।
आर्थिक सुरक्षा का कवच: भारी खर्च से बचेगा परिवार
सरकार की इस योजना का एक बड़ा उद्देश्य श्रमिकों के परिवारों को कर्ज के जाल से बचाना है। अक्सर देखा जाता है कि किसी गंभीर बीमारी के अचानक सामने आने पर श्रमिकों को निजी अस्पतालों में लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं, जिसके लिए उन्हें अपनी जमीन बेचनी पड़ती है या ऊँची ब्याज दर पर कर्ज लेना पड़ता है। ईएसआईसी के माध्यम से मुफ्त इलाज और नियमित स्वास्थ्य जांच इस वित्तीय जोखिम को कम करेगी।
कार्यक्रम के दौरान कई श्रमिकों ने भी अपनी भागीदारी दर्ज कराई और इस पहल की सराहना की। विशेषज्ञों ने बताया कि जांच के बाद यदि किसी श्रमिक में कोई बीमारी पाई जाती है, तो उसे तुरंत अस्पताल के संबंधित विभाग में रेफर किया जाएगा जहाँ उसका पूर्णतः मुफ्त इलाज शुरू होगा। यह अभियान आने वाले दिनों में बिहार के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों और ईएसआईसी डिस्पेंसरियों तक भी विस्तारित किया जाएगा ताकि दूर-दराज के इलाकों में काम करने वाले कामगारों को भी इसका लाभ मिल सके।
श्रम संसाधन विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने यह भी संकेत दिए कि भविष्य में मोबाइल हेल्थ वैन के जरिए सीधे कारखानों और निर्माण स्थलों पर जाकर भी स्वास्थ्य जांच की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। आज का यह उद्घाटन समारोह बिहार के औद्योगिक परिदृश्य में एक स्वस्थ कार्यसंस्कृति की शुरुआत माना जा रहा है, जहाँ ‘मजदूर’ की पहचान केवल एक श्रमिक के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र की अनमोल संपत्ति के रूप में की गई है।


