नारी शक्ति वंदन अभियान में पीएम मोदी का बड़ा संदेश, बोले- महिलाओं की भागीदारी से मजबूत होगा लोकतंत्र

देश में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर एक बार फिर बड़ा संदेश सामने आया है। दिल्ली में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन अभियान’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी जितनी मजबूत होगी, भारत का लोकतंत्र उतना ही सशक्त बनेगा। उन्होंने इस दिशा में संसद के आगामी विशेष सत्र को ऐतिहासिक बताते हुए इसे बदलाव की शुरुआत करार दिया।

महिलाओं को मिलेगा मजबूत प्रतिनिधित्व

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि देश में लंबे समय से महिलाओं को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की चर्चा होती रही है, लेकिन अब इसे जमीन पर उतारने का समय आ गया है।

उन्होंने कहा कि 16, 17 और 18 अप्रैल की तारीखें इस दिशा में बेहद महत्वपूर्ण होंगी, जब संसद में विशेष सत्र के दौरान महिलाओं को सशक्त बनाने से जुड़े अहम कदम उठाए जाएंगे।

उनका कहना था कि यह पहल केवल एक कानून तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को स्थायी रूप से मजबूत करेगी।

नए संसद भवन से शुरू हुई पहल

प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि वर्ष 2023 में नए संसद भवन में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के रूप में इस दिशा में पहला बड़ा कदम उठाया गया था।

उन्होंने कहा कि इस अधिनियम का उद्देश्य महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में अधिक प्रतिनिधित्व देना है, ताकि वे नीति निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा सकें।

सरकार का मानना है कि जब निर्णय लेने वाली संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, तो समाज के हर वर्ग की आवाज बेहतर तरीके से सामने आएगी।

विशेष सत्र को बताया ऐतिहासिक अवसर

पीएम मोदी ने कहा कि संसद का आगामी विशेष सत्र केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक अवसर है, जो देश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दशकों से लंबित इस मुद्दे को अब आगे बढ़ाने की जरूरत है, ताकि महिलाओं को उनका उचित अधिकार मिल सके।

सरकार इस सत्र के माध्यम से ऐसे कदम उठाने की तैयारी में है, जिससे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को संस्थागत रूप दिया जा सके।

देशभर से मिल रहा समर्थन

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अभियान’ के जरिए देशभर की महिलाओं का व्यापक समर्थन मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि करोड़ों माताएं और बहनें इस पहल के साथ जुड़ रही हैं और इसे सफल बनाने में अपनी भूमिका निभा रही हैं।

यह समर्थन इस बात का संकेत है कि देश की महिलाएं अब केवल मतदाता नहीं, बल्कि नीति निर्माण में भी अपनी भागीदारी चाहती हैं।

राजनीतिक और सामाजिक असर

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलता है, तो इसका असर केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा।

यह सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में भी सकारात्मक बदलाव ला सकता है। महिलाओं के नेतृत्व से जुड़े मुद्दे, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा, अधिक प्रभावी ढंग से सामने आ सकते हैं।

विपक्ष की नजर भी इस मुद्दे पर

हालांकि, इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। विपक्षी दल सरकार की मंशा और समय को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि सत्तापक्ष इसे ऐतिहासिक पहल बता रहा है।

आने वाले दिनों में संसद के विशेष सत्र के दौरान इस विषय पर व्यापक चर्चा और बहस होने की संभावना है।

कुल मिलाकर, ‘नारी शक्ति वंदन अभियान’ और संसद का विशेष सत्र देश की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ सकता है।

अगर यह पहल सफल होती है, तो भारत में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी एक नए स्तर पर पहुंच सकती है और लोकतंत्र और अधिक समावेशी बन सकता है।

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