
संसद के प्रस्तावित विशेष सत्र से पहले देश की राजनीति में माहौल गरमा गया है। महिला आरक्षण और उससे जुड़े विधायी प्रस्तावों पर जहां सरकार इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष लगातार इसके समय और मंशा पर सवाल उठा रहा है। इसी कड़ी में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने एक लेख के जरिए केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि महिला आरक्षण असली मुद्दा नहीं है, बल्कि इसके पीछे का असली एजेंडा परिसीमन है।
महिला आरक्षण पहले ही हो चुका है पारित
सोनिया गांधी ने अपने लेख में स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण को लेकर कोई नया विवाद नहीं है, क्योंकि यह कानून 2023 में ही पारित हो चुका है।
उन्होंने कहा कि उस समय विपक्ष ने मांग की थी कि इसे जल्द लागू किया जाए, लेकिन सरकार ने इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़ दिया। इसके चलते यह लागू नहीं हो सका।
अब सरकार एक बार फिर इस मुद्दे को उठाकर इसे संसद के विशेष सत्र में चर्चा के लिए ला रही है, जिससे इसकी मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
परिसीमन ही असली मुद्दा
सोनिया गांधी ने कहा कि सरकार की पूरी कवायद परिसीमन को लेकर है, न कि महिला आरक्षण को लेकर।
उनका आरोप है कि महिला आरक्षण का इस्तेमाल एक “नैरेटिव” बनाने के लिए किया जा रहा है, ताकि असली मुद्दे से ध्यान हटाया जा सके।
उन्होंने कहा कि परिसीमन एक बेहद संवेदनशील विषय है, जिसका सीधा असर देश के राजनीतिक संतुलन पर पड़ सकता है, इसलिए इसे जल्दबाजी में नहीं किया जाना चाहिए।
चुनाव के समय पर उठाए सवाल
उन्होंने यह भी कहा कि संसद का विशेष सत्र ऐसे समय बुलाया गया है जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में चुनावी माहौल अपने चरम पर है।
सोनिया गांधी के मुताबिक, इस समय सत्र बुलाने का उद्देश्य राजनीतिक लाभ लेना और विपक्ष को दबाव में लाना हो सकता है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के महत्वपूर्ण फैसले व्यापक चर्चा और सहमति के बाद ही लिए जाने चाहिए।
संघीय ढांचे पर पड़ सकता है असर
सोनिया गांधी ने परिसीमन को लेकर यह भी चिंता जताई कि इससे देश के संघीय ढांचे पर असर पड़ सकता है।
उनका कहना है कि अगर सीटों के पुनर्वितरण की प्रक्रिया जल्दबाजी में की गई, तो दक्षिणी राज्यों और छोटे राज्यों को नुकसान हो सकता है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल संख्या के आधार पर नहीं चलता, बल्कि उसमें संतुलन और न्याय भी जरूरी होता है।
सरकार के यू-टर्न पर सवाल
अपने लेख में उन्होंने सरकार के रुख में बदलाव पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले सरकार ने महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से जोड़कर लागू करने में देरी की, लेकिन अब अचानक इसे लेकर सक्रियता दिखाई जा रही है।
उन्होंने इसे “यू-टर्न” बताते हुए कहा कि महज कुछ महीनों में नीति बदलना कई सवाल खड़े करता है।
जनगणना में देरी पर भी चिंता
सोनिया गांधी ने 2021 की जनगणना में देरी को लेकर भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जनगणना में देरी के कारण कई योजनाओं का लाभ लोगों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाया।
उनका मानना है कि जनगणना के बिना परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा।
पारदर्शिता और सहमति की मांग
सोनिया गांधी ने कहा कि इतने बड़े संवैधानिक और राजनीतिक फैसलों में पारदर्शिता और सर्वदलीय सहमति बेहद जरूरी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिना एजेंडा साझा किए ही विशेष सत्र बुला रही है, जिससे इसकी प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि पहले सभी दलों के साथ बैठक कर सहमति बनाई जाए, उसके बाद ही ऐसे मुद्दों पर आगे बढ़ा जाए।
कुल मिलाकर, महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। जहां सरकार इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति का हिस्सा मान रहा है।
अब संसद के विशेष सत्र में होने वाली बहस के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि इन मुद्दों पर देश की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।


