
पटना, 18 मई 2026। राजधानी पटना के प्रतिष्ठित अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) के अत्याधुनिक सुरक्षा दावों और वार्डों की विधिक निगरानी प्रणालियों को धता बताते हुए रविवार को एक कैदी मरीज ने फिल्मी विधा में फरार होने का दुस्साहसिक प्रयास किया। पीएमसीएच के नवनिर्मित आलीशान भवन के भीतर संचालित एक विशेष वार्ड में भर्ती इस कैदी ने सुरक्षा बलों की नजरों से बचकर बाथरूम के रास्ते भागने की योजना बनाई थी। हालांकि, आधुनिक स्थापत्य कला (आर्किटेक्चर) की कमजोर कड़ियों से अनभिज्ञ होने के कारण उसका यह सनसनीखेज प्रयास न केवल पूरी तरह से विफल साबित हुआ, बल्कि वह खुद भी इस विडंबनापूर्ण हादसे में शारीरिक रूप से चोटिल हो गया।
कैदी ने जिस ऊपरी हिस्से को कंक्रीट की मजबूत छत समझकर अपनी विधिक कस्टडी तोड़ने का प्रयास किया था, वह दरअसल कमजोर प्लास्टर ऑफ पेरिस से निर्मित फॉल्स सीलिंग निकली। कैदी के शारीरिक वजन को सहन न कर पाने के कारण वह पूरी छत भरभराकर नीचे गिर गई, जिसके मलबे के साथ कैदी भी फर्श पर आ गिरा। इस अचानक हुए जोरदार धमाके और सीलिंग टूटने की घटना से अस्पताल परिसर के भीतर कतिपय घंटों के लिए सुरक्षात्मक आपातकाल जैसी अवस्थिति निर्मित हो गई और वहां मौजूद अन्य गंभीर मरीजों व उनके तीमारदारों के बीच किसी अनहोनी की आशंका को लेकर गहरा डर और दहशत फैल गया।
कोर्ट में पेशी के बाद लाया गया था नए भवन के रूम नंबर 120 में
इस पूरे घटनाक्रम के विधिक और प्रशासनिक पहलुओं की विस्तृत विवरणी साझा करते हुए अस्पताल के सुरक्षा प्रभारियों ने बताया कि फरार होने की चेष्टा करने वाले कैदी मरीज की पहचान वैशाली जिले के राघोपुर प्रक्षेत्र के निवासी महेश्वर सिंह के 25 वर्षीय पुत्र रोशन कुमार के रूप में स्थापित की गई है। रोशन कुमार को पूर्व में पटना शहरी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मालसलामी थाने में दर्ज एक गंभीर आपराधिक कांड के विलेखों के तहत विधिक रूप से गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेजा गया था। जेल के भीतर उसकी कतिपय शारीरिक और मानसिक अस्वस्थता को देखते हुए कारागार प्रशासन द्वारा उसे विधिक अभिरक्षा में इलाज के लिए पीएमसीएच के विशेष कैदी वार्ड में स्थानांतरित किया गया था।
रविवार, 17 मई 2026 को निर्धारित विधिक विधा के तहत स्थानीय पुलिस बल के जवान कैदी रोशन कुमार को सुरक्षा घेरे के बीच पटना सिविल कोर्ट में पेशी के लिए लेकर गए थे। न्यायालय की विधिक प्रविष्टि और तारीख की प्रणालियां पूरी होने के बाद, रविवार की दोपहर उसे वापस पीएमसीएच लाया गया। अस्पताल प्रशासन ने उसे नवनिर्मित बहुमंजिला भवन के प्रथम तल पर स्थित रूम नंबर 120 में दोबारा बेड आवंटित कर उपचार के लिए भर्ती करा दिया। कमरे के बाहर पुलिस के सशस्त्र जवानों की मुस्तैदी पूरी कड़ाई के साथ सुनिश्चित की गई थी ताकि कैदी की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके, परंतु रोशन के दिमाग में कुछ अलग ही खतरनाक प्लॉट चल रहा था।
कमजोर फॉल्स सीलिंग ने बिगाड़ा मर्डर प्लॉट जैसी फरार होने की योजना
अपराह्न के समय कैदी रोशन कुमार ने वार्ड में तैनात सुरक्षा गार्डों को शारीरिक विवशता का हवाला दिया और रूम नंबर 120 के भीतर ही बने आधुनिक अटैच बाथरूम में जाने की विधिक अनुमति मांगी। पुलिस जवानों ने सुरक्षा के सामान्य नियमों के तहत उसे बाथरूम के भीतर जाने दिया और खुद दरवाजे के बाहर मुस्तैद हो गए। बाथरूम के भीतर प्रवेश करते ही रोशन कुमार ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया और खिड़की के रास्ते बाहर की अवस्थिति का जायजा लेने लगा। उसने देखा कि खिड़की के ऊपरी हिस्से में वेंटिलेशन और पाइपलाइनों को छिपाने के लिए एक विस्तृत खाली जगह बनी हुई है।
रोशन कुमार ने बिना कोई समय गंवाए खिड़की के चौखट का सहारा लिया और ऊपर की तरफ चढ़ने की प्रविधि शुरू की। उसने बाथरूम के ऊपरी हिस्से में बनी आंतरिक छत को पूरी कड़ाई से पकड़ा और खुद को ऊपर खींच लिया। रोशन को लगा कि यह मुख्य भवन की कंक्रीट वाली छत का हिस्सा है जिसके सहारे वह वेंटिलेशन डक्ट से होते हुए अस्पताल के पिछले सुनसान रास्ते से भागने में पूरी तरह सफल हो जाएगा। परंतु, आधुनिक कंस्ट्रक्शन की प्रणालियों के तहत पाइपों को ढकने के लिए वहां केवल लोहे के पतले तारों और एंगलों के सहारे लटकाई गई जिप्सम बोर्ड की फॉल्स सीलिंग (False Ceiling) लगाई गई थी।
जैसे ही 25 वर्षीय रोशन ने अपने शरीर का पूरा भार उस फॉल्स सीलिंग पर डाला, वैसे ही कमजोर सीलिंग के एंगल्स उखड़ गए। एक तेज चरचराहट की आवाज के साथ पूरी फॉल्स सीलिंग ताश के पत्तों की तरह ढह गई। रोशन कुमार खुद को संभाल नहीं पाया और करीब दस फीट की ऊंचाई से सीलिंग के भारी मलबे, लोहे के एंगलों और मलबे के साथ सीधे बाथरूम के पक्के फर्श पर पीठ के बल अत्यंत वेग से आ गिरा।
अस्पताल के वार्डों में गूंजा धमाका, मरीजों और परिजनों के बीच मची भगदड़
रविवार की शांत दोपहर में पीएमसीएच के नए भवन के कमरा नंबर 120 से अचानक आई इस जोरदार तड़तड़ाहट और भारी मलबे के गिरने की आवाज से पूरा कॉरिडोर दहल उठा। बाथरूम के भीतर से कैदी रोशन कुमार के दर्द से कराहने और चीखने की आवाजें बाहर आने लगीं। दरवाजे के बाहर तैनात पुलिस के जवान इस अप्रत्याशित आवाज को सुनकर सकपका गए और उन्होंने तुरंत राइफलों के विन्यास के साथ बाथरूम के दरवाजे को जोर-जोर से पीटना शुरू किया। अंदर से कोई विधिक रिस्पॉन्स न मिलने पर जवानों ने कड़ा बल प्रयोग करते हुए धक्का देकर दरवाजे की चटकनी को तोड़ दिया।
बाथरूम के भीतर का दृश्य अत्यंत विचलित करने वाला था; पूरी छत का हिस्सा नीचे गिरा पड़ा था और धूल के गुबार के बीच कैदी रोशन मलबे में दबा हुआ छटपटा रहा था। इस बीच, बगल के कमरों और वार्डों में भर्ती अन्य बीमार मरीजों और उनके साथ आए परिजनों को लगा कि शायद नवनिर्मित आलीशान सरकारी भवन का कोई मुख्य हिस्सा या पिलर भरभराकर गिर गया है। इस विसंगतिपूर्ण डर के कारण पूरे फ्लोर पर अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया। सलाइन की बोतलें और व्हीलचेयर लेकर लोग अपने मरीजों को बचाने के लिए सीढ़ियों और लिफ्ट की तरफ भागने लगे, जिससे अस्पताल के भीतर कुछ समय के लिए पूरी व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने तुरंत लाउडस्पीकर और वॉयस सर्विलांस के माध्यम से लोगों को आश्वस्त किया कि यह कोई भूकंप या भवन का गिरना नहीं है, बल्कि एक कैदी द्वारा भागने की कोशिश के कारण हुआ हादसा है, तब जाकर भीड़ शांत हुई।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव रंजन सिंह का कड़ा रुख, टीओपी प्रभारी को विधिक निर्देश
इस दुस्साहसिक और सुरक्षा में सेंध लगाने वाली घटना की भनक मिलते ही पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव रंजन सिंह तुरंत प्रशासनिक अधिकारियों और मुख्य सुरक्षा सलाहकारों के साथ रूम नंबर 120 पहुंचे। उन्होंने घटना स्थल की भौतिक कड़ियों का निरीक्षण किया और मलबे से निकाले गए घायल कैदी रोशन कुमार की शारीरिक स्थिति की जांच डॉक्टरों की टीम से कराई। गिरने के कारण रोशन की पीठ, कूल्हे और पैरों की हड्डियों में गंभीर चोटें आई हैं, जिसके कारण वह विधिक रूप से खड़े होने की स्थिति में भी नहीं रहा। डॉक्टरों ने उसे तुरंत कड़े मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रख दिया है।
मामले की प्रशासनिक समीक्षा करते हुए पीएमसीएच अधीक्षक डॉ. राजीव रंजन सिंह ने इस विसंगति को एक गंभीर सुरक्षा चूक मानते हुए संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को कड़े विधिक निर्देश जारी किए हैं। अधीक्षक डॉ. राजीव रंजन सिंह ने अस्पताल के मुख्य सुरक्षा विंग को आदेश दिया है कि कैदी मरीज के इस गैर-कानूनी तरीके से भागने के प्रयास, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और खुद को घायल करने के इस पूरे कृत्य की लिखित आधिकारिक रिपोर्ट तुरंत पीएमसीएच थाना आउटपोस्ट (TOP) के प्रभारी को हस्तगत कराई जाए। उन्होंने टीओपी प्रभारी को निर्देश दिया है कि इस संदर्भ में सुरक्षा कड़ियों को मजबूत करते हुए कैदी के खिलाफ कस्टडी से फरार होने के प्रयास की एक नई और पृथक प्राथमिकी दर्ज की जाए।
कैदी की मानसिक अस्वस्थता और आत्मघाती प्रवृत्तियों का हुआ खुलासा
अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव रंजन सिंह ने इस पूरे मामले में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील चिकित्सकीय पहलू को उजागर करते हुए बताया कि आरोपी कैदी रोशन कुमार केवल एक शातिर अपराधी नहीं है, बल्कि वह गंभीर रूप से मानसिक बीमारी (मेंटल इलनेस) से भी ग्रसित है। मनोचिकित्सकों की टीम द्वारा पूर्व में किए गए परीक्षणों के विलेखों के अनुसार, रोशन कुमार के भीतर संवेगात्मक असंतुलन और आत्मघाती प्रवृत्तियां (सेल्फ-हार्म टेंडेंसी) अत्यधिक तीव्र स्तर पर पाई गई हैं। वह अक्सर सामान्य परिस्थितियों में भी खुद को गंभीर शारीरिक नुकसान पहुंचाने या आत्महत्या करने के विसंगतिपूर्ण प्रयास करता रहता है।
अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि रविवार को उसके द्वारा किया गया यह कृत्य जहां एक तरफ जेल कस्टडी से भागने की एक सोची-समझी आपराधिक चाल प्रतीत होती है, वहीं दूसरी तरफ उसकी मानसिक रुग्णता और असंतुलित सोच का भी एक प्रत्यक्ष साक्ष्य है, क्योंकि कोई भी सामान्य व्यक्ति प्लास्टर ऑफ पेरिस की कमजोर फॉल्स सीलिंग को कंक्रीट की मजबूत छत मानकर उस पर चढ़ने का जोखिम नहीं उठाएगा। डॉ. राजीव रंजन सिंह ने निर्देश दिया है कि अब रोशन कुमार के वार्ड के बाहर पुलिस सुरक्षा बलों की संख्या को दोगुना किया जाए और उसकी चिकित्सकीय देखरेख के लिए एक विशेष वार्ड बॉय को भी प्रतिनियुक्त किया जाए जो चौबीसों घंटे उसकी गतिविधियों पर नजर रखेगा ताकि वह उपचार के दौरान दोबारा खुद को या अस्पताल के अन्य कर्मचारियों को कोई विधिक नुकसान न पहुंचा सके। पीएमसीएच प्रशासन अब नए भवन के सभी कैदी वार्डों के बाथरूमों में सुरक्षा जाली लगाने की तकनीकी प्रविधि पर विचार कर रहा है।


