पटनाः बिहार बंद के दौरान मंच पर नहीं चढ़ पाए पप्पू यादव, दो बार मंच पर चढ़ने की कोशिश नाकाम, सुरक्षाकर्मियों ने रोक दिया

पटना, 09 जुलाई 2025: बिहार बंद के दौरान पटना के आयकर गोलंबर के पास आयोजित महागठबंधन की सभा में उस वक्त अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गई, जब निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव मंच पर चढ़ने का प्रयास करते हुए रोके गए। दो बार मंच पर चढ़ने की कोशिश करने के बावजूद उन्हें जगह नहीं दी गई। दोनों बार सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक दिया, दूसरी बार तो हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा, जिससे पप्पू यादव मुश्किल से संतुलन बनाए रख सके।

क्या हुआ था घटनास्थल पर?
बिहार बंद के समर्थन में महागठबंधन द्वारा एक ट्रक को मंच का रूप देकर नेता व कार्यकर्ताओं की सभा बुलाई गई थी। पप्पू यादव पूरी तैयारी और समर्थकों के साथ पहुंचे थे, लेकिन उन्हें मंच साझा करने का निमंत्रण नहीं मिला था।

पहले प्रयास में सुरक्षाकर्मियों ने इशारे से समझाया कि सूची में उनका नाम नहीं है, वे लौट गए। लेकिन कुछ मिनटों बाद उन्होंने दोबारा मंच पर चढ़ने की कोशिश की, इस बार सुरक्षाकर्मियों ने हल्का बल प्रयोग कर उन्हें मंच से दूर किया। उनके भारी शरीर के कारण संतुलन बिगड़ा लेकिन कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुई।

कन्हैया कुमार भी हुए रोके गए
इससे पहले कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार भी मंच पर चढ़ने की कोशिश में रोके गए थे। सुरक्षाकर्मियों के रोकने के बाद वे पीछे हट गए और दोबारा मंच पर चढ़ने की कोशिश नहीं की।


मंच पर किन नेताओं को मिली जगह?

बिहार बंद के समर्थन में आयोजित सभा के मंच पर महागठबंधन के चुनिंदा शीर्ष नेताओं को ही स्थान मिला। इनमें शामिल थे:

  • कांग्रेस:
    • राहुल गांधी (पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष)
    • राजेश राम (प्रदेश अध्यक्ष)
    • डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह (कार्यसमिति सदस्य)
    • शकील अहमद खान (विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता)
    • डॉ. मदन मोहन झा (विधान परिषद में कांग्रेस नेता)
  • राजद:
    • तेजस्वी यादव (विधानसभा में विपक्ष के नेता)
    • मंगनीलाल मंडल (प्रदेश अध्यक्ष)
    • संजय यादव (राज्यसभा सदस्य)
  • वाम दल:
    • डी. राजा (भाकपा महासचिव)
    • दीपंकर भट्टाचार्य (भाकपा माले महासचिव)
    • एम. ए. बेबी (माकपा महासचिव)
  • अन्य:
    • मुकेश सहनी (विकासशील इंसान पार्टी अध्यक्ष)

पप्पू यादव को क्यों नहीं मिली जगह?
महागठबंधन में औपचारिक रूप से शामिल न होने के कारण राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को आमंत्रण सूची में नहीं रखा गया था। हालांकि वे स्वयं को विपक्षी एकता का समर्थक बताते हैं और कई बार विपक्षी कार्यक्रमों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहे हैं।


बिहार बंद की सियासी तस्वीर में पप्पू यादव की मंच से अनुपस्थिति और दो बार रोके जाने की घटना चर्चा का विषय बन गई है। इससे विपक्ष की अंदरूनी राजनीति और समन्वय पर सवाल भी उठे हैं। आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था सख्त रही और मंच पर केवल पूर्व निर्धारित नेताओं को ही प्रवेश दिया गया।


 

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