
पटना/पालीगंज। बिहार की राजधानी पटना के ग्रामीण इलाके पालीगंज में एक ऐसी घृणित करतूत का खुलासा हुआ है जिसने न केवल समाज को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि डिजिटल युग की अंधेरी गलियों की सच्चाई भी सामने ला दी है। पटना साइबर पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है जो मासूम बच्चियों के अश्लील वीडियो बनाकर और उन्हें एडिट कर सोशल मीडिया पर वायरल करता था। आरोपित की पहचान पालीगंज के अख्तियारपुर निवासी नितिश किशोर कौशल (32 वर्ष) के रूप में हुई है। पुलिस ने जब आरोपित के मोबाइल को खंगाला तो जांच अधिकारियों के भी होश उड़ गए; उसके फोन में 100 से अधिक बच्चियों के आपत्तिजनक और अश्लील वीडियो पाए गए। शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को पुलिस ने तमाम कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए आरोपित को जेल भेज दिया है। यह गिरफ्तारी पटना साइबर पुलिस की सक्रियता और तकनीक के बेहतर तालमेल का परिणाम मानी जा रही है।
साइबर सेल की बड़ी कार्रवाई: अख्तियारपुर में आधी रात को दबिश
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब पटना साइबर पुलिस को इंटरनेट निगरानी (Internet Monitoring) के दौरान संदिग्ध गतिविधियों के संकेत मिले। पुलिस को सूचना मिली थी कि पालीगंज क्षेत्र का एक व्यक्ति लगातार ‘चाइल्ड पोर्नोग्राफी’ (Child Pornography) से संबंधित सामग्री इंटरनेट पर अपलोड कर रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएसपी सह साइबर थाना प्रभारी नीतीश चंद्र धारिया ने तत्काल एक विशेष टीम का गठन किया। इस टीम का नेतृत्व सब-इंस्पेक्टर (SI) अनुज कुमार को सौंपा गया।
साइबर सेल ने सबसे पहले उस इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) एड्रेस और सोशल मीडिया प्रोफाइल को ट्रैक किया जिसके जरिए ये वीडियो अपलोड किए जा रहे थे। तकनीकी अनुसंधान और डिजिटल फुटप्रिंट्स का पीछा करते हुए पुलिस आरोपित के घर तक पहुँच गई। जांच में पता चला कि आरोपित का लोकेशन पालीगंज थाना क्षेत्र के अख्तियारपुर में है। इसके बाद साइबर पुलिस ने स्थानीय पालीगंज थाना की पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर एक संयुक्त टीम बनाई और चिन्हित घर पर अचानक छापेमारी की। पुलिस की इस दबिश ने आरोपित को संभलने का मौका तक नहीं दिया और उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया।
मोबाइल बना ‘अश्लीलता का भंडार’: एडिटिंग और टेलीग्राम का खेल
गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने नितिश किशोर कौशल के पास से बरामद मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच शुरू की, तो अश्लीलता का एक बड़ा भंडार सामने आया। मोबाइल की गैलरी और छिपे हुए फोल्डर्स में 100 से अधिक मासूम बच्चियों के ऐसे वीडियो मिले जिन्हें देखकर कोई भी सभ्य व्यक्ति सिहर जाए।
पूछताछ के दौरान आरोपित ने अपना जुर्म स्वीकार करते हुए अपने काम करने के तरीके (Modus Operandi) का खुलासा किया। उसने बताया कि वह विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से बच्चियों के सामान्य वीडियो डाउनलोड करता था। इसके बाद वह आधुनिक एडिटिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर उन वीडियो को अश्लील और आपत्तिजनक स्वरूप प्रदान करता था। इन एडिटेड वीडियो को वह अपने द्वारा संचालित एक गुप्त टेलीग्राम (Telegram) चैनल पर अपलोड करता था। टेलीग्राम चैनल के जरिए वह इन वीडियो को दुनिया भर के उन लोगों तक पहुँचाता था जो इस तरह की बीमार मानसिकता के शिकार हैं। पुलिस अब उस टेलीग्राम चैनल के सब्सक्राइबर्स और उससे जुड़े अन्य लिंक की भी तलाश कर रही है ताकि इस रैकेट की जड़ों तक पहुँचा जा सके।
दो बेटियों का पिता ही निकला समाज का दुश्मन: विरोधाभासी व्यक्तित्व
इस घटना का सबसे दुखद और चौंकाने वाला पहलू आरोपित का पारिवारिक और सामाजिक पृष्ठभूमि है। 32 वर्षीय नितिश किशोर कौशल कोई बेरोजगार या अनपढ़ अपराधी नहीं है। वह एक शादीशुदा व्यक्ति है और एक प्रतिष्ठित निजी कंपनी में नौकरी करता है। समाज में उसकी छवि एक सामान्य कामकाजी व्यक्ति की थी। लेकिन सबसे शर्मनाक बात यह है कि आरोपित की खुद की दो छोटी बेटियां हैं।
एक ऐसा व्यक्ति जिसके घर में खुद दो बेटियां हों, वह दूसरी मासूम बच्चियों के साथ इस तरह की दरिंदगी और अश्लीलता कैसे कर सकता है, यह सवाल पूरे पालीगंज में चर्चा का विषय बना हुआ है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे अपराधी अक्सर ‘दोहरे व्यक्तित्व’ (Split Personality) के शिकार होते हैं, जहाँ वे समाज के सामने एक आदर्श पिता और कर्मचारी होने का ढोंग करते हैं, जबकि डिजिटल दुनिया में वे अपनी कुत्सित इच्छाओं को पूरा करने के लिए मासूमों का शिकार करते हैं। पुलिस आरोपित के पिछले रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या उसने स्थानीय स्तर पर भी किसी बच्ची के साथ कोई प्रत्यक्ष अपराध किया है।
पॉक्सो एक्ट और चाइल्ड पोर्नोग्राफी: कानूनी शिकंजा हुआ सख्त
पटना साइबर पुलिस ने आरोपित के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की है। डीएसपी नीतीश चंद्र धारिया के अनुसार, आरोपित पर पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और आईटी एक्ट की धारा 67-बी के तहत मामला दर्ज किया गया है। भारत के कानून में ‘चाइल्ड पोर्नोग्राफी’ को देखना, उसे स्टोर करना या उसे प्रसारित करना एक गैर-जमानती और गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
- आईटी एक्ट 67-बी: इस धारा के तहत बच्चों के अश्लील वीडियो या चित्र बनाने, उन्हें प्रसारित करने या डिजिटल माध्यम से वितरित करने पर 5 से 7 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
- पॉक्सो एक्ट: बच्चियों की निजता का उल्लंघन और उन्हें अश्लील कार्यों के लिए इस्तेमाल करने पर इस एक्ट के तहत उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।
पुलिस ने बरामद मोबाइल को मुख्य साक्ष्य (Primary Evidence) के रूप में जब्त कर लिया है और उसे विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि वे इस मामले में स्पीडी ट्रायल की मांग करेंगे ताकि आरोपित को उसके किए की कड़ी से कड़ी सजा मिल सके और समाज में एक कड़ा संदेश जाए।
साइबर अपराध और सामाजिक सुरक्षा: समय की मांग
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल किस हद तक गिर सकता है। डीएसपी नीतीश चंद्र धारिया ने आम जनता और विशेषकर अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर पैनी नजर रखें।
चाइल्ड पोर्नोग्राफी केवल एक कानूनी अपराध नहीं है, बल्कि यह मासूम बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए एक बड़ा खतरा है। अक्सर लोग अनजाने में ऐसे वीडियो को ग्रुप्स में साझा करते हैं या देखते हैं, जो उन्हें भी कानून के शिकंजे में ला सकता है। साइबर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़ा कोई भी कंटेंट अगर आपके पास आता है, तो उसे तुरंत डिलीट करें और पुलिस को सूचित करें। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी ऐसे कंटेंट को तुरंत ‘रिपोर्ट’ करने की सुविधा होती है, जिसका इस्तेमाल हर जागरूक नागरिक को करना चाहिए।
अपराधियों के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’
पालीगंज की यह घटना पटना पुलिस के लिए एक बड़ी कामयाबी है, लेकिन यह समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है। नितिश किशोर कौशल जैसे लोग समाज के भीतर छिपे हुए वे दीमक हैं जो आने वाली पीढ़ी की नींव को खोखला कर रहे हैं। जिस तरह से साइबर पुलिस ने तकनीक का इस्तेमाल कर आरोपित को दबोचा है, वह सराहनीय है।
The Voice of Bihar (VOB) की टीम प्रशासन की इस कार्रवाई का पुरजोर समर्थन करती है। हमारा मानना है कि ऐसे अपराधियों के लिए समाज और कानून में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। एक तरफ हम डिजिटल क्रांति की ओर बढ़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ हमें ऐसी मानसिक बीमारियों और अपराधों से लड़ने के लिए भी तैयार रहना होगा। पालीगंज की जनता ने पुलिस की इस कार्रवाई पर संतोष व्यक्त किया है, लेकिन हर माता-पिता के मन में अब अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर एक अनजाना डर जरूर बैठ गया है। उम्मीद है कि कानून अपनी पूरी ताकत के साथ इस ‘डिजिटल दरिंदे’ को सजा दिलाएगा।


