
मुजफ्फरपुर/छपरा। बिहार में रेल यात्रियों की सुरक्षा और अपराधियों पर नकेल कसने के दावों के बीच मुजफ्फरपुर रेल पुलिस प्रमंडल से एक बड़ी लापरवाही की खबर सामने आई है। रेल पुलिस की अभिरक्षा से एक शातिर अपराधी के चकमा देकर फरार हो जाने के मामले में पुलिस प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। रविवार, 12 अप्रैल 2026 को मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, रेल एसपी बीना कुमारी ने इस मामले में प्रथम दृष्टया दोषी पाई गई प्रहरी (सिपाही) शिल्पी कुमारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई सोनपुर रेल डीएसपी द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। इसके साथ ही, छपरा रेल थाना के प्रभारी शाहीद अनवर अंसारी की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं और उनसे स्पष्टीकरण (Show Cause) मांगा गया है। इस घटना ने एक बार फिर पुलिस अभिरक्षा की सुरक्षा व्यवस्था और जवानों की मुस्तैदी पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
क्या है पूरा मामला: छपरा स्टेशन पर हुई थी लूट
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत छपरा रेलवे स्टेशन पर हुई एक चोरी की घटना से हुई थी। बांका जिले के बाराहाट थाना क्षेत्र का रहने वाला शातिर अपराधी सोनू कुमार माली ट्रेनों और स्टेशनों पर यात्रियों को निशाना बनाने के लिए कुख्यात रहा है। उसने छपरा स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रही एक महिला यात्री, उर्मिला देवी, को अपना निशाना बनाया था। सोनू माली ने बड़ी ही सफाई से उर्मिला देवी के गले से सोने की दो ‘जिउतिया’ (बिहार में महिलाओं द्वारा पहना जाने वाला पारंपरिक आभूषण) झपट ली थी।
पीड़ित महिला के शोर मचाने और जीआरपी की तत्परता से सोनू माली को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस को उम्मीद थी कि इस गिरफ्तारी से क्षेत्र में होने वाली गहनों की चोरी के कई अन्य मामलों का खुलासा होगा। आरोपी को कानूनी प्रक्रिया के तहत मुजफ्फरपुर रेल पुलिस की अभिरक्षा में रखा गया था, जहाँ से उसे जेल भेजने या आगे की पूछताछ के लिए ले जाना था। लेकिन, इसी दौरान पुलिस की मुस्तैदी को धता बताते हुए सोनू माली फरार होने में सफल रहा।
सुरक्षा में सेंध: कैसे फरार हुआ शातिर सोनू माली?
पुलिस अभिरक्षा से किसी अपराधी का फरार होना केवल एक व्यक्ति की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरी सुरक्षा प्रणाली की विफलता मानी जाती है। बताया जा रहा है कि आरोपी सोनू माली को मुजफ्फरपुर रेल पुलिस के जवानों की निगरानी में रखा गया था। प्रहरी शिल्पी कुमारी की ड्यूटी उस समय आरोपी की निगरानी करने की थी। सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा में उस समय सेंध लगी जब जवानों का ध्यान थोड़ा भटका या सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया।
सोनू माली जैसे शातिर अपराधी अक्सर ऐसे ही मौकों की तलाश में रहते हैं। उसने पुलिस की ढिलाई का फायदा उठाया और चकमा देकर रफूचक्कर हो गया। कैदी के फरार होने की सूचना मिलते ही रेल पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में आसपास के इलाकों में नाकेबंदी की गई और आरोपी की तलाश शुरू हुई, लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं लगा। इस बड़ी चूक के बाद रेल एसपी ने तुरंत मामले की जांच के आदेश दिए।
सोनपुर रेल डीएसपी की जांच में लापरवाही की पुष्टि
घटना की गंभीरता को देखते हुए रेल एसपी बीना कुमारी ने सोनपुर रेल डीएसपी को इस मामले की विस्तृत जांच करने और जिम्मेदारी तय करने का निर्देश दिया था। डीएसपी ने अपनी जांच में पाया कि जिस समय आरोपी फरार हुआ, उस समय ड्यूटी पर तैनात सिपाही शिल्पी कुमारी का आचरण और मुस्तैदी मानकों के अनुरूप नहीं थी। जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट किया गया कि यदि प्रहरी सतर्क रहतीं, तो आरोपी के पास भागने का कोई अवसर नहीं होता।
जांच रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया कि थाना स्तर पर भी कैदियों की निगरानी के प्रोटोकॉल में कुछ कमियां थीं। डीएसपी की इसी रिपोर्ट को आधार बनाते हुए रेल एसपी ने अनुशासनहीनता और कार्य में घोर लापरवाही के आरोप में शिल्पी कुमारी को सस्पेंड करने का आदेश जारी किया। पुलिस विभाग में निलंबन की इस कार्रवाई से अन्य पुलिसकर्मियों के बीच भी हड़कंप मचा हुआ है।
थाना प्रभारी से मांगा गया स्पष्टीकरण: जवाबदेही तय करने की कोशिश
रेल एसपी बीना कुमारी केवल सिपाही पर कार्रवाई कर चुप नहीं बैठी हैं। उन्होंने इस मामले में छपरा रेल थाना के प्रभारी शाहीद अनवर अंसारी से भी जवाब-तलब किया है। थाना प्रभारी से पूछा गया है कि उनके नेतृत्व में इस तरह की घटना कैसे घटी और ड्यूटी चार्ट के अनुसार कैदी की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं थे?
शाहिद अनवर अंसारी को एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपना स्पष्टीकरण रेल एसपी कार्यालय में जमा करना होगा। यदि उनके जवाब से विभाग संतुष्ट नहीं होता है, तो उन पर भी गाज गिर सकती है। रेल एसपी का मानना है कि सिपाही के साथ-साथ थाना स्तर पर पर्यवेक्षण (Supervision) की भी कमी रही है। पुलिस महकमे में यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि अधीनस्थ कर्मचारियों की गलती के लिए ऊपर के अधिकारी भी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
रेल एसपी बीना कुमारी का सख्त संदेश: “लापरवाही बर्दाश्त नहीं”
कार्रवाई की पुष्टि करते हुए रेल एसपी बीना कुमारी ने कड़े शब्दों में कहा कि पुलिस की वर्दी पहनकर ड्यूटी के दौरान किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा, “पुलिस का काम जनता की सुरक्षा करना और अपराधियों को कानून के कटघरे में खड़ा करना है। यदि पुलिस की अभिरक्षा से ही अपराधी भागने लगेंगे, तो जनता का भरोसा उठ जाएगा।”
एसपी ने मुजफ्फरपुर और छपरा रेल प्रमंडल के सभी पुलिसकर्मियों को चेतावनी दी है कि वे अपनी ड्यूटी को पूरी गंभीरता से लें। विशेष रूप से कैदियों की पेशी या उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते समय ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ (SOP) का कड़ाई से पालन किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सोनू माली की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं और उसे जल्द ही दोबारा सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
बांका का सोनू माली: पुलिस के लिए नई चुनौती
फरार आरोपी सोनू कुमार माली बांका जिले के बाराहाट का रहने वाला है। बांका और आसपास के जिलों में उसके खिलाफ चोरी और छिनतई के कई मामले पहले से दर्ज हो सकते हैं। उसके फरार होने से न केवल मुजफ्फरपुर और छपरा, बल्कि उसके गृह जिले बांका की पुलिस को भी सतर्क कर दिया गया है। पुलिस को डर है कि बाहर रहने पर वह दोबारा अपराधिक वारदातों को अंजाम दे सकता है।
बाराहाट पुलिस को भी इस मामले की सूचना दे दी गई है ताकि उसके पैतृक गांव या संभावित ठिकानों पर नजर रखी जा सके। सोनू माली का फरार होना रेल यात्रियों, विशेषकर महिलाओं के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि वह गहनों की चोरी में माहिर है। छपरा स्टेशन पर जिस तरह उसने उर्मिला देवी के गले से जिउतिया छीनी थी, वह उसकी बेखौफी को दर्शाता है।
यात्री सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही पर सवाल
रेलवे स्टेशनों पर बढ़ती भीड़ और त्यौहारों के सीजन के बीच इस तरह की घटनाएं यात्रियों में असुरक्षा का भाव पैदा करती हैं। बिहार की रेल पुलिस अक्सर संसाधनों की कमी का रोना रोती है, लेकिन यह मामला सीधे तौर पर मानवीय चूक और लापरवाही का है। सोने की दो जिउतिया चोरी होना किसी भी आम परिवार के लिए बड़ी आर्थिक और भावनात्मक क्षति होती है। जब पुलिस ऐसे अपराधियों को पकड़कर भी छोड़ (फरार होना) देती है, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजमी है।
इस निलंबन और स्पष्टीकरण की कार्रवाई ने प्रशासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को तो दर्शाया है, लेकिन असली सफलता तब मिलेगी जब फरार सोनू माली दोबारा पकड़ लिया जाए। यात्री संगठनों ने मांग की है कि प्रमुख स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी बढ़ाई जाए और कैदी वैन व अभिरक्षा कक्षों की सुरक्षा को और अधिक आधुनिक बनाया जाए।
प्रशासनिक शुचिता का इम्तिहान
मुजफ्फरपुर रेल पुलिस द्वारा ली गई यह त्वरित कार्रवाई स्वागत योग्य है। सिपाही शिल्पी कुमारी का निलंबन यह साबित करता है कि अब छोटे कर्मचारियों को ढाल बनाकर बड़े अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच पाएंगे। रेल एसपी बीना कुमारी की यह सख्ती विभाग में अनुशासन वापस लाने की एक बड़ी कोशिश है।
अब देखना यह होगा कि छपरा रेल थाना प्रभारी अपने स्पष्टीकरण में क्या दलील देते हैं और पुलिस सोनू माली को कितनी जल्दी पकड़ पाती है। बांका के इस शातिर अपराधी का फरार होना मुजफ्फरपुर रेल पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती और सबक दोनों है। उम्मीद है कि इस घटना के बाद रेल पुलिस की कार्यशैली में सुधार आएगा और यात्री सुरक्षित महसूस करेंगे।


