
पटना। राजधानी के सबसे व्यस्त और रिहायशी इलाकों में शुमार कंकड़बाग थाना क्षेत्र के अशोक नगर में सोमवार की दोपहर एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई, जिसने समाज की उस कुरूप सच्चाई को फिर से उजागर कर दिया है जिसे हम ‘दहेज’ कहते हैं। एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया है, बल्कि कानूनी और सामाजिक न्याय व्यवस्था के सामने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अशोक नगर जैसे पॉश इलाके में रहने वाले विवेक उपाध्याय की पत्नी पल्लवी उर्फ लक्ष्मी का शव उनके घर के कमरे में फंदे से लटका हुआ मिला। यह घटना तब और भी संदेहास्पद हो गई जब मायके पक्ष के पहुँचने से पहले ही पति विवेक उपाध्याय समेत ससुराल के तमाम सदस्य घर छोड़कर फरार हो गए। मायके पक्ष का आरोप है कि शादी के 10 साल बीत जाने के बाद भी दहेज की मांग खत्म नहीं हुई थी और इसी लालच ने पल्लवी की जान ले ली। पटना पुलिस अब इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है कि यह महज एक आत्महत्या है या फिर सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या।
अशोक नगर में पसरा मातम: बंद कमरे में मिला पल्लवी का शव
सोमवार की दोपहर जब कंकड़बाग पुलिस को अशोक नगर के एक घर में सुसाइड की सूचना मिली, तो इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस जब मौके पर पहुँची तो देखा कि कमरे के भीतर पल्लवी का शव फंदे से झूल रहा था। घर के भीतर सन्नाटा पसरा हुआ था और कोई भी सदस्य वहां मौजूद नहीं था। पुलिस ने तुरंत घटनास्थल की संवेदनशीलता को देखते हुए एफएसएल (Forensic Science Laboratory) की टीम को बुलाया। फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने कमरे से साक्ष्य जुटाए, फंदे की ऊंचाई, पैरों की स्थिति और शरीर पर मौजूद अन्य निशानों का बारीकी से निरीक्षण किया।
पल्लवी उर्फ लक्ष्मी की पहचान विवेक उपाध्याय की पत्नी के रूप में हुई। पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह मामला आत्महत्या का लग सकता है, लेकिन जिस तरह से ससुराल के लोग मौके से गायब मिले, वह किसी बड़ी आपराधिक साजिश की ओर इशारा करता है। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही समय और कारणों का खुलासा हो सकेगा।
10 साल बाद भी दहेज का दंश: रोहतास के पिता का छलका दर्द
इस घटना की खबर मिलते ही मृतका के पिता वीरेंद्र पांडे, जो रोहतास जिले के बड़काडीह के रहने वाले हैं, अपने परिजनों के साथ पटना पहुँचे। अपनी बेटी के बेजान शरीर को देखकर पिता का कलेजा फट पड़ा। वीरेंद्र पांडे ने कंकड़बाग थाने में दिए गए अपने बयान में ससुराल पक्ष पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि पल्लवी और विवेक की शादी को 10 साल बीत चुके थे। समाज में अक्सर यह माना जाता है कि शादी के कुछ वर्षों बाद रिश्ते स्थिर हो जाते हैं और दहेज जैसी कुरीतियाँ पीछे छूट जाती हैं, लेकिन पल्लवी के मामले में ऐसा नहीं हुआ।
पिता का आरोप है कि पिछले एक दशक से पल्लवी को लगातार दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था। उन्होंने रुंधे गले से बताया कि दामाद और उसके घरवाले बार-बार नई मांगों के साथ पल्लवी को मानसिक और शारीरिक रूप से टॉर्चर करते थे। वीरेंद्र पांडे के अनुसार, “हमने अपनी हैसियत से बढ़कर शादी में खर्च किया था, लेकिन उनकी भूख कभी शांत नहीं हुई। 10 साल बाद भी वे लोग कुछ न कुछ मांगते रहते थे। मेरी बेटी ने सब कुछ सह लिया ताकि उसका घर बसा रहे, लेकिन आखिर में उन्होंने उसे मार ही डाला।” मायके पक्ष का स्पष्ट कहना है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या है, जिसे आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को फंदे से लटकाया गया है।
ससुराल पक्ष की ‘फरारी’ ने बढ़ाया संदेह: पुलिस की छापेमारी तेज
कानून की नजर में किसी भी संदिग्ध मौत के मामले में परिजनों का व्यवहार बहुत मायने रखता है। पल्लवी की मौत के बाद पति विवेक उपाध्याय और उसके परिवार का घर से भाग जाना पुलिस की जांच का सबसे मुख्य बिंदु बन गया है। कंकड़बाग पुलिस का कहना है कि यदि यह एक सामान्य आत्महत्या होती, तो परिवार के सदस्य पुलिस को सूचित करते और शव के पास मौजूद होते। उनका भागना यह दर्शाता है कि उन्हें अपनी संलिप्तता का डर था या फिर वे साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश कर रहे थे।
पटना के एसएसपी के निर्देश पर कंकड़बाग पुलिस की विशेष टीम गठित की गई है जो फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। पुलिस विवेक उपाध्याय के मोबाइल लोकेशन और उसके करीबियों के कॉल रिकॉर्ड्स खंगाल रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि आरोपियों के शहर छोड़कर भागने की संभावना है, जिसके लिए सीमाओं पर भी चौकसी बढ़ा दी गई है। मायके पक्ष ने विवेक के अलावा उसके माता-पिता और अन्य करीबी रिश्तेदारों को भी नामजद किया है।
एफएसएल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी जांच की कड़ियाँ
पल्लवी की मौत के पीछे का सच अब पूरी तरह से वैज्ञानिक रिपोर्टों पर निर्भर है। एफएसएल की टीम ने कमरे से जो फिंगरप्रिंट्स और अन्य साक्ष्य जुटाए हैं, उनसे यह पता चलेगा कि घटना के वक्त कमरे में पल्लवी के अलावा और कौन मौजूद था। अक्सर दहेज हत्या के मामलों में शरीर पर संघर्ष के निशान मिलते हैं, जिन्हें पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टर बारीकी से देखते हैं। यदि पल्लवी के शरीर पर फांसी के फंदे के निशान के अलावा कोई अन्य चोट, खरोंच या आंतरिक इंजरी मिलती है, तो यह हत्या की पुष्टि कर देगा।
कंकड़बाग थानाध्यक्ष ने बताया कि वे पोस्टमार्टम रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसके साथ ही पल्लवी के मोबाइल फोन को भी जांच के लिए भेजा गया है। मोबाइल के चैट और हालिया कॉल हिस्ट्री से यह पता चल सकता है कि मौत से पहले उसकी अपने पति या मायके वालों से क्या बातचीत हुई थी। क्या उसने किसी को अपनी जान को खतरा होने का संदेश भेजा था? इन सवालों के जवाब मिलते ही पुलिस की चार्जशीट और मजबूत हो जाएगी।
शहरी परिवेश में दहेज का जहर: एक सामाजिक विमर्श
पटना के अशोक नगर जैसे विकसित और शिक्षित इलाके में दहेज के नाम पर एक विवाहिता की जान जाना समाज के लिए शर्मनाक है। यह घटना साबित करती है कि दहेज का दानव केवल ग्रामीण या कम शिक्षित इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहरों के पॉश इलाकों में भी यह अपनी जड़ें जमाए हुए है। 10 साल की शादीशुदा जिंदगी में पल्लवी ने निश्चित रूप से कई उतार-चढ़ाव देखे होंगे, लेकिन अंततः वह इस लालची व्यवस्था की भेंट चढ़ गई।
महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक समाज में लड़के के परिवार को ‘ऊपर’ और लड़की के परिवार को ‘झुकने वाला’ माना जाता रहेगा, तब तक ऐसी घटनाएँ रुकेंगी नहीं। 10 साल बाद दहेज की मांग का होना यह दर्शाता है कि ससुराल पक्ष ने पल्लवी को एक सदस्य के बजाय संपत्ति अर्जित करने का जरिया माना था। बिहार में दहेज विरोधी कानून (Anti-Dowry Laws) कड़े होने के बावजूद, सामाजिक सोच में बदलाव न आना ही सबसे बड़ी विफलता है।
इंसाफ की गुहार और आगे की कानूनी कार्यवाही
फिलहाल पल्लवी का शव पोस्टमार्टम के बाद उसके मायके वालों को सौंप दिया गया है। रोहतास के बड़काडीह गांव में उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा, जहाँ माहौल गमगीन बना हुआ है। वीरेंद्र पांडे और उनके परिजनों ने पटना पुलिस प्रशासन से मांग की है कि आरोपियों को जल्द से जल्द पकड़कर जेल भेजा जाए और मामले का स्पीडी ट्रायल (Speedy Trial) सुनिश्चित किया जाए।
कंकड़बाग पुलिस ने आईपीसी की धारा 304बी (दहेज हत्या) और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले को काफी गंभीरता से ले रहे हैं और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। पल्लवी की मौत ने एक बार फिर बिहार की राजधानी को झकझोर दिया है और अब सबकी नजरें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या 10 साल की वफादारी के बदले पल्लवी को मौत ही मिलनी थी? यह सवाल आज हर पटनावासी के मन में है।


