बिहार में जमीन खरीदना हुआ महंगा! पटना में दोगुना हुआ सर्किल रेट, स्टांप शुल्क भी बढ़ा, आज से लागू नई दरें

पटना: बिहार सरकार ने जमीन खरीद-बिक्री से जुड़े न्यूनतम मूल्य (सर्किल रेट) में बड़ा बदलाव करते हुए राजधानी पटना समेत पूरे राज्य में नई दरें लागू कर दी हैं। नई अधिसूचना के अनुसार पटना के कई प्रमुख इलाकों में जमीन की सरकारी कीमत दोगुनी कर दी गई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी जमीन का न्यूनतम मूल्य करीब 1.6 गुना बढ़ा दिया गया है।

नई व्यवस्था के तहत फ्रेजर रोड में जमीन का सर्किल रेट 1 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा कर दिया गया है। वहीं बोरिंग रोड में यह दर 40 लाख रुपये से बढ़कर 80 लाख रुपये प्रति कट्ठा हो गई है। कंकड़बाग, पाटलिपुत्र, कदमकुआं और दानापुर के कई इलाकों में भी जमीन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की गई है।

स्टांप शुल्क में भी बढ़ोतरी

राज्य सरकार ने स्टांप शुल्क को भी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। ऐसे में अब जमीन की रजिस्ट्री कराने वाले लोगों को पहले की तुलना में अधिक राशि खर्च करनी पड़ेगी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार कई मामलों में खरीदारों पर 80 से 90 हजार रुपये तक का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

हर साल अपने आप बढ़ेगा सर्किल रेट

नई नीति के तहत अब प्रत्येक वित्तीय वर्ष में जमीन और मकानों के न्यूनतम मूल्य (एमवीआर) में स्वतः 5 प्रतिशत की वृद्धि होगी। यानी आने वाले वर्षों में बिना नई अधिसूचना के भी जमीन की सरकारी कीमतें बढ़ती रहेंगी।

सरकार को मिलेगा बड़ा राजस्व

निबंधन विभाग का कहना है कि बाजार मूल्य और सरकारी मूल्य के बीच लंबे समय से बड़ा अंतर था। इसी को कम करने के लिए नई दरें लागू की गई हैं। सरकार को उम्मीद है कि सर्किल रेट और स्टांप शुल्क बढ़ने से राजस्व संग्रह में भी बड़ी वृद्धि होगी।

नई व्यवस्था की प्रमुख बातें

  • फ्रेजर रोड में सर्किल रेट 1 करोड़ से बढ़कर 2 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा
  • बोरिंग रोड में 40 लाख से बढ़कर 80 लाख रुपये प्रति कट्ठा
  • पटना के कई प्रमुख इलाकों में जमीन की कीमत दोगुनी
  • ग्रामीण क्षेत्रों में न्यूनतम मूल्य 1.6 गुना बढ़ा
  • स्टांप शुल्क 6% से बढ़ाकर 7% किया गया
  • हर वित्तीय वर्ष में एमवीआर स्वतः 5% बढ़ेगा
  • नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू

इस फैसले के बाद बिहार में जमीन खरीदना पहले से अधिक महंगा हो गया है। हालांकि सरकार का दावा है कि इससे जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य और सरकारी मूल्य के बीच का अंतर कम होगा तथा राजस्व में बढ़ोतरी होगी।

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